मुंबई/नई दिल्ली | 12 मई, 2026 | Rupee at Historic Low: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आज का दिन एक और बुरी खबर लेकर आया है। घरेलू मुद्रा रुपया (Rupee), अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर (Record Low) पर गिर गया है। मंगलवार, 12 मई 2026 को शुरुआती कारोबार में रुपया 35 पैसे टूटकर 95.63 प्रति डॉलर के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुँच गया।
रुपये की इस ऐतिहासिक गिरावट की मुख्य वजह पश्चिम एशिया (Middle East) में गहराता भू-राजनीतिक तनाव और उसके कारण कच्चे तेल की कीमतों में आया उबाल है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के सख्त बयानों ने वैश्विक बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिसका सीधा असर भारतीय मुद्रा पर देखने को मिल रहा है।
ट्रंप का बयान और होर्मुज का तनाव: रुपये की गिरावट के विलेन
बाजार की भावनाओं पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सोमवार के बयान का गहरा असर पड़ा है। ट्रंप ने ईरान के साथ जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए अमेरिका समर्थित शांति प्रस्ताव को “पूरी तरह से अस्वीकार्य” (Totally Unacceptable) बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि युद्धविराम (Ceasefire) इस समय अपने “सबसे कमजोर” चरण में है और “वेंटिलेटर (Life Support) पर है।”
ट्रंप के इस बयान ने पश्चिम एशिया में जारी 10-सप्ताह पुराने संघर्ष के और बढ़ने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से वैश्विक तेल आपूर्ति में बाधा आने के डर को फिर से जीवित कर दिया है। इसी डर के कारण कच्चे तेल की कीमतें फिर से भड़क उठी हैं। वैश्विक तेल बेंचमार्क, ब्रेंट क्रूड (Brent Crude), वायदा कारोबार में तेजी से 0.85% बढ़कर 105.10 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया।
कैसे टूटी रुपये की कमर?
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Interbank Foreign Exchange Market) में रुपया आज 95.57 पर खुला और फिर गिरकर 95.63 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक फिसल गया। यह पिछले दिन के बंद भाव के मुकाबले 35 पैसे की गिरावट है। सोमवार, 11 मई 2026 को भी रुपया 79 पैसे टूटकर 95.28 प्रति डॉलर के निचले स्तर पर बंद हुआ था।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारत का तेल आयात बिल (Oil Import Bill) बढ़ जाता है, जिससे चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) पर दबाव पड़ता है। इसके अलावा, डॉलर की बढ़ती मांग और वैश्विक अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल रहे हैं, जो रुपये को और कमजोर कर रहा है।
शेयर बाजार भी धड़ाम: सेंसेक्स 525 अंक टूटा
रुपये की गिरावट और मिडिल ईस्ट के तनाव का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स (Sensex) 525.44 अंक गिरकर 75,489.84 पर और निफ्टी (Nifty) 164.5 अंक फिसलकर 23,651.35 पर आ गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार बिकवाली से बाजार का सेंटिमेंट खराब हुआ है। एक्सचेंज डेटा के अनुसार, FIIs ने सोमवार को 8,437.56 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के हेड ऑफ ट्रेजरी और कार्यकारी निदेशक, अनिल कुमार भंसाली ने कहा, “ईरानी तेल पर अमेरिकी प्रतिबंधों और संघर्ष को समाप्त करने के प्रस्ताव के अस्वीकार होने से बाजार में तेल की आपूर्ति कम होने की आशंका बढ़ गई है। राष्ट्रपति ट्रंप के रुख ने त्वरित समाधान की उम्मीदों को झटका दिया है, जिससे रुपये पर दबाव बना रहेगा।”
बाजार का लेखा-जोखा: एक नजर में
| श्रेणी | स्थिति (आज सुबह) | बदलाव/अनुमान |
| USD/INR | 95.63 (रिकॉर्ड निम्न) | -35 पैसे (शुरुआती) |
| ब्रेंट क्रूड | $105.10 / बैरल | +0.85% |
| सेंसेक्स | 75,489.84 | -525.44 अंक (शुरुआती) |
| तनाव | होर्मुज नाकाबंदी | अनिश्चितता बरकरार |
भारतीय रुपया इस समय वैश्विक संकेतों और घरेलू तेल आयात के दोहरे दबाव में है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और डोनाल्ड ट्रंप के कठोर रुख ने अनिश्चितता और बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में अगर कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो रुपये पर और दबाव देखने को मिल सकता है।

