Sarthak PDS Scheme Approved: देश में करोड़ों गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी PDS जीवनरेखा की तरह काम करती है। अब केंद्र सरकार इस व्यवस्था को और ज्यादा पारदर्शी, तेज और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ‘सार्थक-PDS’ योजना के विस्तार को मंजूरी दे दी गई है। इस योजना के लिए सरकार ने 25,530 करोड़ रुपये का बड़ा बजट तय किया है। सरकार का दावा है कि इससे देश के करीब 80 करोड़ लोगों को सीधे फायदा मिलेगा।
नई योजना के तहत राशन के परिवहन, भंडारण और वितरण व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाएगा ताकि लाभार्थियों तक अनाज सही समय पर और बिना किसी गड़बड़ी के पहुंच सके।
क्या है ‘सार्थक-PDS’ योजना?
‘सार्थक-PDS’ का पूरा नाम “Scheme for Assistance in Ration Transport and Handling – Integration with Automation in Public Distribution System” है।
यह योजना सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए बनाई गई है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्यों को राशन के परिवहन और वितरण में आर्थिक सहायता देना और पूरी व्यवस्था को डिजिटल व ऑटोमेटेड बनाना है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह योजना अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक लागू रहेगी। इसे 16वें वित्त आयोग चक्र के दौरान एक ‘अंब्रेला स्कीम’ के रूप में चलाया जाएगा।
80 करोड़ लोगों पर पड़ेगा सीधा असर
सरकार का कहना है कि यह फैसला देश की एक बहुत बड़ी आबादी को प्रभावित करेगा। भारत दुनिया का सबसे बड़ा फूड सिक्योरिटी प्रोग्राम चला रहा है, जिसके तहत करोड़ों लोगों को हर महीने सस्ती दरों पर राशन उपलब्ध कराया जाता है।
अब इस नई योजना के जरिए सरकार चाहती है कि राशन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़े और किसी भी स्तर पर होने वाली गड़बड़ियों को रोका जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक के इस्तेमाल से फर्जी राशन कार्ड, अनियमित वितरण और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं में कमी आ सकती है।
राशन सिस्टम में क्या-क्या बदलेगा?
राशन परिवहन और भंडारण को मिलेगा सपोर्ट
नई योजना के तहत राज्य सरकारों की एजेंसियों को खाद्यान्न के परिवहन, भंडारण और वितरण से जुड़े खर्चों में सहायता दी जाएगी।
कई राज्यों में दूरदराज इलाकों तक राशन पहुंचाने में अतिरिक्त खर्च आता है। ऐसे में यह आर्थिक सहायता व्यवस्था को मजबूत करने में मदद करेगी।
PDS होगा पूरी तरह डिजिटल
सरकार अब राशन व्यवस्था को तकनीक आधारित बनाने पर जोर दे रही है। इसके तहत ऑटोमेशन, डिजिटल ट्रैकिंग और आधुनिक निगरानी प्रणाली को बढ़ावा दिया जाएगा।
इससे राशन की दुकानों पर पारदर्शिता बढ़ेगी और लाभार्थियों को समय पर राशन मिलने में आसानी होगी।
राशन डीलरों का बढ़ेगा कमीशन
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि सरकार ने राशन दुकानदारों के कमीशन में भी बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है।
सरकार का मानना है कि इससे राशन डीलरों को बेहतर प्रोत्साहन मिलेगा और वे व्यवस्था को अधिक जिम्मेदारी से संचालित कर पाएंगे।
क्यों जरूरी था यह बदलाव?
पिछले कुछ वर्षों में देश में राशन वितरण व्यवस्था को लेकर कई तरह की चुनौतियां सामने आई थीं। कई जगहों पर अनियमितता, राशन की चोरी और तकनीकी खामियों की शिकायतें आती रही हैं।
इसके अलावा बड़ी आबादी तक समय पर अनाज पहुंचाना भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है।
इसी वजह से सरकार अब PDS को आधुनिक तकनीक से जोड़कर इसे ज्यादा प्रभावी और भरोसेमंद बनाना चाहती है।
गरीब परिवारों को कैसे मिलेगा फायदा?
सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद लाभार्थियों को राशन लेने में कम परेशानी होगी।
डिजिटल सिस्टम के जरिए वितरण प्रक्रिया आसान होगी और लाभार्थियों का डेटा अधिक सुरक्षित रहेगा।
इसके साथ ही राशन की उपलब्धता और स्टॉक की जानकारी भी बेहतर तरीके से मॉनिटर की जा सकेगी।
क्या कहती है सरकार?
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह फैसला सिर्फ राशन व्यवस्था सुधारने का कदम नहीं बल्कि देश के गरीब और जरूरतमंद लोगों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा प्रयास है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि हर जरूरतमंद व्यक्ति तक पारदर्शी और मजबूत व्यवस्था के जरिए राशन पहुंचे।
भविष्य में और क्या बदलाव संभव?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सरकार PDS को आधार आधारित सत्यापन, मोबाइल ट्रैकिंग और AI आधारित निगरानी से भी जोड़ सकती है।
अगर ऐसा होता है तो राशन वितरण प्रणाली और अधिक स्मार्ट और पारदर्शी हो सकती है।
निष्कर्ष
मोदी सरकार का ‘सार्थक-PDS’ योजना को मंजूरी देना देश की राशन व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। 25,530 करोड़ रुपये की इस योजना का मकसद सिर्फ खाद्यान्न पहुंचाना नहीं, बल्कि पूरी प्रणाली को पारदर्शी, आधुनिक और भरोसेमंद बनाना है।
अगर यह योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है तो आने वाले वर्षों में करोड़ों लोगों को बेहतर और आसान राशन सेवा मिल सकती है।

