NCERT book controversy: NCERT की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ पर मचा बवाल: सुप्रीम कोर्ट सख्त, 38 किताबों की जब्ती और माफ़ी का पूरा घटनाक्रम

Channelindiaone
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नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट ने NCERT की कक्षा 8 की सोशल साइंस की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ (Corruption in Judiciary) के संदर्भों पर कड़ी नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसे संस्थान को बदनाम करने की कोशिश करार देते हुए सरकार और NCERT से जवाब तलब किया है।

अदालत ने सख्त लहजे में कहा, “हम यह पता लगाकर रहेंगे कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है… किसी को भी संस्थान की छवि खराब करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।”

विवाद की जड़: कक्षा 8 की नई पाठ्यपुस्तक

विवाद NCERT की नई किताब ‘Exploring Society: India and Beyond’ को लेकर है। इसके एक अध्याय “समाज में न्यायपालिका की भूमिका” (The role of the judiciary in our society) में न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर कथित भ्रष्टाचार और लंबित मामलों के भारी बोझ का उल्लेख किया गया है।

किताब में दिए गए आंकड़े:

  • सुप्रीम कोर्ट: लगभग 81,000 लंबित मामले।

  • हाई कोर्ट: 62 लाख से अधिक मामले।

  • जिला अदालतें: करीब 4.7 करोड़ लंबित मामले।

कोर्ट में क्या हुआ? ‘हेड्स मस्ट रोल’ की चेतावनी

गुरुवार सुबह सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट का ध्यान इस ओर खींचते हुए कहा कि कक्षा 8 के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा है, जो बेहद चिंताजनक है।

इस पर CJI सूर्यकांत ने Suo Motu (स्वत: संज्ञान) लेते हुए कहा कि वे इस मामले से पूरी तरह वाकिफ हैं और हाई कोर्ट के जज भी इससे आहत हैं। कोर्ट ने किताब पर प्रतिबंध लगाने और इसकी प्रतियां जब्त करने के संकेत दिए हैं।

न्यायपालिका बनाम सरकार: पुराना है विवाद

यह पहली बार नहीं है जब न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच टकराव की स्थिति बनी हो। इस विवाद के पीछे कई पुराने संदर्भ भी जुड़ रहे हैं:

  1. NJAC विवाद (2015): संसद ने जजों की नियुक्ति के लिए ‘राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग’ (NJAC) बनाया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 4:1 के बहुमत से असंवैधानिक करार देकर रद्द कर दिया था।

  2. जगदीप धनखड़ का बयान (2025): तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने ‘न्यायिक अतिरेक’ (Judicial Overreach) पर टिप्पणी करते हुए अनुच्छेद 142 की तुलना ‘न्यूक्लियर मिसाइल’ से की थी।

  3. किरेन रिजिजू के तीखे तेवर: पूर्व कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कई बार न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे और रिटायर्ड जजों को ‘एंटी-इंडिया गैंग’ का हिस्सा बताया था।

  4. जस्टिस बी.एन. श्रीकृष्णा की टिप्पणी: रिटायर्ड जस्टिस श्रीकृष्णा ने अभिव्यक्ति की आजादी और डर के माहौल पर चिंता जताई थी, जिसे सरकार ने खारिज कर दिया था।

जस्टिस यशवंत वर्मा मामला और ‘भ्रष्टाचार’ का जिन्न

दिलचस्प बात यह है कि कोर्ट की यह नाराजगी ऐसे समय में आई है जब पिछले साल दिल्ली हाई कोर्ट के तत्कालीन जज जस्टिस यशवंत वर्मा के घर से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी। इस घटना के बाद एक तीन सदस्यीय समिति ने उनके महाभियोग (Impeachment) की सिफारिश की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि NCERT की किताब में शायद इन्हीं संदर्भों को शामिल करने की कोशिश की गई थी, जिसे कोर्ट ने अपमानजनक माना है।


अब तक क्या हुआ? (Timeline of events)

तारीख / समय मुख्य घटना
फरवरी 2026 NCERT की कक्षा 8 की नई किताब बाजार में आई।
बुधवार CJI ने खुली अदालत में किताब की सामग्री पर नाराजगी जताई।
गुरुवार सुबह सुप्रीम कोर्ट ने जवाबदेही तय करने का आदेश दिया और किताब पर रोक की बात कही।
ताज़ा स्थिति NCERT की 38 किताबों के सेट को वापस लेने और जांच के आदेश।

निष्कर्ष: शिक्षा और न्यायपालिका के बीच का यह टकराव अब एक बड़े कानूनी विवाद का रूप ले चुका है। NCERT ने मामले में माफी की पेशकश की है, लेकिन कोर्ट दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के मूड में है।

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