Vijay Film Jana Nayagan News: तमिल सिनेमा के सुपरस्टार और राजनीति में कदम रखने की तैयारी कर रहे विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जन नायकन’ एक बार फिर कानूनी पचड़े में फंस गई है। मद्रास हाईकोर्ट ने मंगलवार को उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें एकल न्यायाधीश ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को फिल्म को U/A सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया था। अदालत के इस फैसले से फिल्म की रिलीज को लेकर असमंजस और बढ़ गया है।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने क्या कहा
मुख्य न्यायाधीश मनिंदर मोहन श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की दो जजों की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि एकल न्यायाधीश के आदेश में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया। अदालत के अनुसार, फिल्म प्रमाणन बोर्ड को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर नहीं दिया गया, जबकि उसके सामने गंभीर आरोप थे। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने आदेश को रद्द करते हुए मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए वापस भेज दिया।
एकल न्यायाधीश के पास दोबारा जाएगी याचिका
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यह मामला फिर से न्यायमूर्ति पी.टी. आशा के समक्ष रखा जाएगा। अदालत ने कहा कि सभी पक्षों को सुनने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचना उचित होगा। साथ ही, यह भी कहा गया कि बिना पर्याप्त सुनवाई के मामले के गुण-दोष पर फैसला देना उचित नहीं है।
क्या होता है U/A सर्टिफिकेट और क्यों है अहम
फिल्म सर्टिफिकेशन में U/A सर्टिफिकेट का मतलब होता है कि 12 साल से कम उम्र के बच्चे यह फिल्म माता-पिता या अभिभावक की निगरानी में देख सकते हैं। यह सर्टिफिकेट फिल्मों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे दर्शकों की संख्या बढ़ती है और बॉक्स ऑफिस पर बेहतर प्रदर्शन की संभावना रहती है। ‘जन नायकन’ के निर्माता भी इसी कारण U/A सर्टिफिकेट के लिए प्रयासरत हैं।
विजय की आखिरी फिल्म मानी जा रही है ‘जन नायकन’
‘जन नायकन’ को विजय के फिल्मी करियर की आखिरी फिल्म बताया जा रहा है। इसके बाद उनके पूरी तरह सक्रिय राजनीति में उतरने की अटकलें तेज हैं। यही वजह है कि इस फिल्म को लेकर फैंस और राजनीतिक गलियारों में खास दिलचस्पी बनी हुई है। फिल्म को तमिलनाडु के प्रमुख त्योहार पोंगल से पहले 9 जनवरी को रिलीज किया जाना था, लेकिन सर्टिफिकेशन में देरी के कारण ऐसा नहीं हो सका।
निर्माताओं ने क्यों खटखटाया कोर्ट का दरवाजा
फिल्म के निर्माता केवीएन प्रोडक्शंस ने CBFC द्वारा सर्टिफिकेट जारी करने में हो रही देरी के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया था। उनका कहना था कि बोर्ड ने पहले यह जानकारी दी थी कि कुछ जरूरी बदलाव करने के बाद फिल्म को U/A सर्टिफिकेट दे दिया जाएगा। निर्माताओं के अनुसार, सभी सुझाए गए संशोधन किए जाने के बावजूद सर्टिफिकेट जारी नहीं हुआ।
रिवाइजिंग कमेटी को भेजने पर उठा विवाद
निर्माताओं ने यह भी सवाल उठाया कि जब बोर्ड पहले ही U/A सर्टिफिकेट देने की बात कह चुका था, तो फिर फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास क्यों भेजा गया। उनका तर्क था कि यह फैसला अधिकार क्षेत्र से बाहर था और इससे अनावश्यक देरी हुई।
CBFC ने अदालत में क्या रखा पक्ष
CBFC ने अदालत को बताया कि एक्ज़ामिनिंग कमेटी के एक सदस्य की ओर से शिकायत प्राप्त हुई थी। इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उसकी आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया और फिल्म के कुछ दृश्य धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकते हैं। इसके अलावा, शिकायत में यह भी कहा गया कि फिल्म में सशस्त्र बलों को अनुचित ढंग से दिखाया गया है। इन्हीं आरोपों के आधार पर फिल्म को दोबारा समीक्षा के लिए भेजने का फैसला लिया गया।
पहले क्या था एकल न्यायाधीश का आदेश
9 जनवरी को एकल न्यायाधीश ने निर्माताओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए CBFC को फिल्म का सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया था। अदालत ने उस समय कहा था कि बोर्ड की अध्यक्ष का रिवाइजिंग कमेटी को भेजने का फैसला अधिकार क्षेत्र से बाहर है। साथ ही, बोर्ड द्वारा समिति के सदस्यों की शिकायतों पर विचार करने को भी अनुचित बताया गया था।
आदेश पर तुरंत लगी थी रोक
एकल न्यायाधीश के आदेश के तुरंत बाद ही CBFC की अपील पर दो जजों की पीठ ने मामले की तत्काल सुनवाई की थी और उसी दिन आदेश पर रोक लगा दी गई थी। इस दौरान अदालत ने निर्माताओं पर जल्दबाजी दिखाने और न्यायिक प्रक्रिया पर दबाव बनाने जैसी कड़ी टिप्पणियां भी की थीं।
गंभीर आरोपों पर सुनवाई जरूरी: कोर्ट
मंगलवार को दिए गए ताजा आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि एक्ज़ामिनिंग कमेटी के सदस्य द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। ऐसे मामलों में फिल्म बोर्ड को अपना निर्णय सही ठहराने का पूरा मौका मिलना चाहिए। अदालत ने कहा कि इन परिस्थितियों में एकतरफा फैसला देना उचित नहीं है।
याचिका में संशोधन करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि एकल न्यायाधीश को अध्यक्ष के आदेश को चुनौती देने वाली स्पष्ट याचिका के बिना उसके गुण-दोष पर नहीं जाना चाहिए था। अदालत ने निर्माताओं को निर्देश दिया कि वे अपनी याचिका में संशोधन कर फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी को भेजे जाने के आदेश को सीधे चुनौती दें।
आगे क्या होगा ‘जन नायकन’ का भविष्य
अब यह मामला फिर से एकल न्यायाधीश के समक्ष सुना जाएगा। तब तक ‘जन नायकन’ की रिलीज पर संशय बना रहेगा। फिल्म प्रेमियों और विजय के प्रशंसकों की निगाहें अदालत के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं।

