UAE Pipeline Project: हॉर्मुज संकट के बीच नई पाइपलाइन परियोजना में आएगी तेजी, तेल निर्यात के लिए बनेगा वैकल्पिक रास्ता

Channelindiaone
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अबू धाबी | 15 मई, 2026 | UAE Pipeline Project: मध्य पूर्व (Middle East) में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने एक दूरगामी रणनीतिक फैसला लिया है। यूएई सरकार ने अपनी सरकारी तेल कंपनी ADNOC (अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी) को निर्देश दिया है कि वह अपने महत्वाकांक्षी ‘वेस्ट-ईस्ट पाइपलाइन’ (West-East Pipeline) प्रोजेक्ट के निर्माण में तेजी लाए।

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) जैसे विवादास्पद और संवेदनशील समुद्री रास्ते पर निर्भरता कम करना है। यूएई की योजना है कि 2027 तक फुजैराह (Fujairah) बंदरगाह के जरिए तेल निर्यात की क्षमता को दोगुना कर दिया जाए।

क्यों जरूरी है हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करना?

हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘ऑयल चोकपॉइंट’ है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। वर्तमान क्षेत्रीय संघर्षों और ऊर्जा बुनियादी ढांचों पर हो रहे हमलों के कारण इस रास्ते से होने वाली आवाजाही गंभीर रूप से बाधित हुई है। इन बाधाओं ने यूएई की सामान्य उत्पादन बहाल करने की क्षमता को भी सीमित कर दिया है।

अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने शुक्रवार को एक उच्च स्तरीय बैठक में कहा कि वैश्विक ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए पाइपलाइन की डिलीवरी में तेजी लाना अनिवार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूएई एक जिम्मेदार वैश्विक ऊर्जा उत्पादक के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

उत्पादन क्षमता और ओपेक (OPEC) से विदाई

यूएई ने हाल ही में तेल निर्यातक देशों के संगठन ‘ओपेक’ (OPEC) से अपनी सदस्यता खत्म करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। 1967 से संगठन का हिस्सा रहे यूएई ने अब अपनी स्वतंत्र राह चुनी है।

  • उत्पादन लक्ष्य: युद्ध से पहले यूएई प्रतिदिन लगभग 30 लाख बैरल तेल का उत्पादन कर रहा था।

  • भविष्य की योजना: अबू धाबी ने अपनी उत्पादन क्षमता को 49 लाख बैरल प्रतिदिन (BPD) तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।

  • वर्तमान स्थिति: मौजूदा युद्ध और निर्यात बाधाओं के कारण वर्तमान में यूएई केवल 18 लाख से 21 लाख बैरल प्रतिदिन का ही उत्पादन कर पा रहा है।

हब्शान-फुजैराह पाइपलाइन की भूमिका

वर्तमान में यूएई के पास केवल एक ही प्रमुख विकल्प है—अबू धाबी क्रूड ऑयल पाइपलाइन (Adcop), जिसे हब्शान-फुजैराह पाइपलाइन के नाम से भी जाना जाता है।

  • इसकी वर्तमान क्षमता 18 लाख बैरल है।

  • नई ‘वेस्ट-ईस्ट पाइपलाइन’ आने के बाद यूएई की निर्यात क्षमता सीधे तौर पर दोगुनी हो जाएगी, जिससे हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की स्थिति में भी यूएई का तेल बाजार तक सुरक्षित पहुँच सकेगा।

वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर

यूएई का यह कदम वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। यदि यूएई बिना किसी समुद्री बाधा के अपना तेल सीधे अरब सागर के जरिए वैश्विक बाजार में भेज पाता है, तो इससे तेल की कीमतों में स्थिरता आने की संभावना है। ओपेक से बाहर निकलने के बाद यूएई अब अपने उत्पादन को बाजार की मांग के अनुसार घटाने या बढ़ाने के लिए स्वतंत्र होगा, जिससे उसकी ‘ऑपरेशन्ल फ्लेक्सिबिलिटी’ बढ़ेगी।


UAE पाइपलाइन प्रोजेक्ट: एक नजर में

परियोजना का नाम वेस्ट-ईस्ट पाइपलाइन (West-East Pipeline)
संचालक कंपनी ADNOC (अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी)
लक्ष्य तिथि 2027 तक पूर्ण
मुख्य उद्देश्य हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करना
भविष्य की उत्पादन क्षमता 4.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन (BPD)
निर्यात केंद्र फुजैराह (Fujairah), यूएई

यूएई का ‘वेस्ट-ईस्ट पाइपलाइन’ प्रोजेक्ट केवल एक निर्माण कार्य नहीं है, बल्कि यह एक कूटनीतिक और आर्थिक सुरक्षा कवच है। ओपेक से अलग होने और नई निर्यात क्षमता विकसित करने के बाद यूएई आने वाले दशकों में वैश्विक ऊर्जा राजनीति का एक नया और स्वतंत्र ध्रुव बनकर उभर सकता है।

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