भोपाल/सिवनी | 24 अप्रैल, 2026 | Madhya Pradesh News: कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों, तो अभावों की बेडियां भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले की रहने वाली नौशीन नाज़ की कहानी कुछ ऐसी ही है। आज जब नौशीन भोपाल के नेशनल कैंप में देश की बेहतरीन प्रतिभाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ट्रेनिंग कर रही हैं, तो उनके पीछे संघर्षों की एक लंबी दास्तान है। यह कहानी एक ऐसी लड़की की है जिसने टूटी हुई हॉकी स्टिक को कपड़े से लपेटकर खेलना सीखा और आज एशिया कप की दहलीज पर खड़ी है।
टूटी स्टिक और उधार का सामान: अभावों में बीता बचपन
महज 15 साल की नौशीन नाज़ का सफर किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसा लगता है। उनके पिता अहफ़ाज़ खान एक दिहाड़ी मजदूर हैं, जो दिन के मुश्किल से 250 रुपये कमा पाते हैं। 48 वर्षीय अहफ़ाज़ के लिए 7 भाई-बहनों के बड़े परिवार का पेट पालना ही एक चुनौती थी, ऐसे में बेटी के लिए महंगी स्पोर्ट्स किट खरीदना उनके लिए किसी सपने जैसा था।
नौशीन के पास न अच्छे जूते थे और न ही अपनी हॉकी स्टिक। उन्होंने किसी से पुरानी और टूटी हुई स्टिक उधार ली थी। जब वह स्टिक बीच से चटक जाती, तो वह हार मानने के बजाय उसे कपड़े की कतरनों से कसकर बांध लेतीं और फिर से मैदान पर उतर जातीं। उनकी जिद और जुनून का ही नतीजा है कि आज वह नेशनल कैंप का हिस्सा हैं।
जब MP हॉकी अकादमी ने पहचाना ‘हीरा’
नौशीन की किस्मत ने साल 2023 में करवट ली। मध्य प्रदेश हॉकी अकादमी के कोचों की नजर इस प्रतिभाशाली खिलाड़ी पर पड़ी। अकादमी ने न केवल नौशीन को गोद लिया, बल्कि उन्हें रहने-खाने से लेकर वर्ल्ड क्लास ट्रेनिंग और महंगी स्पोर्ट्स किट भी मुहैया कराई।
अहफ़ाज़ खान भावुक होकर बताते हैं कि अकादमी ने उनकी बेटी के मुरझाते सपनों में जान फूंक दी। जिस बेटी के पास कभी अपनी स्टिक नहीं थी, आज वह बेहतरीन गियर के साथ प्रोफेशनल ट्रेनिंग ले रही है।
राजगीर में दिखाया दम: बनीं नेशनल टॉप स्कोरर
नौशीन की प्रतिभा का असली प्रदर्शन हाल ही में बिहार के राजगीर में आयोजित सब-जूनियर नेशनल हॉकी चैंपियनशिप में देखने को मिला।
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कुल गोल: नौशीन ने पूरे टूर्नामेंट में धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए 9 गोल दागे।
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खिताब: वह न केवल टूर्नामेंट की टॉप स्कोरर बनीं, बल्कि फाइनल मैच में उन्हें ‘बेहतरीन खिलाड़ी’ के सम्मान से भी नवाजा गया।
नौशीन की सफलता का असर उनके घर पर भी दिख रहा है। उनकी छोटी बहन भी अब अपनी बड़ी बहन के नक्शेकदम पर चलते हुए अकादमी में ट्रेनिंग ले रही है।
लक्ष्य: एशिया कप और टीम इंडिया की जर्सी
नेशनल कैंप में नौशीन अक्सर बाकी खिलाड़ियों के हाई-टेक संसाधनों को देखती हैं, लेकिन उन्हें इसका मलाल नहीं होता। वह कहती हैं, “मेरे पास जो नहीं था, उसने मुझे लड़ना सिखाया। अब मेरे पास लक्ष्य है—भारत के लिए खेलना और एशिया कप में देश का नाम रोशन करना।”
प्रेरणा की मिसाल: छोटे शहर से बड़े सपने
सिवनी की तंग गलियों और किराए की झोपड़ी से निकलकर नेशनल कैंप तक का नौशीन का यह सफर उन हजारों युवाओं के लिए मिसाल है जो संसाधनों की कमी को अपनी नाकामी का बहाना बनाते हैं। नौशीन ने साबित कर दिया कि मैदान पर आपका गियर नहीं, बल्कि आपका जिगरा बोलता है।
नौशीन नाज़: एक नज़र में संघर्ष और सफलता
| विवरण | जानकारी |
| नाम | नौशीन नाज़ |
| उम्र | 15 साल |
| निवासी | सिवनी, मध्य प्रदेश |
| पिता का पेशा | दिहाड़ी मजदूर (₹250/दिन) |
| उपलब्धि | नेशनल टॉप स्कोरर (9 गोल, राजगीर नेशनल) |
| वर्तमान लक्ष्य | भारतीय राष्ट्रीय हॉकी टीम और एशिया कप |
नौशीन नाज़ की कहानी हमें याद दिलाती है कि प्रतिभा किसी सुख-सुविधा की मोहताज नहीं होती। मध्य प्रदेश सरकार और खेल अकादमी के सहयोग से अब यह ‘हीरा’ तराशा जा चुका है। उम्मीद है कि बहुत जल्द हम नौशीन को नीली जर्सी में देश के लिए गोल दागते हुए देखेंगे।

