IMD Monsoon Forecast: देशभर में मई का महीना इस बार सामान्य से काफी अलग नजर आ रहा है। जहां आमतौर पर मई में भीषण गर्मी और लू का असर देखने को मिलता है, वहीं इस बार कई राज्यों में मौसम अपेक्षाकृत ठंडा बना हुआ है। लेकिन मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह बदलाव एक बड़े संकेत की ओर इशारा कर रहा है — दक्षिण-पश्चिम मानसून की समय पर एंट्री।
तमिलनाडु, केरल और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में बढ़ती बारिश और गरज-चमक की गतिविधियों ने मानसून के करीब आने के संकेत मजबूत कर दिए हैं। भारतीय मौसम विभाग यानी IMD का अनुमान है कि इस बार मानसून तय समय यानी 1 जून के आसपास केरल तट पर दस्तक दे सकता है।
दक्षिण भारत में बढ़ी प्री-मानसून गतिविधियां
तमिलनाडु और केरल में तेज हो रही बारिश
मौसम विभाग के अनुसार अगले सात दिनों तक तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और माहे में बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। इन इलाकों में प्री-मानसून तूफान और गरज-चमक के साथ बारिश लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह वही मौसमीय बदलाव है जो हर साल मानसून के आने से पहले दिखाई देता है। वातावरण में नमी बढ़ रही है और समुद्र से आने वाली हवाएं अब धीरे-धीरे सक्रिय हो रही हैं।
अंडमान-निकोबार में जल्द पहुंच सकता है मानसून
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को भारत में मानसून का पहला प्रवेश द्वार माना जाता है। यहां मानसून के पहुंचने में अब लगभग दो सप्ताह का समय बचा है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक मौजूदा संकेत बताते हैं कि मानसून की रफ्तार सामान्य बनी हुई है।
उत्तर भारत में बदलता मौसम क्या बता रहा?
गर्मी और आंधी-बारिश का मिला-जुला असर
उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत में इन दिनों मौसम लगातार बदल रहा है। कहीं तेज गर्मी पड़ रही है तो कहीं अचानक आंधी, बारिश और ओलावृष्टि देखने को मिल रही है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान समेत कई राज्यों में मौसम तेजी से करवट बदल रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह संक्रमण काल की स्थिति होती है, जब गर्मी और नमी दोनों का प्रभाव एक साथ दिखाई देता है। यही वह समय होता है जब मानसून धीरे-धीरे भारतीय उपमहाद्वीप की ओर बढ़ता है।
ऑस्ट्रेलिया का मौसम भारत के मानसून से कैसे जुड़ा?
मौसम विज्ञान का दिलचस्प संबंध
आमतौर पर लोगों को लगता है कि ऑस्ट्रेलिया का मौसम भारत से कोई खास संबंध नहीं रखता, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों के लिए यह बेहद अहम संकेत होता है। दरअसल भारत और ऑस्ट्रेलिया का मानसूनी चक्र एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा हुआ है।
जब ऑस्ट्रेलिया में मानसूनी गतिविधियां खत्म होने लगती हैं, तब भारतीय मानसून के लिए रास्ता साफ होने लगता है। यही कारण है कि मौसम विशेषज्ञ ऑस्ट्रेलिया के मौसम पर लगातार नजर रखते हैं।
पृथ्वी के चारों ओर घूमती है बारिश की पट्टी
मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि पृथ्वी के भूमध्य रेखा के आसपास बादलों और बारिश की एक विशाल अदृश्य पट्टी मौजूद रहती है। यह पट्टी हर साल सूर्य की स्थिति के अनुसार उत्तर और दक्षिण दिशा में खिसकती रहती है।
जब उत्तरी गोलार्ध में गर्मी बढ़ती है, तब यह पट्टी उत्तर की ओर बढ़ती है और दक्षिणी गोलार्ध में बारिश कम होने लगती है। इसी प्रक्रिया के चलते मानसून भारत की तरफ आगे बढ़ता है।
भारत की ओर बढ़ रही है मानसूनी बेल्ट
मालदीव और श्रीलंका की ओर बढ़ा सिस्टम
मौजूदा समय में यह बारिश वाली पट्टी भूमध्य रेखा पार कर चुकी है और अब मालदीव, श्रीलंका और अंडमान-निकोबार की ओर बढ़ रही है। यही मानसूनी बेल्ट समुद्र से नमी लेकर भारत की तरफ आती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक जैसे-जैसे यह पट्टी उत्तर की ओर बढ़ेगी, वैसे-वैसे भारत में मानसून और मजबूत होता जाएगा। यह प्रक्रिया हर साल मई से सितंबर के बीच देखने को मिलती है।
सितंबर में बदल जाता है पूरा चक्र
सितंबर के अंत तक यही प्रणाली वापस दक्षिण की ओर लौटने लगती है। तब भारत में मानसून की विदाई शुरू होती है और ऑस्ट्रेलिया में बारिश का मौसम लौट आता है। यह प्राकृतिक चक्र हर साल लगभग एक जैसे पैटर्न पर चलता है।
किसानों और अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है मानसून?
भारत की बड़ी आबादी आज भी खेती पर निर्भर है और देश की कृषि व्यवस्था काफी हद तक मानसून पर टिकी हुई है। यदि मानसून समय पर और सामान्य रहता है तो खेती, जल भंडारण और बिजली उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार मानसून सामान्य रहने की संभावना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर हो सकती है। अच्छी बारिश से खरीफ फसलों को फायदा मिलेगा और जल संकट से जूझ रहे इलाकों को भी राहत मिल सकती है।
IMD की भविष्यवाणी क्यों मानी जाती है अहम?
भारतीय मौसम विभाग लंबे समय से मानसून की गतिविधियों पर वैज्ञानिक तरीके से निगरानी करता आ रहा है। समुद्री तापमान, हवा की दिशा, दबाव प्रणाली और वैश्विक मौसम चक्र जैसे कई कारकों के आधार पर मानसून का अनुमान लगाया जाता है।
इस बार IMD के शुरुआती संकेत काफी सकारात्मक माने जा रहे हैं। हालांकि मौसम वैज्ञानिक यह भी कहते हैं कि मानसून की वास्तविक स्थिति अगले कुछ हफ्तों में और स्पष्ट होगी।
क्या इस बार गर्मी कम पड़ेगी?
मई में सामान्य से कम तापमान और लगातार बदलते मौसम ने लोगों को राहत जरूर दी है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार जून से पहले कुछ इलाकों में गर्मी फिर बढ़ सकती है। हालांकि यदि मानसून समय पर पहुंचता है तो तापमान में तेजी से गिरावट आ सकती है।
निष्कर्ष
भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की एंट्री को लेकर उम्मीदें लगातार मजबूत हो रही हैं। तमिलनाडु, केरल और अंडमान-निकोबार में बढ़ती बारिश और ऑस्ट्रेलिया से जुड़े मौसम संकेत यह बता रहे हैं कि मानसून सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। यदि मौजूदा परिस्थितियां बनी रहती हैं तो इस बार मानसून तय समय पर केरल पहुंच सकता है, जो किसानों से लेकर आम लोगों तक सभी के लिए राहत भरी खबर होगी।

