नई दिल्ली/वेलिंगटन | 28 अप्रैल, 2026 | India-NZ Trade Deal: भारत ने वैश्विक व्यापार के मंच पर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सोमवार, 27 अप्रैल को भारत और न्यूजीलैंड ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन की दिशा में इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर (लगभग ₹1.6 लाख करोड़) के निवेश का संकल्प भी लिया है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस डील को महज 9 महीनों में पूरा कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है, जो दोनों देशों के बीच गहरे भरोसे को दर्शाता है।
भारतीय युवाओं और पेशेवरों के लिए ‘लॉटरी’
इस समझौते की सबसे बड़ी खासियत भारतीयों के लिए न्यूजीलैंड में काम करने और रहने के आसान रास्ते खोलना है।
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5,000 वर्क वीजा: न्यूजीलैंड हर साल कम से कम 5,000 ‘अस्थायी रोजगार प्रवेश वीजा’ (Temporary Employment Entry Visa) गारंटी के साथ देगा। ये वीजा आईटी, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों के कुशल पेशेवरों के लिए होंगे, जो 3 साल तक वहां काम कर सकेंगे।
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छात्रों को फायदा: न्यूजीलैंड में पढ़ रहे भारतीय छात्र अब प्रति सप्ताह 20 घंटे काम कर सकेंगे। ग्रेजुएशन और मास्टर डिग्री (STEM) करने वालों को 3 साल का और डॉक्टरेट करने वालों को 4 साल का ‘पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा’ मिलेगा।
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हॉलिडे वीजा: हर साल 1,000 युवा भारतीयों को ‘वर्क एंड हॉलिडे’ स्कीम के तहत 12 महीने तक न्यूजीलैंड में रहने और काम करने का मौका मिलेगा।
व्यापार में बड़ी छूट: निर्यातकों की होगी चांदी
इस संधि के तहत न्यूजीलैंड ने भारत से होने वाले 100% निर्यात पर ड्यूटी (शुल्क) खत्म करने का फैसला किया है।
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श्रम-प्रधान क्षेत्र: भारत के कपड़ा (Textiles), चमड़ा, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग सामान अब न्यूजीलैंड के बाजारों में ‘जीरो ड्यूटी’ पर बिकेंगे। इससे भारतीय कारीगरों और MSME सेक्टर को सीधा फायदा होगा।
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शराब और स्पिरिट: भारत से जाने वाली वाइन और स्पिरिट को न्यूजीलैंड में आसान पहुंच मिलेगी, वहीं न्यूजीलैंड की वाइन पर भारत में अगले 10 वर्षों में धीरे-धीरे ड्यूटी कम की जाएगी।
न्यूजीलैंड को क्या मिला? सेब और डेयरी में रियायत
भारत ने अपने 70.03% टैरिफ लाइनों को न्यूजीलैंड के लिए खोल दिया है।
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कृषि उत्पाद: न्यूजीलैंड के मशहूर सेब, एवोकैडो, ब्लूबेरी और कीवी अब भारतीय बाजारों में आसानी से उपलब्ध होंगे।
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कच्चा माल: न्यूजीलैंड से ऊन, लकड़ी और कोयला जैसे कच्चे माल का आयात सस्ता होगा, जिससे भारतीय उद्योगों की लागत कम होगी।
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किसानों की मदद: न्यूजीलैंड भारत में शहद उत्पादन और कीवी-सेब की खेती की तकनीक साझा करने में भारतीय किसानों की मदद करेगा।
विशेषज्ञों की राय: क्या 20 अरब डॉलर का निवेश हकीकत बनेगा?
जहाँ सरकार इस डील को बड़ी जीत बता रही है, वहीं कुछ विशेषज्ञ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। व्यापार विशेषज्ञ अजय श्रीवास्तव के अनुसार, न्यूजीलैंड ने पिछले 25 वर्षों में भारत में 1 अरब डॉलर से भी कम निवेश किया है। ऐसे में 15 साल में 20 अरब डॉलर का लक्ष्य काफी बड़ा है। हालांकि, EY इंडिया के विशेषज्ञों का मानना है कि ‘सर्विसेज’ सेक्टर में भारत को इससे जबरदस्त लाभ होगा।
भारत-न्यूजीलैंड FTA: मुख्य आकर्षण
| विशेषता | विवरण |
| निवेश संकल्प | $20 बिलियन (अगले 15 वर्षों में) |
| भारतीय निर्यात | 100% उत्पादों पर ‘जीरो ड्यूटी’ |
| प्रोफेशनल वीजा | हर साल 5,000 भारतीयों को 3 साल का वर्क परमिट |
| शिक्षा | STEM छात्रों को 3-4 साल का पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा |
| कृषि सहयोग | कीवी, सेब और शहद उत्पादन में तकनीकी मदद |
यह समझौता भारत के लिए ‘विन-विन’ स्थिति है। जहाँ एक ओर भारतीय उत्पादों को विकसित बाजार मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर हमारे युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करियर बनाने के द्वार खुले हैं। हालांकि, $20 बिलियन के निवेश का वादा जमीन पर कितनी जल्दी उतरता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

