कोलकाता | 1 मई, 2026 | Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों में अब महज 48 घंटे का समय बचा है, लेकिन उससे पहले गुरुवार की रात कोलकाता की सड़कों पर जो हुआ, उसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया。 मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी ने देर रात खुद एक स्ट्रॉन्ग रूम का रुख किया, जिसके बाद पूरे राज्य में EVM के साथ ‘हेरफेर’ की खबरें आग की तरह फैल गईं。 हालांकि, चुनाव आयोग के हस्तक्षेप के बाद यह पूरा घटनाक्रम अंततः एक ‘गलतफहमी’ (False Alarm) साबित हुआ。
विवाद की शुरुआत: एक वीडियो और सस्पेंस
इस पूरे ड्रामे की शुरुआत तृणमूल कांग्रेस के एक ट्वीट से हुई, जिसमें मध्य कोलकाता के खुदीराम अनुशीलन केंद्र के भीतर संदिग्ध गतिविधियों का आरोप लगाया गया था。 गौरतलब है कि यहाँ उत्तर कोलकाता की सातों विधानसभा सीटों की EVM रखी गई हैं。 रात करीब 8:30 बजे जैसे ही यह वीडियो सामने आया, TMC के उम्मीदवार शशि पांजा और कुणाल घोष तुरंत मौके पर पहुँच गए और नेताजी इंडोर स्टेडियम के बाहर धरने पर बैठ गए。
ममता बनर्जी का ‘स्ट्रॉन्ग रूम’ में डेरा
जैसे ही यह खबर फैली कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद आ रही हैं, कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटने लगी。 हालांकि, उत्तर कोलकाता जाने के बजाय ममता बनर्जी दक्षिण कोलकाता के सखावत मेमोरियल स्कूल स्थित स्ट्रॉन्ग रूम पहुँचीं。 वे वहां लगभग चार घंटे तक रुकी रहीं और आधी रात के बाद ही बाहर निकलीं。
दूसरी ओर, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज कुमार अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि नियमों के अनुसार, ममता बनर्जी उत्तर कोलकाता की सुविधाओं में प्रवेश नहीं कर सकती थीं क्योंकि वे वहां से न तो उम्मीदवार थीं और न ही अधिकृत एजेंट。
Kolkata, West Bengal: Chief Minister Mamata Banerjee says, “I have the right to go inside, because earlier they didn’t allow anyone to go inside. But as per our election rules, the candidate and election agent of any party is allowed up to the sealed room. Not inside the sealed… pic.twitter.com/ixSBQX1nNB
— IANS (@ians_india) April 30, 2026
TMC का आरोप बनाम चुनाव आयोग की सफाई
TMC नेता कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि उम्मीदवारों को दोपहर 3:30 बजे स्ट्रॉन्ग रूम से जाने को कहा गया और उसके बाद शाम 4 बजे इसे दोबारा खोला गया。 उन्होंने दावा किया कि उन्हें और शशि पांजा को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई。
हालाँकि, आधी रात को बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में CEO मनोज कुमार अग्रवाल ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया。 उन्होंने इसे “मिसकम्युनिकेशन” (गलतफहमी) बताया और कहा कि सभी उम्मीदवारों को ईमेल के जरिए पोस्टल बैलेट प्रक्रिया की जानकारी पहले ही दे दी गई थी。
स्ट्रॉन्ग रूम के भीतर क्या चल रहा था?
निर्वाचन अधिकारी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कुछ महत्वपूर्ण तथ्य रखे:
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बिजली का अभाव: नियमों के अनुसार स्ट्रॉन्ग रूम के भीतर बिजली नहीं हो सकती, इसलिए टॉर्च का इस्तेमाल किया जा रहा था।
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CCTV की निगरानी: सभी स्ट्रॉन्ग रूम सील और बंद हैं, जिनकी निगरानी बाहर लगे CCTV कैमरों से की जा सकती है।
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पोस्टल बैलेट का मामला: खुदीराम अनुशीलन केंद्र में सात EVM स्ट्रॉन्ग रूम और एक अलग पोस्टल बैलेट स्ट्रॉन्ग रूम है। संदिग्ध हलचल केवल पोस्टल बैलेट वाले हिस्से में थी, न कि EVM रूम में।
भाजपा का हमला: ‘यह तो एग्जिट पोल है’
भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने ममता बनर्जी के इस दौरे को उनकी ‘हताशा’ करार दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ममता बनर्जी का यह व्यवहार पश्चिम बंगाल के लिए सबसे स्पष्ट “एग्जिट पोल” है और यह हार के डर से ध्यान भटकाने की कोशिश है।
4 मई को होगा फैसला
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए इस साल का चुनाव बेहद कड़ा रहा है。 जहां भाजपा ने राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है, वहीं ममता बनर्जी अपनी सत्ता बचाने की कोशिश में हैं。 चुनाव आयोग ने पुष्टि की है कि 4 मई को कड़ी सुरक्षा के बीच मतगणना शुरू होगी。
चुनाव से पहले इस तरह के विवाद मतदाताओं के बीच भ्रम पैदा करते हैं, लेकिन चुनाव आयोग की त्वरित कार्रवाई ने फिलहाल स्थिति को संभाल लिया है। अब सबकी नजरें 4 मई के नतीजों पर टिकी हैं कि बंगाल की जनता ने किसे अपना जनादेश दिया है।

