Breaking News Rajasthan | Rajasthani Language in Rajasthan Schools:राजस्थान सरकार को निर्देश— ‘राजस्थानी’ भाषा में शिक्षा के लिए जल्द बनाएँ नीति

Channelindiaone
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नई दिल्ली/जयपुर | 13 मई, 2026 | Breaking News Rajasthan | Rajasthani Language in Rajasthan Schools: राजस्थान की संस्कृति और पहचान से जुड़ी ‘राजस्थानी’ भाषा को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया है कि बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा देने के अधिकार को “प्रशासनिक उदासीनता” के कारण रोका नहीं जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार को अब राजस्थानी भाषा में शिक्षा प्रदान करने के लिए एक व्यापक और प्रभावी नीति तैयार करनी होगी।

भाषा केवल सुविधा नहीं, बल्कि पहचान है: सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि भाषा केवल बातचीत की सुविधा का साधन नहीं है, बल्कि यह किसी भी व्यक्ति की समझ, उसकी पहचान और समाज में सार्थक भागीदारी का आधार है। पीठ ने जोर देकर कहा कि एक कानून शासित समाज में भाषा की पहुंच और सुगमता का संवैधानिक महत्व होता है।

REET भर्ती और मातृभाषा का विवाद

यह पूरा मामला राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर अपील से जुड़ा है, जिसने 27 नवंबर, 2024 को एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया था। इस याचिका में मांग की गई थी कि:

  1. REET 2021 (शिक्षक ग्रेड-III भर्ती) के पाठ्यक्रम में राजस्थानी भाषा को शामिल किया जाए।

  2. बच्चों को राजस्थानी या उनकी स्थानीय भाषा में शिक्षा दी जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि हालांकि REET 2021 की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, इसलिए वह राहत अब निष्प्रभावी हो गई है, लेकिन भाषा और शिक्षा से जुड़े व्यापक संवैधानिक सवालों को “अकादमिक” कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

संविधान और नई शिक्षा नीति का हवाला

अदालत ने शिक्षा की गुणवत्ता को भाषा से जोड़ते हुए कहा कि यदि कोई बच्चा भाषा की बाधा के कारण पाठ को समझ ही नहीं पा रहा है, तो उसे ‘गुणवत्तापूर्ण शिक्षा’ नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने मातृभाषा में शिक्षा को संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों (19(1)(a), 21, 21A, 41, 45, 51A(k) और 350A) से जोड़कर देखा।

इसके अलावा, पीठ ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं का उल्लेख किया:

  • शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), 2009: धारा 29(2)(f) के तहत शिक्षा का माध्यम, जहाँ तक संभव हो, बच्चे की मातृभाषा में होना चाहिए।

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020: यह नीति सिफारिश करती है कि कम से कम कक्षा 5 तक (और अधिमानतः कक्षा 8 तक) शिक्षा का माध्यम घर की भाषा या स्थानीय भाषा होनी चाहिए।

सरकार के “तकनीकी तर्क” पर कोर्ट की नाराजगी

राजस्थान सरकार ने अदालत में दलील दी थी कि केवल आठवीं अनुसूची (Eighth Schedule) में शामिल भाषाओं को ही सरकारी स्कूलों में पढ़ाया जाता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार का यह नजरिया बेहद संकुचित और तकनीकी है।

अदालत ने यह भी गौर किया कि राजस्थानी भाषा पहले से ही जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय और राजस्थान विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में एक विषय के रूप में पढ़ाई जा रही है। ऐसे में स्कूलों में इसे पेश न करना सरकार के अड़ियल रुख को दर्शाता है।

सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश

अदालत ने राजस्थान सरकार को निम्नलिखित समयबद्ध कदम उठाने का आदेश दिया है:

  1. नीति निर्माण: मातृभाषा आधारित शिक्षा के लिए एक उचित और व्यापक नीति तैयार करना।

  2. स्थानीय भाषा का दर्जा: राजस्थानी को शैक्षिक उद्देश्यों के लिए एक स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा के रूप में मान्यता देना।

  3. चरणबद्ध लागू करना: प्राथमिक और प्रारंभिक स्तर से शुरू करके धीरे-धीरे उच्च स्तर तक राजस्थानी को शिक्षा का माध्यम बनाना।

  4. सभी स्कूलों में अनिवार्य: राजस्थान के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में राजस्थानी को एक विषय के रूप में पेश करने के लिए कदम उठाना।

अगली सुनवाई और अनुपालन

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के पुराने आदेश को रद्द करते हुए राज्य सरकार को 25 सितंबर, 2026 तक अनुपालन शपथ पत्र (Compliance Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर, 2026 को होगी।


राजस्थानी भाषा और शिक्षा: एक नजर में

श्रेणी विवरण
अदालत सुप्रीम कोर्ट (जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता)
मुख्य मुद्दा मातृभाषा (राजस्थानी) में शिक्षा और भाषा को मान्यता
संवैधानिक आधार अनुच्छेद 21A (शिक्षा का अधिकार) और 350A
डेडलाइन 25 सितंबर, 2026 (शपथ पत्र दाखिल करने की तिथि)

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राजस्थान के लाखों बच्चों और ‘मायड़ भाषा’ (मातृभाषा) प्रेमियों के लिए एक बड़ी जीत है। यह न केवल शिक्षा को सुगम बनाएगा, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने में मील का पत्थर साबित होगा।

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