नई दिल्ली | 2 मई, 2026 | Fuel Prices may increase: देश में पहले से ही महंगाई की मार झेल रही जनता के लिए आने वाले कुछ दिन काफी भारी साबित हो सकते हैं। सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही है। पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी युद्ध और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने सरकार और तेल कंपनियों के सामने संकट खड़ा कर दिया है। बताया जा रहा है कि अगले 5 से 7 दिनों के भीतर कीमतों में बदलाव को लेकर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
कितनी बढ़ सकती हैं कीमतें?
सूत्रों के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 4 से 5 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि हो सकती है। वहीं, घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में भी 40 से 50 रुपये तक का इजाफा देखा जा सकता है।
अगर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में यह बढ़ोतरी होती है, तो यह लगभग चार साल के अंतराल के बाद पहला आधिकारिक मूल्य संशोधन होगा। गौरतलब है कि साल 2022 से खुदरा दरों को काफी हद तक स्थिर रखा गया था। हालांकि, हाल ही में विधानसभा चुनावों के संपन्न होने के बाद सरकार ने तुरंत दाम बढ़ाने की संभावना से इनकार किया था, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों ने अब सरकार के हाथ बांध दिए हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम? ये हैं मुख्य कारण
कीमतों में इस संभावित उछाल के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया का युद्ध है।
-
वैश्विक कच्चे तेल में उछाल: युद्ध के कारण सप्लाई चेन बाधित होने की आशंका और शिपिंग जोखिमों ने बेंचमार्क क्रूड की कीमतों को हाल के हफ्तों में काफी ऊपर धकेल दिया है।
-
तेल कंपनियों का नुकसान: खुदरा कीमतें नहीं बढ़ने के कारण तेल विपणन कंपनियां (OMCs) अब तक घाटा झेल रही थीं। कच्चे तेल की बढ़ती लागत के कारण उनका ‘अंडर-रिकवरी’ (लागत से कम पर बेचना) का बोझ असहनीय हो गया है।
-
राजकोषीय दबाव: कच्चे तेल की ऊंची कीमतें सरकार के राजकोषीय बोझ को भी बढ़ा रही हैं, जिससे सब्सिडी या टैक्स में कटौती कर जनता को राहत देने की गुंजाइश कम हो गई है।
5-7 दिनों में होगा ‘महंगाई’ पर फैसला
सरकार की आंतरिक बैठकों में इस समय कई विकल्पों पर चर्चा हो रही है। अधिकारी इस बात पर माथापच्ची कर रहे हैं कि कीमतों में कितनी बढ़ोतरी की जाए जिससे तेल कंपनियों का वित्तीय तनाव भी कम हो और आम जनता पर महंगाई का बोझ भी जरूरत से ज्यादा न बढ़े। सूत्रों का कहना है कि सरकार पश्चिम एशिया की बदलती स्थिति और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर इसके प्रभाव पर बारीकी से नजर रख रही है।
आम आदमी के बजट पर क्या होगा असर?
ईंधन और रसोई गैस की कीमतों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी का सीधा असर घर के बजट और परिवहन लागत पर पड़ता है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से माल ढुलाई महंगी होती है, जिससे फल, सब्जियां और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ जाती हैं। वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में सरकार के लिए यह एक बेहद संवेदनशील नीतिगत फैसला है।
संभावित मूल्य वृद्धि: एक नजर में
| मद | संभावित वृद्धि | प्रभाव |
| पेट्रोल (Petrol) | ₹4 – ₹5 प्रति लीटर | लगभग 4 साल बाद पहली वृद्धि |
| डीजल (Diesel) | ₹4 – ₹5 प्रति लीटर | परिवहन और लॉजिस्टिक्स महंगा होगा |
| LPG सिलेंडर | ₹40 – ₹50 प्रति सिलेंडर | रसोई का बजट बिगड़ेगा |
आने वाला एक हफ्ता भारतीय अर्थव्यवस्था और मध्यम वर्ग के लिए काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। सरकार को संतुलन बनाना होगा कि वह देश की वित्तीय स्थिति और जनता की जेब के बीच किसे प्राथमिकता देती है। फिलहाल, संकेत यही मिल रहे हैं कि जनता को एक और महंगाई का झटका लगने वाला है।

