नई दिल्ली: आंतरिक सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने सोमवार, 23 फरवरी 2026 को देश की पहली आधिकारिक आतंकवाद विरोधी नीति जारी की है। इस नीति को ‘प्रहार’ (PRAHAAR) नाम दिया गया है। यह दस्तावेज भारत की सुरक्षा रणनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है, जो पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ आधुनिक डिजिटल खतरों से निपटने का रोडमैप तैयार करता है।
‘प्रहार’ पॉलिसी की 5 बड़ी बातें
गृह मंत्रालय द्वारा जारी इस दस्तावेज में स्पष्ट किया गया है कि भारत अब केवल सीमा पार से होने वाली घुसपैठ तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके सामने चुनौतियां और भी जटिल हो गई हैं।
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आतंकवाद का कोई धर्म नहीं: नीति में साफ तौर पर कहा गया है कि भारत आतंकवाद को किसी विशेष धर्म, जातीयता, राष्ट्रीयता या सभ्यता से नहीं जोड़ता।
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तीन मोर्चों पर खतरा: भारत जल, थल और नभ (Air, Water, Land) तीनों मोर्चों पर आतंकी खतरों का सामना कर रहा है। इसके लिए बिजली, रेलवे, विमानन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सुरक्षा को अभेद्य बनाया गया है।
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ड्रोन और नई तकनीक का मुकाबला: पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी एक बड़ी चुनौती है। ‘प्रहार’ इस पर विशेष ध्यान केंद्रित करती है।
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साइबर हमले और डार्क वेब: नीति के अनुसार, अब ‘क्रिमिनल हैकर्स’ और कुछ देश भारत को साइबर हमलों के जरिए निशाना बना रहे हैं। आतंकी संगठन अब एन्क्रिप्शन, डार्क वेब और क्रिप्टो वॉलेट का इस्तेमाल कर अपनी पहचान छुपा रहे हैं।
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CBRNED मटेरियल की चुनौती: रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु और डिजिटल (CBRNED) सामग्री तक आतंकियों की पहुंच रोकना सुरक्षा एजेंसियों के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।
युवाओं को कट्टरपंथ से बचाने का ‘प्लान’
गृह मंत्रालय ने ‘प्रहार’ में इस बात पर जोर दिया है कि आतंकी संगठन भारतीय युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे निपटने के लिए सरकार ने ‘ग्रेडेड पुलिस रिस्पांस’ तैयार किया है:
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कट्टरपंथ विरोधी कार्यक्रम: युवाओं को कट्टरपंथ से बचाने के लिए धार्मिक नेताओं, एनजीओ और उदारवादी प्रचारकों की मदद ली जाएगी।
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जेलों में सतर्कता: जेलों के अंदर कट्टरपंथी कैदी अन्य कैदियों को प्रभावित न कर सकें, इसके लिए जेल स्टाफ को विशेष ट्रेनिंग और डी-रेडिकलाइजेशन प्रोग्राम चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
कानूनी मोर्चे पर मजबूती
आतंकवाद के खिलाफ केस को कमजोर होने से बचाने के लिए ‘प्रहार’ नीति में सुझाव दिया गया है कि एफआईआर (FIR) दर्ज होने से लेकर अदालती ट्रायल तक हर स्तर पर कानूनी विशेषज्ञों (Legal Experts) को शामिल किया जाए। इससे दोषियों को सजा दिलाने की दर (Conviction Rate) में सुधार होगा।
वैश्विक सहयोग की अपील
दस्तावेज में कहा गया है कि आज के दौर में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बिना आतंकवाद को जड़ से खत्म करना संभव नहीं है। अल-कायदा और आईएसआईएस (ISIS) जैसे वैश्विक समूह भारत में स्लीपर सेल्स के जरिए हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका जवाब क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय तालमेल से ही दिया जा सकता है।
निष्कर्ष
‘प्रहार’ पॉलिसी भारत की सुरक्षा नीति में एक मील का पत्थर है। यह न केवल दुश्मन के इरादों को भांपने में मदद करेगी, बल्कि आधुनिक तकनीक (जैसे ड्रोन और रोबोटिक्स) के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए एक मजबूत ढांचा भी प्रदान करेगी।

