पश्चिमी एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान ने पाकिस्तान की कथित ‘मध्यस्थता’ (Mediation) की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत में मौजूद ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे इस युद्ध को रुकवाने में पाकिस्तान की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने इन दावों को “पूरी तरह झूठा और भ्रामक” बताया।
यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिमी एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और वैश्विक राजनीति का केंद्र बिंदु यही क्षेत्र बन चुका है।
पाकिस्तान की ‘मध्यस्थता’ पर ईरान का सीधा इनकार
रविवार को बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए ईरानी प्रतिनिधि इलाही ने कहा कि पाकिस्तान के जरिए शांति वार्ता कराने की जो बातें सामने आ रही हैं, उनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने कहा—
“पाकिस्तान द्वारा मध्यस्थता की जो खबरें फैलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह बेबुनियाद हैं। ईरान और अमेरिका के बीच किसी भी प्रकार की बातचीत में पाकिस्तान की कोई भूमिका नहीं है।”
इलाही ने यह भी संकेत दिया कि इस तरह की अफवाहें जानबूझकर फैलायी जा रही हैं ताकि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों को प्रभावित किया जा सके।
‘पर्दे के पीछे की कूटनीति’ सिर्फ अफवाह—इलाही
ईरानी दूत ने कहा कि “पर्दे के पीछे” पाकिस्तान के जरिए वार्ता होने की चर्चाएं केवल भ्रम पैदा करने के लिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ देश दिखावे के लिए शांति वार्ता की बात करते हैं, लेकिन वास्तव में वे संघर्ष समाप्त करने को लेकर गंभीर नहीं हैं।
उनके अनुसार, इन अफवाहों का मकसद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता पैदा करना और तेल कीमतों में हेरफेर करना भी हो सकता है।
भारत की भूमिका पर सकारात्मक संकेत
जब इलाही से पूछा गया कि क्या भारत इस संकट को सुलझाने में भूमिका निभा सकता है, तो उन्होंने सकारात्मक रुख अपनाया।
उन्होंने कहा—
“भारत सहित दुनिया के सभी देश इस संकट को खत्म करने और शांति बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।”
यह बयान भारत की संतुलित और तटस्थ विदेश नीति की वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता को दर्शाता है। भारत लगातार संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान की वकालत करता रहा है।
ईरान का आरोप: अमेरिका और इजरायल जिम्मेदार
ईरान ने इस पूरे संघर्ष के लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है। इलाही ने कहा कि 28 फरवरी को इन देशों ने बिना किसी उकसावे के ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू की।
ईरानी पक्ष का दावा है कि इन हमलों में आम नागरिकों, अस्पतालों, स्कूलों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया।
“ईरान ने कभी युद्ध नहीं चाहा। यह युद्ध हम पर थोपा गया है,” — इलाही
उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध कब खत्म होगा, यह पूरी तरह अमेरिका और इजरायल के रुख पर निर्भर करेगा।
28 फरवरी के हमले से भड़का संघर्ष
विश्लेषकों के अनुसार, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमले के बाद ही पश्चिमी एशिया में व्यापक संघर्ष की शुरुआत हुई।
इन हमलों में ईरान के 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर ने हालात को और विस्फोटक बना दिया। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों को निशाना बनाया।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ा सैन्य टकराव
ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। समुद्री मार्गों पर सुरक्षा खतरे बढ़ गए हैं और कई तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष अगर लंबा खिंचता है, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
इस टकराव का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
- कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की आशंका
- सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर दबाव
- महंगाई दर बढ़ने की संभावना
विशेषज्ञों के मुताबिक, होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर तनाव बढ़ने से दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक झटका
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि ईरान का यह बयान पाकिस्तान के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका है।
पाकिस्तान खुद को वैश्विक मंच पर एक अहम मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन ईरान ने उसकी भूमिका को पूरी तरह नकार दिया है।
इससे पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
भारत की बढ़ती कूटनीतिक अहमियत
वहीं, भारत के प्रति ईरान के सकारात्मक संकेत यह दर्शाते हैं कि संकट के इस दौर में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
भारत की ‘संतुलित विदेश नीति’ और सभी पक्षों से संवाद बनाए रखने की रणनीति उसे एक संभावित शांति दूत के रूप में स्थापित कर सकती है।
तेल बाजार में बढ़ सकती है उथल-पुथल
ईरान के इस बयान के बाद वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
- यदि संघर्ष जारी रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल संभव
- भारत जैसे आयातक देशों पर आर्थिक दबाव
- पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों पर असर
ईरान में जनाक्रोश और बदलते समीकरण
अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान के भीतर व्यापक जनाक्रोश देखा जा रहा है। यह घटना पूरे पश्चिमी एशिया के भू-राजनीतिक समीकरण को बदलने वाली साबित हो सकती है।
ईरान जहां एक तरफ बदले की कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ता जा रहा है।
निष्कर्ष: वैश्विक संकट की ओर बढ़ता पश्चिमी एशिया
पश्चिमी एशिया में जारी यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक संकट का रूप लेता जा रहा है।
- कूटनीतिक दावे और वास्तविकता के बीच बड़ा अंतर
- महाशक्तियों की सीधी भागीदारी
- ऊर्जा और अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव
- भारत जैसे देशों की भूमिका अहम
ईरान द्वारा पाकिस्तान की मध्यस्थता को खारिज करना इस पूरे घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में क्या कूटनीतिक प्रयास इस युद्ध को रोक पाएंगे या यह संघर्ष और गहराएगा।

