मुख्य रणनीतिक बिंदु (Quick Highlights)
| राज्य | प्रमुख फोकस क्षेत्र | मुख्य नेता |
| राजस्थान | बूथ मैनेजमेंट, मतदाता सूची सुरक्षा, स्थानीय निकाय चुनाव | डोटासरा, जूली, पायलट |
| छत्तीसगढ़ | आदिवासी हित, खनन नीति का विरोध, नया रोजगार कानून | बघेल, सिंहदेव, बैज |
| कॉमन एजेंडा | संगठन में एकजुटता, भाजपा की ‘वादाखिलाफी’ को उजागर करना | खड़गे, राहुल गांधी |
नई दिल्ली: 2026 के आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों और स्थानीय चुनावों को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। गुरुवार (29 जनवरी, 2026) को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में राजस्थान और छत्तीसगढ़ के शीर्ष नेताओं के साथ अलग-अलग चर्चा की गई, जिसमें संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर भाजपा सरकार की घेराबंदी करने का रोडमैप तैयार किया गया।
एकजुटता और जमीनी संघर्ष पर जोर
बैठक की अध्यक्षता मल्लिकार्जुन खड़गे ने की, जिसमें राहुल गांधी और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल भी मौजूद रहे। आलाकमान का संदेश साफ था— “आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट हों और जनता के मुद्दों पर सरकार को घेरें।”
राजस्थान: चुनाव और मतदाता सूची में गड़बड़ी का मुद्दा
राजस्थान के नेताओं के साथ हुई बैठक में प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और सचिन पायलट जैसे दिग्गज शामिल हुए। डोटासरा ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में प्रमुख बिंदुओं को साझा किया:
-
बूथ लेवल एजेंट (BLA): संगठन को मजबूत करने के लिए जल्द ही बूथ स्तर पर नियुक्तियां पूरी की जाएंगी।
-
मतदाता सूची में ‘हेरफेर’: कांग्रेस ने आरोप लगाया कि विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के अंतिम चरणों में भाजपा ने गड़बड़ी करने की कोशिश की, जिसे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने समय रहते रोका।
-
स्थानीय चुनाव: आगामी पंचायत और नगर निकाय चुनावों के लिए अभी से तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
-
मनरेगा की बहाली: राज्य में मनरेगा योजना को प्रभावी ढंग से फिर से लागू करने के लिए आंदोलन तेज किया जाएगा।
छत्तीसगढ़: आदिवासियों और रोजगार के हक की लड़ाई
बाद में छत्तीसगढ़ के नेताओं, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, टी.एस. सिंहदेव और दीपक बैज शामिल थे, के साथ रणनीतिक चर्चा हुई। छत्तीसगढ़ के प्रभारी सचिन पायलट ने राज्य की भाजपा सरकार पर तीखे हमले किए:
-
खनन और आदिवासी अधिकार: पायलट ने आरोप लगाया कि राज्य में ‘बैकडोर’ से खनन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे आदिवासी समाज परेशान है। कांग्रेस उनके अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ी होगी।
-
रोजगार कानून पर रार: केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की जगह लाए गए नए कानून ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (VB-G RAM G)’ का कांग्रेस ने पुरजोर विरोध किया है। कांग्रेस का दावा है कि इससे पंचायतों और गरीबों के अधिकार छिन गए हैं।
निष्कर्ष: कांग्रेस नेतृत्व अब राज्यों में केवल रैलियों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि बूथ लेवल पर माइक्रो-मैनेजमेंट के जरिए वापसी की कोशिश में है। राजस्थान में मतदाता सूची और छत्तीसगढ़ में जल-जंगल-जमीन के मुद्दों को कांग्रेस ने अपना सबसे बड़ा हथियार बनाने का फैसला किया है।

