नई दिल्ली | 15 मई, 2026 | Fuel Price Hike: देशभर में पिछले कई दिनों से चल रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया है। केंद्र सरकार ने शुक्रवार (15 मई) से पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। खास बात यह है कि आम उपभोक्ताओं के लिए पिछले 4 वर्षों में यह पहली बड़ी मूल्य वृद्धि है। इसके साथ ही रसोई और वाहनों में इस्तेमाल होने वाली CNG की कीमतों में भी 2 रुपये प्रति किलो का इजाफा किया गया है।
ईंधन की कीमतों में यह उछाल ऐसे समय में आया है जब ईरान युद्ध (Iran War) के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं।
चार महानगरों में पेट्रोल-डीजल के नए दाम
आज से प्रभावी हुई नई दरों के बाद देश के चार प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल के दाम इस प्रकार हैं:
संशोधित पेट्रोल दरें (प्रति लीटर):
| शहर | नया दाम (₹) | बढ़ोतरी (₹) |
| दिल्ली | 97.77 | +3.00 |
| कोलकाता | 108.74 | +3.29 |
| मुंबई | 106.68 | +3.14 |
| चेन्नई | 103.67 | +2.83 |
संशोधित डीजल दरें (प्रति लीटर):
| शहर | नया दाम (₹) | बढ़ोतरी (₹) |
| दिल्ली | 90.67 | +3.00 |
| कोलकाता | 95.13 | +3.11 |
| मुंबई | 93.14 | +3.11 |
| चेन्नई | 95.25 | +2.86 |
इसके अतिरिक्त, दिल्ली में CNG अब ₹79.09 प्रति किलो (पहले ₹77.09) और मुंबई (MMR) में ₹84 प्रति किलो की दर से मिलेगी।
तेल कंपनियों पर बढ़ता घाटा: ₹1600 करोड़ का डेली लॉस
पेट्रोलियम क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, यह बढ़ोतरी अपरिहार्य हो गई थी। इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी दिग्गज कंपनियां भारी घाटे का सामना कर रही थीं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये कंपनियां प्रतिदिन लगभग 1,600 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही थीं। ईरान युद्ध शुरू होने से पहले (फरवरी के अंत तक) इन कंपनियों की स्थिति बेहतर थी, लेकिन युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 50% से अधिक बढ़ गईं। फरवरी में जो कच्चा तेल भारत को औसतन $69 प्रति बैरल मिल रहा था, वह बाद के महीनों में $113-114 प्रति बैरल तक पहुँच गया।
महंगाई और विकास: सरकार के सामने दोहरी चुनौती
ईंधन की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर महंगाई (Inflation) पर पड़ता है। जब पेट्रोल-डीजल महंगा होता है, तो माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ जाती है, जिससे फल, सब्जी, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ना तय है।
आर्थिक चक्र को ऐसे समझें:
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लागत में वृद्धि: ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने से हर वस्तु की कीमत बढ़ती है।
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खपत में कमी: महंगाई बढ़ने से आम आदमी की ‘डिस्क्रिशनरी स्पेंडिंग’ (अतिरिक्त खर्च करने की क्षमता) कम हो जाती है।
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उत्पादन पर असर: जब लोग सामान कम खरीदते हैं, तो उत्पादन धीमा हो जाता है।
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GDP पर दबाव: उत्पादन घटने से देश की आर्थिक विकास दर (GDP) पर असर पड़ता है।
वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पानगड़िया सहित कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि घरेलू कीमतों को वैश्विक दरों के साथ तालमेल बिठाने की अनुमति देना जरूरी था, अन्यथा राजकोषीय घाटा अनियंत्रित हो सकता था।
ईंधन बचाने की अपील और दिल्ली सरकार का बड़ा कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन बचाने और संभव हो तो ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) करने का आह्वान किया है। पीएम का कहना है कि ईंधन की बचत से देश की विदेशी मुद्रा (Forex) भंडार को सुरक्षित रखा जा सकता है।
इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 90 दिनों का एक विशेष सार्वजनिक अभियान शुरू किया है। उन्होंने सरकारी कार्यालयों के लिए सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम की घोषणा की है, ताकि सड़कों पर गाड़ियां कम निकलें और ईंधन की खपत कम हो।
क्या देश में ईंधन की कमी है?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कीमतों में वृद्धि का मतलब यह नहीं है कि देश में तेल की कमी है। भारत के पास वर्तमान में:
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लगभग 60 दिनों का ईंधन स्टॉक सुरक्षित है।
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करीब 45 दिनों का एलपीजी (LPG) भंडार उपलब्ध है।
ईंधन की कीमतों में यह वृद्धि मध्यम वर्ग के बजट को हिला सकती है। हालांकि, वैश्विक परिस्थितियों और तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे को देखते हुए यह कदम जरूरी माना जा रहा था। अब देखना यह है कि सरकार महंगाई को नियंत्रित करने के लिए आने वाले समय में क्या ठोस कदम उठाती है।

