India Social Media Law 2026: भारत सरकार ने मंगलवार को सोशल मीडिया कंपनियों के लिए एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। नए नियमों के तहत अब अवैध या गैरकानूनी सामग्री की सूचना मिलने के तीन घंटे के भीतर उसे प्लेटफॉर्म से हटाना अनिवार्य होगा। इससे पहले यह समय सीमा 36 घंटे थी। इस बदलाव से फेसबुक-मेटा, YouTube और X (पूर्व में Twitter) जैसी कंपनियों के लिए अनुपालन चुनौती बन सकती है।
सरकार ने कहा कि यह संशोधन 2021 की आईटी नियमावली में किया गया है। नई व्यवस्था में AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) से बनाई गई सामग्री के लिए भी विशेष प्रावधान हैं। पहले प्रस्ताव में AI कंटेंट के 10 प्रतिशत हिस्से पर स्पष्ट लेबल लगाने की शर्त थी, जबकि अब यह केवल “स्पष्ट और प्रमुख रूप से लेबल” लगाने तक सीमित है।
नई नियमावली 20 फरवरी 2026 से लागू होगी।
AI और डिजिटल कंटेंट पर नए नियम
संशोधित नियमों में “ऑडियो, विजुअल या ऑडियो-विजुअल जानकारी” और “सिंथेटिक जनित जानकारी” की परिभाषा दी गई है। इसका मतलब है कि AI द्वारा बनाई गई या बदली गई सामग्री, जो वास्तविक या प्रामाणिक लगती है, अब इन नियमों के अंतर्गत आती है।
हालांकि, सामान्य संपादन, ऐक्सेसिबिलिटी सुधार, और अच्छे इरादे से की गई शैक्षणिक या डिज़ाइन सामग्री को इन नियमों से बाहर रखा गया है।
नए बदलावों में प्रमुख बिंदु यह हैं:
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AI कंटेंट को अन्य जानकारी के बराबर माना जाएगा।
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अवैध या गैरकानूनी सामग्री के मामलों में AI कंटेंट पर भी कार्रवाई होगी।
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उपयोगकर्ता शिकायतों (Grievance Redressal) का समय सीमा घटा दी गई है।
AI कंटेंट की पहचान और लेबलिंग
नियमों के अनुसार, जो प्लेटफॉर्म AI कंटेंट बनाने या साझा करने की सुविधा देते हैं, उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि AI कंटेंट स्पष्ट और प्रमुख रूप से लेबल किया गया हो। इसके अलावा, तकनीकी रूप से संभव होने पर इसमें स्थायी मेटाडेटा या पहचानकर्ता (Identifier) भी होना चाहिए।
कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि एक बार लेबल या मेटाडेटा लगाने के बाद उसे हटाया या दबाया न जा सके।
अवैध AI कंटेंट पर रोक
सरकार ने कहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे AI कंटेंट पर रोक लगाने के लिए ऑटोमेटेड टूल्स का उपयोग करना होगा, जो अवैध, भ्रामक, यौन शोषणकारी, गैर-सहमति वाले, झूठे दस्तावेज़, बाल शोषण, विस्फोटक सामग्री या किसी की पहचान की नकल करने वाले हों।
यह कदम डिजिटल दुनिया में सुरक्षा और जिम्मेदारी बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
तेज़ समयसीमा और अनुपालन की चुनौती
तीन घंटे की नई समयसीमा सोशल मीडिया कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है। भारत सरकार की यह पहल ऑनलाइन स्पीच और सामग्री पर नियंत्रण को और मजबूत करती है।
डिजिटल अधिकार संगठनों ने इस नियम को आलोचना का निशाना बनाया है और कुछ तकनीकी कंपनियों के साथ विवाद भी बढ़ा है, खासकर X (पूर्व में Twitter) और मेटा (Meta) के मामले में।
फेसबुक-मेटा ने इस बारे में टिप्पणी करने से इनकार किया है, जबकि Google और X ने तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
वैश्विक दबाव और सामाजिक मीडिया की जवाबदेही
भारत के यह नियम वैश्विक स्तर पर सोशल मीडिया कंपनियों पर बढ़ते दबाव का हिस्सा हैं। यूरोप और ब्राजील जैसे देशों में भी सरकारें तेज़ प्रतिक्रिया और कंटेंट मॉनिटरिंग की मांग कर रही हैं।
भारत की IT नियमावली सरकार को यह अधिकार देती है कि वह किसी भी सामग्री को अवैध घोषित करने पर तुरंत हटाने का आदेश दे सकती है। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और यौन अपराध जैसे मामलों को शामिल किया गया है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने हजारों कंटेंट हटाने के आदेश जारी किए हैं, जो प्लेटफॉर्म की पारदर्शिता रिपोर्ट में दर्ज हैं।
नियमों के असर और भविष्य
विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से सोशल मीडिया पर सामग्री की निगरानी और जिम्मेदारी बढ़ेगी। हालांकि, कंपनियों को तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
AI कंटेंट और डिजिटल जानकारी की स्पष्ट पहचान अब अनिवार्य होगी। उपयोगकर्ताओं को भी यह समझना होगा कि अब किसी भी सामग्री की प्रामाणिकता की जिम्मेदारी प्लेटफॉर्म्स और निर्माता दोनों पर होगी।
सरकार की इस पहल से ऑनलाइन दुनिया में सुरक्षा, जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी, जिससे उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल वातावरण मिलेगा।
निष्कर्ष
भारत ने सोशल मीडिया और AI कंटेंट के लिए कड़े नियम लागू करके डिजिटल दुनिया में नया मानक स्थापित किया है। तीन घंटे की त्वरित हटाने की समयसीमा और AI कंटेंट पर विशेष प्रावधान कंपनियों और उपयोगकर्ताओं दोनों के लिए बड़े बदलाव लेकर आएंगे।
इस नियम से न केवल ऑनलाइन सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।

