जयपुर: राजस्थान के चर्चित 900 करोड़ रुपये के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। मंगलवार सुबह ACB की टीमों ने एक साथ 4 राज्यों के 15 ठिकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई की सबसे बड़ी गाज रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल पर गिरी है, जिनके ठिकानों पर भी ब्यूरो की टीमें पहुंचीं। इस पूरे मामले में अब तक 9 रसूखदार लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है।
शानदार करियर पर भ्रष्टाचार का ‘काला दाग’
सुबोध अग्रवाल राजस्थान कैडर के उन अधिकारियों में गिने जाते रहे हैं जिनका प्रोफाइल किसी मिसाल से कम नहीं था। आईआईटी दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग, प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी (अमेरिका) से पब्लिक पॉलिसी और राजस्थान यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में पीएचडी करने वाले अग्रवाल का प्रशासनिक सफर बेहद शानदार रहा।
अपने 35 साल के करियर में उन्होंने 40 से ज्यादा महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। नीति आयोग तक उनके काम की सराहना कर चुका था। लेकिन 15 दिसंबर 2025 को उनके रिटायरमेंट से ठीक पहले इस घोटाले में नाम आने ने उनके पूरे करियर पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
क्यों रडार पर आए पूर्व ACS सुबोध अग्रवाल?
अशोक गहलोत सरकार के दौरान सुबोध अग्रवाल जलदाय विभाग (PHED) के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान ‘हर घर जल’ योजना के टेंडर्स में भारी अनियमितताएं बरती गईं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अब ACB की जांच में यह सामने आया है कि नियमों को ताक पर रखकर चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुँचाया गया।
क्या है 900 करोड़ का जल जीवन मिशन घोटाला?
जल जीवन मिशन का उद्देश्य राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में हर घर तक नल से जल पहुँचाना था। लेकिन भ्रष्टाचार के दीमक ने इस महत्वाकांक्षी योजना को खोखला कर दिया।
-
फर्जी सर्टिफिकेट का खेल: ठेकेदारों ने विभाग के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र (Experience Certificates) के आधार पर करोड़ों के टेंडर हासिल किए।
-
घटिया पाइपों की सप्लाई: सरकारी खजाने को चपत लगाने के लिए तय मानकों के विपरीत बेहद घटिया क्वालिटी के पाइपों का इस्तेमाल किया गया।
-
बिना काम किए भुगतान: जांच में यह भी चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि कई गांवों में काम शुरू हुए बिना ही करोड़ों रुपये का भुगतान उठा लिया गया।
इन अधिकारियों पर भी गिर चुकी है गाज
ACB ने इस मामले में केवल आईएएस ही नहीं, बल्कि विभाग के अन्य बड़े चेहरों को भी नामजद किया है। इससे पहले तीन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है:
-
दिनेश गोयल: तत्कालीन मुख्य अभियंता (विशेष परियोजना)
-
महेंद्र प्रकाश सोनी: तत्कालीन अधीक्षण अभियंता (अजमेर)
-
सिद्धार्थ टांक: अधिशासी अभियंता (भीलवाड़ा)
इन अधिकारियों पर आरोप है कि इन्होंने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चहेती कंपनियों को ठेके दिलाए और सरकार की तिजोरी में सेंध लगाई।
निष्कर्ष: अब आगे क्या?
एसीबी की इस कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे और ठेकेदारों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। हिरासत में लिए गए 9 लोगों से पूछताछ जारी है, जिससे कई और बड़े नामों के खुलासे होने की उम्मीद है। 15 ठिकानों पर चल रही इस छापेमारी में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और बेनामी संपत्तियों के सुराग मिलने की भी संभावना है।

