नई दिल्ली: बजट 2026 के बाद भारतीय सर्राफा बाजार में हलचल मची हुई है। रिकॉर्ड ऊंचाई को छूने के बाद सोने और चांदी की कीमतों में एक बड़ी गिरावट (Correction) देखी गई है। कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले कुछ समय तक बाजार में यह अस्थिरता बनी रह सकती है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के वरिष्ठ विश्लेषक मानव मोदी के अनुसार, कीमतों में यह गिरावट कोई पैनिक वाली बात नहीं है, बल्कि यह एक सामान्य ‘प्रॉफिट बुकिंग’ है।
ऐतिहासिक गिरावट के बाद क्या हैं हालात?
पिछले हफ्ते सोने और चांदी में 1980 के बाद की सबसे बड़ी एक-दिवसीय गिरावट दर्ज की गई।
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सोना: भारत में सोना जो ₹1.80 लाख (प्रति 10 ग्राम) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया था, वह फिसलकर ₹1.49 लाख के करीब आ गया है।
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चांदी: चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट आई है। ₹4.20 लाख प्रति किलोग्राम के पार जाने वाली चांदी अब ₹2.91 लाख के आसपास कारोबार कर रही है।
क्यों गिरी कीमतें? मुख्य कारण जानें
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मुनाफावसूली (Profit Booking): जिन निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी की थी, उन्होंने रिकॉर्ड भाव पर पहुँचते ही अपना मुनाफा वसूलना शुरू कर दिया, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा।
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मजबूत डॉलर: वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वहां की मौद्रिक नीतियों में बदलाव के कारण कीमती धातुओं की चमक कुछ कम हुई है।
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ग्लोबल मार्केट का असर: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना $5,600 से गिरकर $5,160-$5,320 प्रति औंस के दायरे में आ गया है।
बजट और ड्यूटी का गणित
पिछले साल सरकार ने सोने-चांदी पर आयात शुल्क (Import Duty) को 15% से घटाकर 6% कर दिया था ताकि तस्करी पर लगाम लग सके। इस साल भी ड्यूटी में बदलाव की अटकलों ने बाजार को अस्थिर रखा, हालांकि फिलहाल बुनियादी सीमा शुल्क 6% पर ही स्थिर है।
निवेशकों के लिए सलाह: क्या अब खरीदना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में आई यह कमी निवेशकों के लिए एक अवसर की तरह है।
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लॉन्ग-टर्म निवेशक: अगर आप लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो एक साथ सारा पैसा लगाने के बजाय हर गिरावट पर थोड़ी-थोड़ी मात्रा (SIP मोड) में सोना खरीदना सुरक्षित रहेगा।
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शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स: बाजार में अभी काफी उतार-चढ़ाव है, इसलिए कम समय के लिए दांव लगाने वालों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
निष्कर्ष: सोने की कीमतों में गिरावट एक ‘नॉर्मल करेक्शन’ है। जब तक वैश्विक आर्थिक स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं होती, उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। लेकिन गिरावट पर खरीदारी की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है।

