भुवनेश्वर/केंदुझर | 29 अप्रैल, 2026 | Odisha News: ओडिशा के केंदुझर जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी तंत्र और बैंकिंग व्यवस्था की संवेदनहीनता की कलई खोलकर रख दी है। एक आदिवासी व्यक्ति को अपनी मृत बहन के बैंक खाते से पैसे निकालने के लिए उसकी अस्थियों और कंकाल को कंधे पर लादकर सड़कों पर चलना पड़ा। यह मंजर जिसने भी देखा, उसकी रूह कांप गई।
जब इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और चौतरफा थू-थू होने लगी, तब जाकर प्रशासन की नींद खुली। आनंद-फानन में मंगलवार (28 अप्रैल) को वे सारे काम कुछ ही घंटों में पूरे कर दिए गए, जिनके लिए एक बेबस भाई हफ्तों से दफ्तरों के चक्कर काट रहा था।
क्या है पूरा मामला?
यह झकझोर देने वाली घटना केंदुझर जिले के पटना ब्लॉक के दियानाली गांव की है। यहाँ रहने वाले जीतू मुंडा की बहन का कुछ समय पहले देहांत हो गया था। बहन के बैंक खाते में कुछ पैसे जमा थे, जिनकी जीतू को सख्त जरूरत थी।
जब जीतू पैसे निकालने बैंक पहुँचा, तो कथित तौर पर बैंक अधिकारियों ने उससे बहन की मृत्यु का पुख्ता सबूत मांगा। कागजी कार्रवाई और मृत्यु प्रमाण पत्र के अभाव में परेशान जीतू ने वह किया जिसकी कल्पना भी कोई संवेदनशील इंसान नहीं कर सकता। वह अपनी बहन के अवशेषों (कंकाल) को एक कपड़े में लपेटकर कंधे पर लाद लिया और बैंक की ओर चल पड़ा, ताकि अधिकारियों को अपनी आंखों से ‘मौत का सबूत’ दिखा सके।
वायरल वीडियो और भारी आक्रोश
सड़क पर एक आदमी को कंकाल ले जाते देख लोग दंग रह गए। जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और आम जनता ने ओडिशा सरकार और बैंकिंग सिस्टम को आड़े हाथों लिया। लोगों ने सवाल उठाया कि क्या एक गरीब और आदिवासी व्यक्ति के लिए नियम इतने कठोर हैं कि उसे अपनी गरिमा तक दांव पर लगानी पड़े?
मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप और एक्शन
मामला तूल पकड़ते देख मुख्यमंत्री ने खुद इस पर संज्ञान लिया। उन्होंने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए अधिकारियों को फटकार लगाई और जनता के प्रति संवेदनशील रहने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन ने ‘सुपरफास्ट’ रफ्तार से काम किया:
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वित्तीय सहायता: जिला रेड क्रॉस फंड से जीतू मुंडा को तत्काल 30,000 रुपये की आर्थिक मदद दी गई।
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दस्तावेज: प्राथमिकता के आधार पर मृतका का मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी उत्तराधिकारी (Legal Heir) प्रमाण पत्र एक ही दिन में जारी कर दिया गया।
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बैंक भुगतान: बैंक में फंसा हुआ सारा पैसा भी तुरंत रिलीज कर दिया गया।
उच्च स्तरीय जांच के आदेश
इस शर्मनाक घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने राजस्व मंडल आयुक्त (RDC) को विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। उत्तरी संभाग के आरडीसी बुधवार से इस मामले की तफ्तीश शुरू करेंगे कि आखिर किस स्तर पर लापरवाही हुई और जीतू मुंडा को इस चरम कदम तक क्यों जाना पड़ा।
सिस्टम पर सवाल: ‘दाना माझी’ पार्ट-2?
यह पहली बार नहीं है जब ओडिशा से ऐसी तस्वीर आई है। इससे पहले कालाहांडी के दाना माझी की तस्वीर ने दुनिया को रुला दिया था, जब उन्हें अपनी पत्नी के शव को कंधे पर ढोना पड़ा था। जीतू मुंडा की यह घटना बताती है कि सालों बाद भी जमीनी स्तर पर सेवा वितरण (Service Delivery) और जवाबदेही में बड़ी कमी है।
घटनाक्रम: एक नज़र में
| समय | घटना |
| 27 अप्रैल | जीतू मुंडा बहन का कंकाल लेकर सड़क पर निकला। |
| 28 अप्रैल | वीडियो वायरल हुआ, मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए। |
| 28 अप्रैल (शाम) | प्रमाण पत्र जारी हुए, ₹30,000 की मदद मिली। |
| 29 अप्रैल | RDC ने मामले की आधिकारिक जांच शुरू की। |
प्रशासनिक चुस्ती तब क्यों नहीं दिखाई देती जब एक गरीब व्यक्ति गुहार लगाता है? जीतू मुंडा को न्याय तो मिल गया, लेकिन जो मानसिक आघात और अपमान उसने सहा, उसकी भरपाई ₹30,000 का मुआवजा नहीं कर सकता। यह समय है कि सरकारें फाइलों से बाहर निकलकर मानवीय संवेदनाओं को नियमों से ऊपर रखें।

