नई दिल्ली | 12 फरवरी, 2026
आज देश के अलग-अलग हिस्सों में सड़कों पर गहमागहमी है। केंद्र सरकार की ‘श्रमिक विरोधी’ नीतियों और हालिया विधायी बदलावों के खिलाफ 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के एक साझा मंच ने ‘भारत बंद’ (Bharat Bandh) का आह्वान किया है। यूनियनों का दावा है कि इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में लगभग 30 करोड़ कर्मचारी शामिल हो रहे हैं, जिसका असर देश के 600 से अधिक जिलों में देखा जा रहा है।
हड़ताल का असर: कहाँ-कहाँ थमी रफ्तार?
गुरुवार सुबह से ही असम, तमिलनाडु, केरल, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों से विरोध प्रदर्शन की खबरें आ रही हैं। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की महासचिव अमरजीत कौर के अनुसार, औद्योगिक क्षेत्रों और प्रमुख शहरों में सुबह से ही प्रदर्शनकारी जुटने लगे थे।
1. बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और बीमा कंपनियों के कर्मचारी इस हड़ताल में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। इसके चलते चेक क्लियरेंस, कैश विड्रॉल और अन्य ब्रांच सेवाओं में देरी हो सकती है। हालांकि, ऑनलाइन बैंकिंग और ATMs सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
2. परिवहन व्यवस्था: केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में अंतर-राज्यीय बस सेवाएं प्रभावित हुई हैं। कई जगहों पर ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने भी समर्थन दिया है, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे और मेट्रो सेवाएं अब तक सामान्य बताई जा रही हैं।
3. शिक्षण संस्थान: दिल्ली, पंजाब और कर्नाटक जैसे राज्यों में स्कूल-कॉलेज खुले हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने परिवहन की स्थिति को देखते हुए अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। ओडिशा और केरल के कुछ जिलों में शिक्षण संस्थान बंद रखे गए हैं।
Police detain members of various trade unions who were protesting in front of Town Hall, as part of the all-India general strike in Bengaluru on February 12, 2026.
📸: @sriramhindu pic.twitter.com/NTNtRvP0Z7
— The Hindu (@the_hindu) February 12, 2026
क्या खुला है? (Essential Services)
आम जनता की सुविधा के लिए आपातकालीन सेवाओं को बंद से बाहर रखा गया है:
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अस्पताल और दवा की दुकानें: सभी मेडिकल सेवाएं और एम्बुलेंस पूरी तरह चालू हैं।
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बिजली और पानी: बिजली ग्रिड और जल आपूर्ति जैसी नागरिक सुविधाएं बाधित नहीं की गई हैं।
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निजी दफ्तर: जो दफ्तर हड़ताल का हिस्सा नहीं हैं, वहां कामकाज सामान्य है।
आंदोलन की मुख्य वजह: आखिर क्यों है गुस्सा?
प्रदर्शनकारी यूनियनों और किसान संगठनों की मुख्य मांगें निम्नलिखित कानूनों और बदलावों को लेकर हैं:
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लेबर कोड (Labour Codes): सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर 4 नए कोड बनाए हैं। यूनियनों का आरोप है कि इससे श्रमिकों के अधिकार कम होंगे और कॉर्पोरेट घरानों को फायदा मिलेगा।
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VB-G RAM G एक्ट, 2025: मनरेगा (MGNREGA) की जगह लाए गए इस नए कानून का विरोध हो रहा है। हालांकि सरकार का दावा है कि इसमें काम के दिन 100 से बढ़ाकर 125 किए गए हैं, लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह ‘डिमांड-आधारित’ हक को खत्म कर रहा है।
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SHANTI एक्ट और बिजली संशोधन बिल: परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी और बिजली के निजीकरण की संभावनाओं को लेकर भी कर्मचारी संगठन नाराज हैं।
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भारत-यूएस ट्रेड डील: संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) इस डील का विरोध कर रहा है। उनका तर्क है कि इससे अमेरिका से सस्ते कृषि उत्पाद भारत आएंगे, जिससे स्थानीय किसानों को नुकसान होगा।
निष्कर्ष
फिलहाल प्रशासन हाई अलर्ट पर है और कोशिश की जा रही है कि कानून-व्यवस्था बनी रहे। यदि आप आज यात्रा करने वाले हैं, तो स्थानीय परिवहन की स्थिति की जांच जरूर कर लें।

