Breaking Rajasthan News | Jaipur Medical Strike: जयपुर के निजी अस्पतालों में ‘मेडिकल इमरजेंसी’; डॉक्टर के परिजनों से बदसलूकी के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल, मरीज बेहाल

Channelindiaone
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जयपुर, राजस्थान | 9 मई, 2026 | Breaking Rajasthan News | Jaipur Medical Strike: राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्वास्थ्य सेवाएँ पूरी तरह चरमरा गई हैं। शहर के निजी अस्पतालों ने गुरुवार आधी रात से अनिश्चितकालीन ‘मेडिकल शटडाउन’ (Medical Shutdown) का ऐलान कर दिया है। यह कदम जेल में बंद न्यूरोसर्जन डॉ. सोनदेव बंसल के परिवार के सदस्यों के साथ राजस्थान उच्च न्यायालय परिसर में हुई कथित मारपीट और डराने-धमकानी की घटना के विरोध में उठाया गया है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA), जयपुर मेडिकल एसोसिएशन (JMA), और ‘उपचार’ (UPCHAR) सहित कई प्रमुख चिकित्सा संगठनों ने एकजुट होकर इस हड़ताल का आह्वान किया है। इस विरोध प्रदर्शन के कारण निजी अस्पतालों में ओपीडी (OPD), आईपीडी (IPD) और यहाँ तक कि आपातकालीन सेवाएँ (Emergency Services) भी पूरी तरह बंद कर दी गई हैं।

क्या है पूरा विवाद? कोर्ट परिसर में हंगामे के आरोप

विवाद की जड़ डॉ. सोनदेव बंसल की गिरफ्तारी है, जिन्हें आरजीएचएस (RGHS) योजना में कथित अनियमितताओं के आरोप में जेल भेजा गया था। गुरुवार को जब हाईकोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई होनी थी, तब डॉक्टरों का आरोप है कि वकीलों के एक समूह ने न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डाली।

चिकित्सा संघों का दावा है कि शोर-शराबे और नारेबाजी के कारण सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी। सबसे गंभीर आरोप यह है कि कुछ वकीलों ने डॉ. सोनदेव के पिता और भाई को रास्ते में रोककर उन्हें जबरन ‘बार रूम’ में ले गए, जहाँ उनके साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट की गई। इस हंगामे के कारण अदालत को सुनवाई 11 मई तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।

मरीजों पर संकट: अस्पतालों में ‘नो एंट्री’

निजी अस्पतालों ने स्पष्ट किया है कि जो मरीज पहले से भर्ती हैं, उनका इलाज जारी रहेगा, लेकिन किसी भी नए मरीज को भर्ती नहीं किया जाएगा। जयपुर के निजी स्वास्थ्य केंद्रों के बाहर मरीजों और उनके परिजनों की भारी भीड़ देखी जा रही है, जिन्हें इलाज के अभाव में वापस लौटना पड़ रहा है।

चिकित्सा संगठनों की प्रमुख माँगें:

  • डॉ. सोनदेव बंसल को त्वरित न्याय मिले।

  • न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।

  • डॉक्टरों और उनके परिवारों के लिए अस्पताल और कोर्ट परिसर में सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

डॉक्टरों का अल्टीमेटम: पूरे राजस्थान में ठप हो सकती हैं सेवाएँ

राजस्थान स्टेट आईएमए के अध्यक्ष डॉ. महेश शर्मा और प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. विजय कपूर ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने तत्काल ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह हड़ताल पूरे राजस्थान में विस्तारित कर दी जाएगी। डॉक्टरों का कहना है कि वे डर के माहौल में काम नहीं कर सकते।

वकीलों और सरकार का पक्ष

दूसरी ओर, हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। बार एसोसिएशन के महासचिव दीपेश शर्मा का कहना है कि कोर्ट परिसर में कोई मारपीट नहीं हुई, बल्कि निजी पक्षकारों के बीच मामूली बहस हुई थी जिसे मध्यस्थता से सुलझा लिया गया।

वहीं, राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह दो निजी पक्षों के बीच का विवाद है और इसमें स्वास्थ्य विभाग की कोई सीधी भूमिका नहीं है। उन्होंने डॉक्टरों से अपील की है कि वे अपनी हड़ताल वापस लें ताकि आम जनता को परेशानी न हो। खींवसर ने चेतावनी भी दी कि इलाज न मिलने से मरीजों की जान जा सकती है, जिसका खामियाजा समाज को भुगतना पड़ेगा।

पृष्ठभूमि: निविका अस्पताल का मामला

इस पूरे विवाद की शुरुआत सितंबर 2025 में हुई थी, जब जयपुर के निविका अस्पताल में एक वकील की माँ का इलाज के दौरान निधन हो गया था। हालांकि मेडिकल बोर्ड की जांच में डॉक्टर को क्लिनिकल लापरवाही का दोषी नहीं पाया गया, लेकिन निरंतर विरोध प्रदर्शनों के बाद डॉ. सोनदेव के खिलाफ आरजीएचएस में त्रुटियों का मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया।


जयपुर मेडिकल स्ट्राइक: मुख्य बिंदु (At a Glance)

श्रेणी विवरण
हड़ताल का कारण डॉ. सोनदेव बंसल के परिजनों के साथ कथित मारपीट
प्रभावित सेवाएँ OPD, IPD, और इमरजेंसी (सभी नए मरीज)
हड़ताली संगठन IMA, JMA, PHNHS, UPCHAR
पुलिस का पक्ष अशोक नगर थाना के अनुसार अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है
अगली सुनवाई राजस्थान हाईकोर्ट में 11 मई, 2026

डॉक्टरों और वकीलों के इस टकराव के बीच पिस रही है जयपुर की आम जनता। स्वास्थ्य सेवाओं का इस तरह बंद होना किसी बड़े संकट को निमंत्रण दे सकता है। अब देखना यह होगा कि 11 मई की सुनवाई से पहले क्या प्रशासन बीच का कोई रास्ता निकाल पाता है या राजस्थान एक बड़े ‘स्टेटवाइड मेडिकल शटडाउन’ की ओर बढ़ेगा।

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