वॉशिंगटन | 23 अप्रैल, 2026 | Trump calls India and China ‘hellholes’: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में आव्रजन (Immigration) और नागरिकता कानूनों को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। हाल ही में ट्रंप ने मशहूर राजनीतिक टिप्पणीकार माइकल सैवेज के एक बेहद विवादास्पद पॉडकास्ट ‘सैवेज नेशन’ (Savage Nation) को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर साझा किया है।
इस पॉडकास्ट और इसके साथ जारी पत्र में भारत, चीन और अन्य विकासशील देशों को ‘हेल-होल’ (नरक के समान) कहकर संबोधित किया गया है। इतना ही नहीं, इसमें भारतीय और चीनी प्रवासियों के खिलाफ ‘नस्लीय’ और ‘अपमानजनक’ शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया है, जिसने वैश्विक स्तर पर बहस छेड़ दी है।
क्या है ‘बर्थराइट सिटीजनशिप’ पर ट्रंप का वार?
विवाद की मुख्य जड़ अमेरिका में मिलने वाली ‘बर्थराइट सिटीजनशिप’ (Birthright Citizenship) है। अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के अनुसार, अमेरिका की धरती पर जन्म लेने वाला कोई भी बच्चा स्वतः वहां का नागरिक बन जाता है।
ट्रंप और उनके समर्थक इस कानून को खत्म करने की वकालत कर रहे हैं। साझा किए गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि भारत और चीन जैसे देशों से लोग अपनी गर्भावस्था के नौवें महीने में सिर्फ इसलिए अमेरिका आते हैं ताकि उनका बच्चा वहां का नागरिक बन सके और बाद में वे अपने पूरे परिवार को अमेरिका बुला सकें। इसे “बर्थ टूरिज्म” का नाम दिया गया है।
भारतीय प्रवासियों को कहा “लैपटॉप वाले गैंगस्टर”
माइकल सैवेज के इस पत्र में भारतीय और चीनी प्रवासियों के लिए बेहद कड़े शब्दों का प्रयोग किया गया है। पत्र में लिखा गया है:
“ये लोग लैपटॉप वाले गैंगस्टर (Gangsters with laptops) हैं, जिन्होंने हमारे झंडे का अपमान किया है। इन्होंने अमेरिका को माफिया परिवारों से भी ज्यादा नुकसान पहुँचाया है। इन्होंने हमें अपने ही देश में दूसरे दर्जे का नागरिक बना दिया है।”
सैवेज ने यह भी दावा किया कि कैलिफोर्निया की बड़ी टेक कंपनियों में अब किसी ‘श्वेत पुरुष’ (White man) को नौकरी नहीं मिल सकती क्योंकि वहां का पूरा सिस्टम भारतीयों और चीनियों ने कब्जा लिया है।
संविधान और आधुनिक यात्रा पर सवाल
ट्रंप द्वारा साझा किए गए इस पोस्ट में अमेरिकी संविधान को आधुनिक समय के हिसाब से ‘पुराना’ बताया गया है। तर्क दिया गया है कि:
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पुराना कानून: जब संविधान लिखा गया था, तब न हवाई जहाज थे, न इंटरनेट और न ही रेडियो।
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आधुनिक वास्तविकता: आज लोग विमान से कुछ ही घंटों में अमेरिका पहुँच जाते हैं, इसलिए जन्म के आधार पर नागरिकता देने का नियम अब प्रासंगिक नहीं रह गया है।
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राष्ट्रीय जनमत संग्रह की मांग: पत्र में मांग की गई है कि इस मुद्दे पर अदालतों के बजाय जनता के बीच ‘नेशनल रेफरेंडम’ (जनमत संग्रह) कराया जाना चाहिए।
संस्थाओं पर निशाना: ACLU को बताया ‘आपराधिक’
इस पत्र में केवल प्रवासियों को ही नहीं, बल्कि मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था ACLU (American Civil Liberties Union) को भी निशाने पर लिया गया है। इसे एक “आपराधिक संस्था” बताते हुए मांग की गई है कि इसके खिलाफ RICO (संगठित अपराध से संबंधित कानून) के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए, क्योंकि यह अवैध प्रवासियों का पक्ष लेती है।
स्वास्थ्य सेवाओं और टैक्स पर दबाव का दावा
ट्रंप समर्थकों का आरोप है कि अवैध प्रवासी अमेरिका की स्वास्थ्य सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं (Welfare Schemes) का दुरुपयोग कर रहे हैं। पत्र में दावा किया गया है कि इमरजेंसी रूम में इलाज का सारा बोझ अमेरिकी टैक्सपेयर्स पर पड़ता है और कैलिफोर्निया जैसे राज्यों में वेलफेयर फ्रॉड बढ़ रहा है।
प्रमुख आरोप और विवादित बिंदु
| श्रेणी | आरोप/दावा |
| नस्लीय टिप्पणी | भारत और चीन को ‘Hellholes’ कहा गया। |
| नागरिकता | ‘बर्थराइट सिटीजनशिप’ को खत्म करने की मांग। |
| रोजगार | टेक सेक्टर में भारतीयों के प्रभाव को ‘गैंगस्टरवाद’ बताया गया। |
| कानून | संविधान के 14वें संशोधन को बदलने की वकालत। |
| संस्थाएं | ACLU जैसी संस्थाओं को ‘क्रिमिनल’ करार दिया गया। |
डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम अमेरिका में रहने वाले लाखों भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए चिंता का विषय है। भारत और चीन जैसे देशों को ‘नरक’ बताना कूटनीतिक रूप से भी रिश्तों में खटास पैदा कर सकता है। हालांकि, अमेरिका के भीतर इस मुद्दे पर जनता दो धड़ों में बंटी हुई है। देखना होगा कि आने वाले समय में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ‘बर्थराइट सिटीजनशिप’ पर क्या रुख अपनाता है।

