Pratapgarh News: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से एक बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ एक पेट्रोल पंप पर हाई-मास्ट लाइट पोल लगाए जाने के दौरान हुए भीषण हादसे में समाजवादी पार्टी के नेता लाल बहादुर यादव की जान चली गई। 40 क्विंटल वजनी पोल सीधे उनकी चलती कार पर जा गिरा, जिससे गाड़ी के परखच्चे उड़ गए और यादव की मौके पर ही मौत हो गई।
कैसे हुआ यह भीषण हादसा?
यह घटना प्रतापगढ़ के एक भारत पेट्रोलियम पंप की है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पंप परिसर में लगभग 65 फीट ऊंचा और करीब 40 क्विंटल वजनी एक भारी-भरकम हाई-मास्ट लाइट पोल क्रेन की मदद से खड़ा किया जा रहा था। तभी अचानक क्रेन का बेल्ट (पट्टा) टूट गया और भारी पोल अनियंत्रित होकर सड़क से गुजर रही लाल बहादुर यादव की हुंडई क्रेटा (Hyundai Creta) कार पर गिर पड़ा।
हादसा इतना भीषण था कि पोल गिरते ही कार का अगला हिस्सा पूरी तरह दब गया। हालांकि कार के एयरबैग्स भी खुले, लेकिन पोल का वजन इतना ज्यादा था कि सपा नेता को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
बाल-बाल बचे अन्य लोग
जिस वक्त यह हादसा हुआ, सपा नेता की कार के ठीक पीछे कुछ बाइक सवार और एक ई-रिक्शा भी चल रहे थे। पोल गिरते देख उन्होंने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाए, जिससे उनकी जान बाल-बाल बच गई। अगर वे थोड़ा और करीब होते, तो हताहतों की संख्या बढ़ सकती थी।
कौन थे लाल बहादुर यादव?
48 वर्षीय लाल बहादुर यादव समाजवादी पार्टी के सक्रिय नेता थे। राजनीति के साथ-साथ वह पेशे से PWD ठेकेदार भी थे और उनके पास देसी शराब का ठेका भी था। वह अपने तीन भाइयों और एक बहन में सबसे बड़े थे। उन्होंने पूर्व में अंतू नगर पंचायत से दो बार चुनाव भी लड़ा था। उनके पीछे अब उनके परिवार में पत्नी, चार बेटियां और एक बेटा है।
लापरवाही के आरोप और प्रशासन की कार्रवाई
हादसे के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। मौके पर मौजूद लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद कार का दरवाजा तोड़कर यादव को बाहर निकाला और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सपा नेता की मौत की खबर मिलते ही उनके समर्थक और परिजन बड़ी संख्या में मौके पर जुट गए और पेट्रोल पंप प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। परिजनों का कहना है कि जब इतना भारी काम चल रहा था, तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं थे और यातायात को क्यों नहीं रोका गया?
पुलिस की कार्रवाई:
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पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं।
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देखा जा रहा है कि क्या पोल लगाने के दौरान सुरक्षा मानकों (Safety Protocols) का पालन किया गया था या नहीं।
निष्कर्ष (Editor’s Note)
यह घटना निर्माण कार्यों के दौरान बरती जाने वाली लापरवाही का एक बड़ा उदाहरण है। सार्वजनिक स्थानों पर भारी मशीनरी और पोल लगाने के दौरान सुरक्षा घेरा बनाना अनिवार्य है, जिसकी कमी यहाँ साफ नजर आई।
क्या आपको लगता है कि इस तरह के हादसों के लिए केवल ठेकेदार जिम्मेदार है या प्रशासन की निगरानी में भी कमी है? हमें कमेंट में जरूर बताएं।

