Epstein Files पर बड़ा खुलासा: PM मोदी के इजरायल दौरे को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों पर सरकार का कड़ा जवाब

Channelindiaone
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हाल ही में सोशल मीडिया और कुछ अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर चर्चित “Epstein Files” को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से जुड़ी खबरें सामने आई थीं। इन खबरों में उनके वर्ष 2017 के इजरायल दौरे को लेकर कुछ संदिग्ध और भ्रामक बातें कही गईं। अब भारत सरकार ने इन दावों पर सख्त प्रतिक्रिया दी है और इन्हें पूरी तरह निराधार और अपमानजनक बताया है।

विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) ने शनिवार को स्पष्ट रूप से कहा कि इन तथाकथित फाइलों में प्रधानमंत्री मोदी के बारे में जो बातें कही जा रही हैं, उनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। सरकार ने इसे अफवाह फैलाने की कोशिश करार दिया है।

विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान

31 जनवरी को जारी एक आधिकारिक बयान में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि सरकार ने एक ईमेल संदेश पर ध्यान दिया है, जिसे Epstein Files से जोड़ा जा रहा है। इस ईमेल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे का जिक्र किया गया था।

प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने वास्तव में जुलाई 2017 में इजरायल की आधिकारिक यात्रा की थी। यह एक ऐतिहासिक और कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण दौरा था। इसके अलावा, उस ईमेल में किए गए अन्य सभी संकेत और आरोप पूरी तरह निराधार हैं।

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि इस ईमेल में लिखी गई बातें एक अपराधी द्वारा की गई निरर्थक और अशोभनीय कल्पनाओं के अलावा कुछ नहीं हैं। ऐसे दावों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जाना चाहिए।

Epstein Files क्या हैं?

Jeffrey Epstein एक अमेरिकी फाइनेंसर था, जिस पर यौन तस्करी और शोषण जैसे गंभीर आरोप लगे थे। वर्ष 2019 में उसकी गिरफ्तारी हुई थी और बाद में उसकी जेल में मौत हो गई थी।

Epstein से जुड़े दस्तावेज, ईमेल और अन्य रिकॉर्ड अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा समय-समय पर सार्वजनिक किए जाते रहे हैं। इन्हीं दस्तावेजों को आमतौर पर “Epstein Files” कहा जाता है।

हाल ही में अमेरिका के न्याय विभाग ने इन फाइलों से संबंधित एक और बड़ा खुलासा किया है, जिसके बाद यह मामला फिर से चर्चा में आ गया।

अमेरिका में हुआ बड़ा खुलासा

अमेरिका के डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांच ने शुक्रवार को बताया कि Epstein से जुड़े दस्तावेजों का नया संग्रह सार्वजनिक किया गया है। यह खुलासा ट्रंप प्रशासन के समय तय की गई पारदर्शिता नीति के तहत किया गया।

ब्लांच के अनुसार, इस नए बैच में लगभग 30 लाख पन्नों के दस्तावेज, 2,000 से अधिक वीडियो और करीब 1,80,000 तस्वीरें शामिल हैं। इनका उद्देश्य Epstein से जुड़े कानूनी मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना है।

अमेरिकी सरकार का कहना है कि जनता को पूरी जानकारी देना जरूरी है ताकि किसी भी तरह की साजिश या भ्रम को रोका जा सके।

PM मोदी का नाम कैसे जुड़ा?

Epstein Files में प्रधानमंत्री मोदी का नाम केवल उनके आधिकारिक इजरायल दौरे के संदर्भ में ही आया है। जुलाई 2017 में पीएम मोदी इजरायल जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने थे। यह दौरा भारत-इजरायल संबंधों के लिए ऐतिहासिक माना जाता है।

उस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, तकनीक और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में कई अहम समझौते हुए थे। इस दौरे का Epstein या उसके मामलों से कोई लेना-देना नहीं था।

सरकार ने स्पष्ट किया कि फाइलों में पीएम मोदी से जुड़ा कोई भी संदिग्ध या आपत्तिजनक तथ्य नहीं है।

अफवाहों पर सरकार की नाराजगी

विदेश मंत्रालय ने इन रिपोर्टों को “निंदनीय और अपमानजनक” बताया है। मंत्रालय का कहना है कि इस तरह की झूठी खबरें न सिर्फ देश की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि जनता को भ्रमित करने का भी प्रयास करती हैं।

सरकार ने यह भी कहा कि ऐसे दावे एक सजायाफ्ता अपराधी की कल्पनाओं पर आधारित हैं और इन्हें गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।

Jeffrey Epstein की गिरफ्तारी और मौत

Jeffrey Epstein को जुलाई 2019 में संघीय यौन तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस पर नाबालिग लड़कियों के शोषण जैसे गंभीर आरोप थे।

गिरफ्तारी के कुछ ही हफ्तों बाद अगस्त 2019 में उसकी न्यूयॉर्क की जेल में मौत हो गई थी। शुरुआती रिपोर्ट्स में इसे आत्महत्या बताया गया। हालांकि, उसकी मौत को लेकर कई तरह के सवाल भी उठे।

नए दस्तावेजों में जांचकर्ताओं के बीच हुए कुछ ईमेल भी शामिल हैं, जिनमें यह कहा गया है कि Epstein का आखिरी संदेश आत्महत्या नोट जैसा नहीं लगता।

Epstein की मौत पर जांच और निष्कर्ष

Epstein की मौत के बाद कई एजेंसियों ने इसकी जांच की। अमेरिकी न्याय विभाग, FBI और अन्य संस्थाओं ने इस मामले की पड़ताल की।

इन सभी जांचों का निष्कर्ष यही रहा कि Epstein ने आत्महत्या की थी। हालांकि, इसके बावजूद आज भी इस मामले को लेकर कई तरह की अटकलें लगती रहती हैं।

नए दस्तावेजों में भी जांच से जुड़े कुछ संवाद सामने आए हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर मौत को आत्महत्या ही माना गया है।

भारत सरकार की स्पष्ट स्थिति

भारत सरकार ने दो टूक शब्दों में कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी को Epstein से जोड़ने की कोई भी कोशिश पूरी तरह गलत है। पीएम मोदी का इजरायल दौरा पूरी तरह राजनयिक और सरकारी था।

सरकार का कहना है कि भारत की विदेश नीति और नेतृत्व की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए इस तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं।

विदेश मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे बिना पुष्टि के किसी भी खबर पर विश्वास न करें।

निष्कर्ष

Epstein Files को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी खबरों पर सरकार ने साफ कर दिया है कि ये सभी आरोप निराधार हैं। पीएम मोदी का 2017 का इजरायल दौरा एक आधिकारिक और ऐतिहासिक यात्रा थी, जिसका Epstein से कोई संबंध नहीं है।

विदेश मंत्रालय ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि ऐसे आरोपों को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। सरकार की यह प्रतिक्रिया देश और जनता के सामने सच्चाई रखने का प्रयास है।

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