धार | 19 फरवरी, 2026
मध्य प्रदेश के धार जिले में एक प्रस्तावित चूना पत्थर (Limestone) खदान और सीमेंट प्लांट के सर्वे को लेकर स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई। गुरुवार को सर्वे करने पहुंची प्रशासनिक टीम और पुलिस बल को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया और ग्रामीणों ने टीम पर पथराव शुरू कर दिया।
प्रशासनिक टीम पर हमला और वाहनों में तोड़फोड़
मिली जानकारी के अनुसार, प्रशासन की टीम 9 अलग-अलग थानों के पुलिस बल के साथ गांव में सर्वे और ड्रिलिंग का काम करने पहुंची थी। जैसे ही कृषि भूमि पर ड्रिलिंग मशीनें लगाई गईं, बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं वहां एकत्र हो गए।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि गुस्साई भीड़ ने तहसीलदार के वाहन सहित कई सरकारी गाड़ियों को निशाना बनाया। भीड़ ने तहसीलदार की कार को पलटने की भी कोशिश की। स्थिति को बिगड़ता देख और किसी बड़े हादसे की आशंका के चलते प्रशासनिक अधिकारियों ने सर्वे अधूरा छोड़ वहां से पीछे हटने में ही भलाई समझी।
ग्रामीण क्यों कर रहे हैं विरोध?
ग्रामीणों का दावा है कि वे पिछले कई महीनों से इस प्रस्तावित खदान और सीमेंट फैक्ट्री का शांतिपूर्ण विरोध कर रहे हैं। उनके विरोध के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
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उपजाऊ भूमि का नुकसान: ग्रामीणों को डर है कि खदान बनने से उनकी खेती योग्य जमीन बंजर हो जाएगी।
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जल संकट: खनन गतिविधियों से भूजल स्तर (Groundwater) गिरने की आशंका है।
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विस्थापन का डर: कुक्षी, बाग और जोबट ब्लॉकों के कई परिवारों को बेघर होने का डर सता रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पूर्व में जिला कलेक्टर प्रियंका मिश्रा ने आश्वासन दिया था कि बिना जन प्रतिनिधियों और ग्रामीणों की सहमति के कोई काम नहीं होगा, लेकिन प्रशासन ने इस वादे का उल्लंघन किया है।
प्रशासन और विपक्ष का रुख
एसडीएम प्रमोद गुर्जर ने स्पष्ट किया कि सैंपलिंग का काम नियमों के अनुसार किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि “ग्रामीणों की जो भी आपत्तियां हैं, वे लिखित में दे सकते हैं और उचित स्तर पर उनका समाधान किया जाएगा। फिलहाल मौके पर शांति बहाल कर दी गई है।”
वहीं, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस घटना पर सरकार को घेरा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि “आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा सड़क से लेकर विधानसभा तक की जाएगी।” उन्होंने प्रशासन पर बिना सहमति के जबरन प्रोजेक्ट थोपने का आरोप लगाया।

