कर्मचारियों से घर में बिजली बचत और ऊर्जा उपयोग पर जानकारी मांगी गई
Infosys electricity survey: बेंगलुरु स्थित आईटी दिग्गज इंफोसिस ने अपने कर्मचारियों से उनके घरों में बिजली उपयोग के डेटा की जानकारी जुटाने के लिए सर्वे शुरू किया है। (Infosys is Surveying Employee Home Electricity use for Sustainability Reporting) कंपनी का कहना है कि इस सर्वे से न केवल उनकी सस्टेनेबिलिटी पहलों के प्रभाव को मापना आसान होगा, बल्कि भविष्य में और प्रभावी ऊर्जा संरक्षण उपाय तैयार करने में मदद मिलेगी।
इंफोसिस में 3 लाख से अधिक कर्मचारी हैं और कंपनी इसे केवल लक्ष्य नहीं बल्कि साझा जिम्मेदारी मानती है। संग्रहराज्का ने कहा कि कंपनी ने पहले ही कई उपलब्धियों के जरिए अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है।
सस्टेनेबिलिटी में इंफोसिस की पहल
कंपनी ने कार्बन न्यूट्रैलिटी हासिल कर ली है, वह भी वैश्विक समयसीमा से पहले। 2008 से प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत में 55% की कमी की जा चुकी है। पिछले साल लगभग 77% बिजली की जरूरतें नवीकरणीय ऊर्जा से पूरी की गईं।
इस पहल के तहत इंफोसिस कर्मचारियों से अनुरोध कर रही है कि वे अपने घरों में ऊर्जा दक्षता उपाय अपनाएं। कंपनी का कहना है कि उसके ऑफिस बिल्डिंग्स पारंपरिक भवनों की तुलना में 50-60% कम बिजली खपत करते हैं।
सर्वे में कर्मचारियों से पूछे गए सवालों में शामिल हैं:
-
घर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग
-
पंखे, एयर कंडीशनर और हीटर का उपयोग
-
लाइट्स की वाट क्षमता
-
क्या वे सौर ऊर्जा का उपयोग करते हैं
-
घर पर लागू किए गए कोई नए ऊर्जा बचत उपाय और उनके परिणाम
वर्क-फ्रॉम-होम बिजली उपयोग का डेटा
इंफोसिस ने 2020-21 में वर्क-फ्रॉम-होम के दौरान ऊर्जा उत्सर्जन का अनुमान लगाने वाला सर्वे भी किया था। इस सर्वे के माध्यम से कंप्यूटर, पंखे, लाइटिंग, एसी और अन्य उपकरणों से घर में बिजली खपत को मापा गया।
इस साल कंपनी उसी सर्वे को फिर से कर रही है ताकि पूर्व अनुमानों की पुष्टि और डेटा की सटीकता सुनिश्चित की जा सके। इसका उद्देश्य इंफोसिस के पर्यावरणीय रिपोर्टिंग को और अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है।
नवीकरणीय ऊर्जा पर इंफोसिस की निर्भरता
कंपनी अपने बिजली उपयोग का लगभग 77% हिस्सा भारत में नवीकरणीय ऊर्जा से पूरा करती है। इसके पास अपने 60 मेगावाट क्षमता वाले नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र हैं। यह संयंत्र कंपनी को ग्रिड बिजली पर निर्भरता कम करने और अपने प्रमुख कैम्पसों में स्वावलंबी हरित ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद करते हैं।
2014 में, इंफोसिस ने कर्नाटक में 50 मेगावाट सोलर पार्क की योजना बनाई थी। यह भारत में पहला सॉफ्टवेयर कंपनी प्रोजेक्ट था जो अपने ऑफिस की अधिकांश बिजली की जरूरतें खुद से उत्पन्न करने वाला था।
ऊर्जा संरक्षण और जागरूकता
इंफोसिस का यह सर्वे सिर्फ डेटा संग्रह तक सीमित नहीं है। कंपनी का उद्देश्य कर्मचारियों में ऊर्जा संरक्षण की जागरूकता बढ़ाना भी है।
कर्मचारी इस सर्वे में अपनी नई और इनोवेटिव आइडियाज भी साझा कर सकते हैं, जो घर पर लागू किए गए ऊर्जा बचत उपायों पर आधारित हों। इससे न केवल व्यक्तिगत स्तर पर ऊर्जा बचत बढ़ेगी, बल्कि कंपनी के सस्टेनेबिलिटी प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।
ESG रिपोर्ट और कंपनी की प्रतिबद्धता
इंफोसिस की 2024-25 पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासन (ESG) रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी सस्टेनेबिलिटी को केवल लक्ष्य नहीं बल्कि साझा जिम्मेदारी मानती है।
इसके तहत:
-
कार्बन न्यूट्रैलिटी पहले ही हासिल की गई
-
प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत में 55% कमी
-
77% बिजली की आपूर्ति नवीकरणीय स्रोतों से
इस पहल का उद्देश्य है कि कंपनी हर कर्मचारी को ऊर्जा बचत और हरित पहल में भागीदार बनाए।
घर पर लागू किए जाने वाले उपाय
सर्वे में पूछे गए प्रश्न कर्मचारियों को प्रोत्साहित करते हैं कि वे अपने घरों में इन उपायों को अपनाएं:
-
ऊर्जा दक्ष लाइट्स और उपकरणों का उपयोग
-
एयर कंडीशनर और हीटर का विवेकपूर्ण उपयोग
-
सौर पैनल जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का प्रयोग
-
पुराने उपकरणों को बदलकर ऊर्जा बचत करना
कंपनी का मानना है कि अगर कर्मचारियों के घरों में यह अभ्यास सफल हो जाता है, तो पूरे संगठन की ऊर्जा खपत में महत्वपूर्ण कमी आएगी।
भविष्य की योजना
इंफोसिस लगातार ऊर्जा दक्षता और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में नए कदम उठा रही है। कंपनी की योजना है कि आने वाले वर्षों में:
-
घर और ऑफिस में ऊर्जा खपत का अधिक सटीक डेटा संग्रह
-
नई ऊर्जा बचत तकनीकों का कार्यान्वयन
-
कर्मचारियों के बीच ऊर्जा संरक्षण के लिए प्रतियोगिता और पुरस्कार
इससे न केवल कंपनी के ग्रीन एनर्जी लक्ष्य पूरे होंगे, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और कर्मचारियों की जागरूकता भी बढ़ेगी।
निष्कर्ष
इंफोसिस का यह कदम यह दिखाता है कि सस्टेनेबिलिटी अब केवल कॉर्पोरेट जिम्मेदारी नहीं बल्कि हर कर्मचारी का व्यक्तिगत दायित्व बन चुकी है।
कंपनी ने अपने ऑफिस में ऊर्जा खपत कम करने के लिए कई पहल की हैं और अब कर्मचारियों के घरों में भी इस प्रक्रिया को लागू करने का प्रयास कर रही है। इससे न सिर्फ ऊर्जा बचत होगी, बल्कि पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव भी पड़ेगा।

