IT Stocks Fall Today: 12 फरवरी 2026 को भारतीय शेयर बाजार में IT सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। सुबह के सत्र में ही IT शेयरों में बिकवाली शुरू हो गई, जिससे Nifty IT Index चार प्रतिशत से अधिक गिरकर 33,500 के आसपास पहुंच गया।
इस गिरावट ने न सिर्फ निवेशकों को हैरान किया, बल्कि बाजार में अनिश्चितता का माहौल भी बना दिया। TCS, Infosys, Wipro, HCL Tech और Tech Mahindra जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी दबाव देखा गया।
लगातार कमजोर हो रहा IT इंडेक्स
पिछले कुछ वर्षों में IT सेक्टर भारतीय बाजार का मजबूत स्तंभ माना जाता था। लेकिन 2025 में इस सेक्टर ने लगभग 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की थी। अब 2026 की शुरुआत से ही यह इंडेक्स करीब 11 प्रतिशत टूट चुका है।
लगातार गिरावट से यह संकेत मिल रहा है कि निवेशकों का भरोसा IT कंपनियों से धीरे-धीरे कम हो रहा है। इसकी वजह वैश्विक आर्थिक हालात और तकनीकी बदलाव दोनों हैं।
अमेरिका की जॉब रिपोर्ट ने क्यों बढ़ाई चिंता?
इस गिरावट के पीछे सबसे अहम कारण अमेरिका की जनवरी महीने की रोजगार रिपोर्ट रही। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में नौकरियों की संख्या उम्मीद से बेहतर रही और बेरोजगारी दर घटकर 4.3 प्रतिशत हो गई।
हालांकि, इस रिपोर्ट की गहराई से जांच करने पर सामने आया कि ज्यादातर नई नौकरियां हेल्थकेयर और सोशल सर्विस सेक्टर में पैदा हुई हैं। टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर सेक्टर में खास बढ़त नहीं दिखी।
इससे निवेशकों को यह डर सताने लगा कि अमेरिकी IT कंपनियों की ग्रोथ सीमित हो सकती है, जिसका असर भारतीय कंपनियों पर भी पड़ेगा।
ब्याज दरों को लेकर बढ़ी अनिश्चितता
मजबूत रोजगार आंकड़ों के बाद यह संभावना बढ़ गई है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक जल्द ब्याज दरों में कटौती नहीं करेगा। उच्च ब्याज दरें निवेश और टेक सेक्टर दोनों के लिए नुकसानदायक होती हैं।
भारतीय IT कंपनियों की आय का बड़ा हिस्सा अमेरिका से आता है। ऐसे में वहां की मौद्रिक नीति सीधे इनके मुनाफे पर असर डालती है।
निवेशकों ने इस अनिश्चितता को देखते हुए IT शेयरों से दूरी बनानी शुरू कर दी।
वॉल स्ट्रीट की कमजोरी का असर
अमेरिकी शेयर बाजार में भी टेक कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। माइक्रोसॉफ्ट, गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट और अन्य बड़ी कंपनियों के शेयर कमजोर रहे।
S&P 500 सॉफ्टवेयर इंडेक्स में करीब 2.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस वैश्विक कमजोरी ने भारतीय बाजार पर भी दबाव बना दिया।
भारतीय IT शेयर अक्सर अमेरिकी टेक स्टॉक्स के ट्रेंड को फॉलो करते हैं, इसलिए वहां की गिरावट का असर यहां भी दिखा।
AI बना IT कंपनियों के लिए नई चुनौती
आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सबसे तेजी से बढ़ने वाली तकनीक बन चुकी है। जहां एक तरफ AI से कामकाज आसान हुआ है, वहीं दूसरी तरफ यह IT कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती भी बन गया है।
हाल ही में कई AI टूल्स ऐसे लॉन्च हुए हैं, जो कानूनी सलाह, डेटा एनालिसिस, मार्केटिंग और रिपोर्ट तैयार करने जैसे काम खुद कर सकते हैं।
इससे IT कंपनियों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल पर दबाव बढ़ गया है।
लेबर-बेस्ड मॉडल पर पड़ रहा असर
भारतीय IT कंपनियां लंबे समय से कर्मचारियों की संख्या के आधार पर कमाई करती रही हैं। ज्यादा कर्मचारी मतलब ज्यादा प्रोजेक्ट और ज्यादा बिलिंग।
लेकिन AI ऑटोमेशन के कारण कई काम मशीनें करने लगी हैं। इससे कर्मचारियों की जरूरत कम हो रही है और कंपनियों की कमाई पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में IT कंपनियों को अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव करना पड़ेगा।
एक्सपर्ट्स की राय
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज की गिरावट केवल तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि यह गहरी चिंता का संकेत है।
विश्लेषकों का कहना है कि AI के बढ़ते प्रभाव से IT कंपनियों की पारंपरिक सेवाओं की मांग घट सकती है। इससे प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आएगा।
इसके अलावा, वैश्विक मंदी की आशंका भी निवेशकों को सतर्क बना रही है।
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
मौजूदा हालात में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
लंबी अवधि के निवेशक उन कंपनियों पर ध्यान दें जो AI, क्लाउड और डिजिटल सेवाओं में लगातार निवेश कर रही हैं।
साथ ही, पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना भी जरूरी है।
आने वाले समय में IT सेक्टर का भविष्य
भविष्य में IT सेक्टर पूरी तरह खत्म नहीं होगा, लेकिन इसमें बड़ा बदलाव जरूर आएगा। जो कंपनियां नई तकनीकों के साथ खुद को ढाल लेंगी, वही आगे बढ़ेंगी।
क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी, डेटा साइंस और AI-सर्विसेज जैसे क्षेत्रों में अभी भी मजबूत संभावनाएं हैं।
हालांकि, निकट भविष्य में अस्थिरता बनी रह सकती है।
निष्कर्ष
12 फरवरी 2026 को IT शेयरों में आई गिरावट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सेक्टर इस समय संक्रमण के दौर से गुजर रहा है। अमेरिका की जॉब रिपोर्ट, ब्याज दरों की अनिश्चितता, वॉल स्ट्रीट की कमजोरी और AI का प्रभाव—ये सभी मिलकर IT सेक्टर पर दबाव बना रहे हैं।
निवेशकों के लिए यह समय समझदारी, धैर्य और सही रणनीति अपनाने का है।

