जोधपुर: पश्चिमी राजस्थान की प्रसिद्ध कथावाचक और संत समाज की जानी-मानी हस्ती साध्वी प्रेम बैसा की मौत ने पूरे क्षेत्र में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनकी अचानक हुई मृत्यु के बाद सोशल मीडिया, राजनीति और प्रशासन—तीनों स्तर पर हलचल तेज हो गई है। इस बीच आरएलपी प्रमुख और जाट नेता हनुमान बेनीवाल ने मामले की CBI जांच की मांग की है।
मौत के बाद सामने आया इंस्टाग्राम पोस्ट
साध्वी प्रेम बैसा के निधन के कुछ घंटे बाद उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से एक पोस्ट सामने आया, जिसने केस को और जटिल बना दिया। पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि उन्होंने अपने जीवन का हर पल सनातन धर्म को समर्पित किया और आखिरी सांस तक उसे अपने हृदय में रखा। अब अधिकारी यह भी जांच कर रहे हैं कि यह पोस्ट पहले से शेड्यूल था या मौत के बाद ऑटोमैटिकली पब्लिश हुआ।
अस्पताल में ‘ब्रॉट डेड’ घोषित
जानकारी के मुताबिक, बुधवार शाम साध्वी प्रेम बैसा को उनके पिता और गुरु वीराम नाथ तथा एक सहयोगी ने जोधपुर के बोरणाडा स्थित आश्रम से एक निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें ब्रॉट डेड घोषित कर दिया।
अस्पताल के डॉक्टर प्रवीण जैन ने बताया कि उन्होंने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन शरीर में कोई हलचल नहीं थी। डॉक्टर के अनुसार, साध्वी के पिता ने बताया था कि उन्हें बुखार था, इसलिए आश्रम में एक कंपाउंडर को बुलाया गया था। कंपाउंडर ने इंजेक्शन लगाया, जिसके बाद वे बेहोश हो गईं।
डॉक्टर जैन ने यह भी कहा कि उन्होंने शव को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल ले जाने हेतु एम्बुलेंस ऑफर की थी, लेकिन वीराम नाथ ने इनकार करते हुए निजी कार से ही शव ले जाने का निर्णय लिया।
पिता का बयान
एनडीटीवी से बातचीत में वीराम नाथ ने कहा कि साध्वी लंबे समय से सर्दी-खांसी से पीड़ित थीं।
उन्होंने कहा, “इसी वजह से हमने कंपाउंडर को बुलाया था। इंजेक्शन लगने के करीब पांच मिनट बाद वे बेहोश हो गईं।”
आश्रम में हंगामा, CCTV फुटेज पर सवाल
मौत के बाद आर्टी नगर आश्रम में तनाव फैल गया। समर्थकों ने आरोप लगाया कि सच्चाई दबाने की कोशिश की जा रही है और आश्रम के CCTV फुटेज गायब हैं। जब शुरुआत में पिता ने पोस्टमार्टम के लिए सहमति नहीं दी तो प्रदर्शन और तेज हो गया। बाद में गुरुवार को महात्मा गांधी अस्पताल में पोस्टमार्टम किया गया।
पुलिस हर एंगल से कर रही जांच
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले में सोशल मीडिया ट्रोलिंग, ब्लैकमेलिंग, कथित सुसाइड नोट की प्रामाणिकता समेत हर पहलू की जांच की जा रही है। कुछ लोग संदेह जता रहे हैं कि मौत सामान्य नहीं है और इसमें किसी करीबी की भूमिका हो सकती है, हालांकि पुलिस ने अभी किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की है।
पोस्टमार्टम के बाद भी विवाद
पोस्टमार्टम के बाद शव को लेकर विवाद खड़ा हो गया। संत समाज के लोग चाहते हैं कि अंतिम संस्कार समाधि स्थल पर हो, जबकि साध्वी के पिता शव को घर ले जाने के पक्ष में हैं।
आगे क्या?
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है और राजनीतिक दबाव के बीच जांच एजेंसियां हर पहलू को खंगाल रही हैं। आने वाले दिनों में सरकार और पुलिस के रुख से स्पष्ट होगा कि क्या इस केस में CBI जांच होती है या नहीं।

