BHU Hospital Stray Dogs: प्रधानमंत्री Narendra Modi के वाराणसी दौरे से ठीक पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के सर सुंदरलाल अस्पताल की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कर योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है।
इन तस्वीरों में अस्पताल परिसर के अंदर आवारा कुत्ते घूमते दिखाई दे रहे हैं। इसे लेकर अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि अगर वाराणसी को ‘क्योटो’ नहीं बना सकते, तो कम से कम उसे ‘कुकुरमुक्त’ यानी कुत्तों से मुक्त तो कर दीजिए। उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
BHU अस्पताल की तस्वीरों ने बढ़ाया सियासी तापमान
अस्पताल के अंदर घूमते दिखे आवारा कुत्ते
वाराणसी के प्रतिष्ठित सर सुंदरलाल अस्पताल, जो BHU का प्रमुख चिकित्सा संस्थान है, वहां से सामने आई तस्वीरों ने लोगों का ध्यान खींचा है। तस्वीरों में अस्पताल परिसर के भीतर कई आवारा कुत्ते खुलेआम घूमते नजर आ रहे हैं।
यह अस्पताल न सिर्फ वाराणसी बल्कि पूरे पूर्वांचल के मरीजों के लिए एक बड़ा इलाज केंद्र माना जाता है। ऐसे में अस्पताल परिसर में इस तरह की स्थिति सामने आना स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
अखिलेश यादव ने इन्हीं तस्वीरों को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा करते हुए सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए।
अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर साधा निशाना
‘क्योटो नहीं बना सकते तो कुकुरमुक्त ही कर दीजिए’
अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में लिखा कि अगर वाराणसी को ‘क्योटो’ नहीं बना सकते, तो कम से कम उसे ‘कुकुरमुक्त’ जरूर बना दीजिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र के मुख्य अस्पताल की हालत कम से कम सुधरनी चाहिए।
उनका यह बयान सीधे तौर पर राज्य सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक दावों पर सवाल उठाता है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जिस वाराणसी को विश्वस्तरीय शहर बनाने का वादा किया गया था, वहां बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं भी चुनौती बनी हुई हैं।
क्या है वाराणसी को क्योटो बनाने की योजना?
2014 में हुआ था भारत-जापान समझौता
अखिलेश यादव का ‘क्योटो’ वाला बयान 2014 में हुए उस समझौते की ओर इशारा करता है, जिसमें वाराणसी को जापान के प्रसिद्ध शहर Kyoto की तर्ज पर विकसित करने की योजना बनाई गई थी।
भारत और जापान के बीच हुए इस समझौते के तहत विरासत संरक्षण, शहर का आधुनिकीकरण, कला, संस्कृति और शैक्षणिक सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में साझेदारी तय हुई थी।
उस समय इस योजना को लेकर काफी चर्चा हुई थी और उम्मीद जताई गई थी कि वाराणसी का इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय स्तर की होगी। अखिलेश का तंज इसी वादे पर सवाल खड़ा करता है।
‘डबल इंजन’ सरकार पर भी उठाए सवाल
केंद्र और राज्य के बीच टकराव का इशारा
अखिलेश यादव ने भाजपा के ‘डबल इंजन सरकार’ के नारे पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने पूछा कि क्या राज्य और केंद्र की नेतृत्व व्यवस्था के बीच कोई टकराव चल रहा है?
उन्होंने कहा कि अगर ‘डबल इंजन’ के भीतर कोई टक्कर नहीं है, तो प्रधानमंत्री को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath से बात करनी चाहिए और स्वास्थ्य मंत्री की स्थिति के बारे में भी गंभीरता से जानकारी लेनी चाहिए।
उनका यह बयान राजनीतिक रूप से काफी तीखा माना जा रहा है क्योंकि इसमें उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से राज्य के स्वास्थ्य मंत्री की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए।
स्वास्थ्य मंत्री पर भी तीखा व्यंग्य
‘स्थायी छुट्टी’ देने की सलाह
अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री की वर्तमान स्थिति इतनी खराब है कि उनका पूरा मेडिकल चेकअप कराया जाए और फिर उन्हें हमेशा के लिए घर भेज दिया जाए।
उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि मंत्री को उनके पद से स्थायी छुट्टी दे देनी चाहिए। यह टिप्पणी साफ तौर पर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर हमला मानी जा रही है।
हालांकि उन्होंने किसी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
PM मोदी के वाराणसी दौरे से पहले बढ़ी सियासत
दो दिवसीय दौरे से पहले विपक्ष का हमला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचने वाले हैं। इससे पहले अखिलेश यादव का यह हमला राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विपक्ष इस मौके पर स्थानीय मुद्दों को उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। BHU अस्पताल की तस्वीरें इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं।
वाराणसी हमेशा से प्रधानमंत्री के राजनीतिक और भावनात्मक जुड़ाव का केंद्र रहा है, इसलिए यहां की व्यवस्थाओं पर सवाल उठना राष्ट्रीय स्तर की चर्चा बन जाता है।
जनता के बीच क्या संदेश गया?
स्वास्थ्य व्यवस्था फिर बनी बहस का मुद्दा
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की स्थिति और स्वास्थ्य व्यवस्था को बहस के केंद्र में ला दिया है। आम जनता के लिए यह मुद्दा सीधे जुड़ा हुआ है क्योंकि अस्पतालों की साफ-सफाई और सुरक्षा बुनियादी आवश्यकता है।
जब अस्पताल परिसर में आवारा कुत्ते घूमते नजर आते हैं, तो यह केवल एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि मरीजों की सुरक्षा का भी सवाल बन जाता है।
राजनीतिक बयानबाजी से अलग, यह मुद्दा आम लोगों के लिए बेहद संवेदनशील है।
Conclusion
BHU अस्पताल में आवारा कुत्तों की तस्वीरों ने केवल एक प्रशासनिक समस्या को नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की वास्तविक स्थिति को सामने ला दिया है। अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को उठाकर सरकार पर सीधा हमला किया है और इसे वाराणसी के विकास मॉडल से जोड़ दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी के दौरे से ठीक पहले आया यह बयान राजनीतिक रूप से बड़ा संदेश देता है। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या अस्पताल व्यवस्था में सुधार के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं। जनता फिलहाल जवाब और बदलाव—दोनों का इंतजार कर रही है।

