अलवर (राजस्थान): राजस्थान की राजनीति और भारतीय जनता पार्टी के लिए आज का दिन बेहद दुखद रहा। सूबे के पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता हेम सिंह भड़ाना का सोमवार सुबह अलवर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। 59 वर्षीय भड़ाना पिछले काफी समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे।
राजनीतिक सफर: छात्र राजनीति से कैबिनेट तक का सफर
हेम सिंह भड़ाना का राजनीतिक ग्राफ उनकी मेहनत और बेबाकी की कहानी कहता है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी।
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जमीनी शुरुआत: वे सबसे पहले किशनगढ़बास पंचायत समिति के प्रधान चुने गए।
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विधानसभा का सफर: भड़ाना ने थानागाजी विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक के रूप में जीत दर्ज की।
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सत्ता में भूमिका: वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में उनकी प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए उन्हें पहले राज्य मंत्री और फिर कैबिनेट मंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई।
संघर्ष और सक्रियता: बीमारी में भी नहीं छोड़ा जनता का साथ
भड़ाना अपनी स्पष्टवादिता और जनता के बीच गहरी पैठ के लिए जाने जाते थे। कैंसर से पीड़ित होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। वे अलवर शहर में रहते थे, लेकिन हर छोटे-बड़े काम के लिए थानागाजी की जनता के बीच मौजूद रहते थे। 2023 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें बेहद कम अंतर से हार का सामना करना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने जताया शोक
राजस्थान के मुख्यमंत्री ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा, “हेम सिंह भड़ाना जी का जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है। वे एक समर्पित लोक सेवक थे। मैंने उनके इलाज के दौरान डॉक्टरों को बेहतरीन देखभाल के निर्देश दिए थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।”
सम्मान में स्थगित हुए सभी कार्यक्रम
भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी लक्ष्मीनारायण गुप्ता ने बताया कि भड़ाना के सम्मान में जिले के सभी राजनीतिक और सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं।
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अंतिम संस्कार: दिवंगत नेता का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव बाघेरी (किशनगढ़बास) ले जाया जाएगा, जहां राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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परिवार: हेम सिंह भड़ाना अपने पीछे दो बेटे छोड़ गए हैं। उनके छोटे बेटे सुरेंद्र भड़ाना अब अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

