India AI Impact Summit 2026: दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit 2026 के पहले दिन भारी भीड़ और अव्यवस्था देखने को मिली। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश से हजारों स्टार्टअप फाउंडर्स, टेक एक्सपर्ट्स, निवेशक और प्रतिनिधि पहुंचे थे। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के कारण प्रवेश, सुरक्षा जांच और पंजीकरण में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इस स्थिति को देखते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री Ashwini Vaishnaw ने लोगों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और भरोसा दिलाया कि आने वाले दिनों में व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाएगा।
मंत्री ने कहा– लोगों की भागीदारी उम्मीद से ज्यादा रही
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस समिट में 70 हजार से ज्यादा लोगों की भागीदारी रही, जो सरकार की अपेक्षा से कहीं अधिक थी। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आने से पहले दिन कुछ दिक्कतें हुईं, लेकिन अब स्थिति काफी हद तक नियंत्रित है।
दिल्ली के Bharat Mandapam में आयोजित इस सम्मेलन में उन्होंने कहा कि सरकार सभी सुझावों के लिए खुली है और प्रतिभागियों को बेहतर अनुभव देने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि आयोजन स्थल पर एक विशेष “वॉर रूम” बनाया गया है, जो लगातार हालात पर नजर रख रहा है।
पहले दिन उमड़ी भारी भीड़, एंट्री में लगी लंबी लाइनें
समिट के उद्घाटन दिन हजारों की संख्या में लोग सुबह से ही आयोजन स्थल पर पहुंच गए थे। इससे एंट्री गेट्स पर लंबी कतारें लग गईं। सुरक्षा जांच और पहचान सत्यापन में ज्यादा समय लगने से कई प्रतिभागियों को घंटों इंतजार करना पड़ा।
कई लोगों ने बताया कि उन्हें अपने सत्र और मीटिंग्स मिस करनी पड़ीं क्योंकि वे समय पर अंदर प्रवेश नहीं कर पाए। भीड़ अधिक होने के कारण कई जगहों पर भ्रम और अव्यवस्था की स्थिति भी बनी रही।
प्रदर्शकों और स्टार्टअप फाउंडर्स की बढ़ी परेशानी
सम्मेलन में भाग लेने आए कई स्टार्टअप फाउंडर्स और प्रदर्शकों ने व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि उन्हें समय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिले और बार-बार सुरक्षा जांच के कारण परेशानी हुई।
कुछ प्रदर्शकों ने यह भी आरोप लगाया कि सुरक्षा कारणों से उन्हें अपने स्टॉल खाली करने के लिए कहा गया, लेकिन बाद में यह नहीं बताया गया कि वे कब दोबारा प्रवेश कर सकते हैं।
इस वजह से कई स्टार्टअप्स अपने उत्पाद और तकनीक को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं कर पाए।
प्रधानमंत्री के आगमन से पहले कराया गया परिसर खाली
उद्घाटन समारोह से पहले सुरक्षा कारणों से पूरे परिसर को खाली कराया गया था, क्योंकि कार्यक्रम में प्रधानमंत्री Narendra Modi शामिल होने वाले थे।
इसी दौरान कुछ स्टार्टअप्स को नुकसान भी उठाना पड़ा। एक फाउंडर ने आरोप लगाया कि सुरक्षा जांच के दौरान उनके AI वियरेबल डिवाइस गायब हो गए।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्होंने इस कार्यक्रम के लिए यात्रा, होटल, स्टॉल और उपकरणों पर भारी खर्च किया था, लेकिन अचानक हुए खालीकरण में उन्हें बड़ा नुकसान झेलना पड़ा।
संचार की कमी पर उठे गंभीर सवाल
कई प्रतिभागियों ने आयोजन समिति पर संचार की कमी का आरोप लगाया। उनका कहना था कि उन्हें घंटों बाहर खड़ा रहना पड़ा, लेकिन यह नहीं बताया गया कि अंदर कब और कैसे प्रवेश मिलेगा।
कुछ फाउंडर्स ने कहा कि अगर प्रवेश सीमित था, तो इसकी जानकारी पहले ही दी जानी चाहिए थी। इससे लोगों को मानसिक तनाव और निराशा का सामना करना पड़ा।
उनका मानना है कि इस तरह की अव्यवस्था भारत के AI इकोसिस्टम की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है।
इंटरनेट और रजिस्ट्रेशन में आई तकनीकी समस्याएं
सम्मेलन के दौरान कई तकनीकी समस्याएं भी सामने आईं। प्रतिभागियों ने कमजोर वाई-फाई, मोबाइल नेटवर्क की खराब स्थिति और रजिस्ट्रेशन सिस्टम में गड़बड़ी की शिकायत की।
कई बार ऑनलाइन पंजीकरण फेल हो गया, जिससे लोगों को दोबारा लाइन में लगना पड़ा। इसके अलावा, वर्कस्पेस और बैठने की सीमित व्यवस्था भी परेशानी का कारण बनी।
कुछ उद्यमियों ने आरोप लगाया कि वीआईपी मेहमानों को प्राथमिकता दी गई, जबकि आम प्रतिभागियों को घंटों इंतजार करना पड़ा।
आयोजकों ने उठाए सुधारात्मक कदम
पहले दिन की समस्याओं के बाद आयोजकों ने तुरंत व्यवस्थाओं में सुधार किया। एंट्री गेट्स की संख्या बढ़ाई गई, स्टाफ की तैनाती बढ़ाई गई और भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया।
आयोजन समिति ने कहा कि अब प्रवेश प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और प्रतिभागियों को बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं।
सरकार और आयोजकों का दावा है कि आने वाले दिनों में समिट का अनुभव पहले से कहीं अधिक सहज और व्यवस्थित होगा।
आगे के दिनों को लेकर बढ़ी उम्मीदें
हालांकि सम्मेलन की शुरुआत थोड़ी अव्यवस्थित रही, लेकिन इसके बावजूद कई प्रदर्शक और प्रतिभागी आने वाले दिनों को लेकर आशावादी नजर आ रहे हैं।
इस समिट में बड़ी टेक कंपनियों, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की भागीदारी से भारत को वैश्विक AI मंच पर मजबूत पहचान मिलने की उम्मीद है।
आयोजकों का मानना है कि यह मंच विकासशील देशों की आवाज को दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
निष्कर्ष
India AI Impact Summit 2026 का पहला दिन भारी भीड़, तकनीकी समस्याओं और अव्यवस्था से प्रभावित रहा। हालांकि, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की माफी और आयोजकों द्वारा उठाए गए सुधारात्मक कदमों से यह संकेत मिलता है कि स्थिति को संभालने की गंभीर कोशिश की जा रही है।
यदि आने वाले दिनों में व्यवस्थाएं बेहतर रहती हैं, तो यह सम्मेलन भारत के AI भविष्य के लिए एक मजबूत आधार साबित हो सकता है।

