नई दिल्ली/बीजिंग | 10 मई, 2026 | Operation Sindoor Twist: भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले साल हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) की पहली बरसी के मौके पर एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने दक्षिण एशिया की भू-राजनीति (Geopolitics) में हलचल मचा दी है। पहली बार चीन ने आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार किया है कि मई 2025 में हुए इस संघर्ष के दौरान उसके तकनीकी विशेषज्ञ और इंजीनियर पाकिस्तानी एयरबेस पर मौजूद थे और वे सीधे तौर पर पाकिस्तान वायुसेना (PAF) की मदद कर रहे थे।
यह स्वीकारोक्ति किसी और ने नहीं, बल्कि खुद उन चीनी इंजीनियरों ने दी है जिन्होंने उस दौरान पाकिस्तान में रहकर भारतीय स्ट्राइक का सामना करने के लिए तकनीकी सहयोग प्रदान किया था।
CCTV पर चीनी इंजीनियर का कबूलनामा
चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर CCTV को दिए गए एक इंटरव्यू में, ‘एविएशन इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ऑफ चाइना’ (AVIC) के चेंगदू एयरक्राफ्ट डिजाइन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के इंजीनियर झांग हेंग ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। झांग उस टीम का हिस्सा थे जिसे 2025 के चार दिवसीय ‘मिनी वॉर’ के दौरान तकनीकी सहायता देने के लिए पाकिस्तान भेजा गया था।
झांग ने बताया, “सपोर्ट बेस पर हम अक्सर लड़ाकू विमानों के उड़ान भरने की गड़गड़ाहट और एयर-रेड सायरन की गूंज सुनते थे। मई की भीषण गर्मी में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच रहा था। वह हमारे लिए मानसिक और शारीरिक रूप से एक बड़ी परीक्षा थी।”
J-10CE और PL-15 मिसाइल: चीन का ‘युद्ध परीक्षण’
इस खुलासे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि चीन अपने अत्याधुनिक J-10CE फाइटर जेट को लेकर कितना गंभीर था। झांग के अनुसार, उनकी टीम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि चीनी उपकरण अपनी “पूरी युद्ध क्षमता” के साथ प्रदर्शन कर सकें।
प्रमुख तकनीकी विवरण:
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J-10CE फाइटर: यह चीन के उन्नत J-10C का निर्यात संस्करण है, जिसे 4.5 पीढ़ी का फाइटर जेट माना जाता है।
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AESA रडार: यह विमान एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे रडार से लैस है।
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PL-15 मिसाइल: पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के खिलाफ चीन निर्मित PL-15 एयर-टू-एयर मिसाइल का इस्तेमाल किया था।
एक अन्य इंजीनियर, जू दा ने तो J-10CE की तुलना अपने “बच्चे” से की, जिसे उन्होंने पाल-पोसकर पाकिस्तान को सौंपा और फिर उसे युद्ध के मैदान में “अग्निपरीक्षा” देते हुए देखा।
भारत के लिए चिंता का विषय: ‘टू-फ्रंट वॉर’ की आहट?
यह खुलासा भारत के लिए किसी बड़े खतरे के संकेत से कम नहीं है। अब तक यह माना जाता था कि चीन केवल हथियार और खुफिया जानकारी साझा करता है, लेकिन युद्ध के मैदान (On-ground) पर चीनी इंजीनियरों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि चीन और पाकिस्तान के बीच सैन्य एकीकरण (Military Integration) किस गहराई तक पहुँच चुका है।
विशेषज्ञों का विश्लेषण:
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लाइव टेस्टिंग ग्राउंड: पाकिस्तान अब चीनी सैन्य तकनीक के लिए एक ‘रियल-वर्ल्ड टेस्टिंग ग्राउंड’ बन गया है, जहाँ चीन अपने हथियारों का परीक्षण भारतीय सेना के खिलाफ कर रहा है।
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चीन की सीधी भागीदारी: सक्रिय संघर्ष के दौरान चीनी कर्मियों की उपस्थिति यह साबित करती है कि भविष्य में पाकिस्तान के साथ किसी भी टकराव में भारत को केवल एक दुश्मन से नहीं, बल्कि चीनी सिस्टम और तकनीकी समन्वय (Technical Coordination) से भी लड़ना होगा।
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हथियारों पर निर्भरता: SIPRI के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में पाकिस्तान ने अपने सैन्य उपकरणों का 80% से अधिक हिस्सा चीन से आयात किया है।
क्या था ऑपरेशन सिंदूर?
मई 2025 में, भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में स्थित आतंकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच चार दिनों तक भीषण हवाई संघर्ष और गोलाबारी हुई थी। चीन का यह ताजा बयान उस संघर्ष की पहली बरसी पर भारत को अपनी रक्षा रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करता है।
चीन-पाकिस्तान सैन्य गठजोड़: एक नज़र में
| श्रेणी | विवरण |
| मुख्य हथियार | J-10CE फाइटर जेट, PL-15 मिसाइल |
| सहयोग का स्तर | ऑन-साइट तकनीकी सहायता, इंटेलिजेंस शेयरिंग, सैटेलाइट इमेजरी |
| संस्थान | चेंगदू एयरक्राफ्ट डिजाइन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (AVIC) |
| महत्व | सक्रिय युद्ध के दौरान चीनी कर्मियों की पहली आधिकारिक पुष्टि |
चीन का यह सार्वजनिक स्वीकारोक्ति भारत के लिए एक कूटनीतिक और रणनीतिक चुनौती है। यह स्पष्ट करता है कि हिमालय से लेकर हिंद महासागर तक, चीन और पाकिस्तान का गठजोड़ भारत की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी पहेली बना हुआ है। अब समय है कि भारत अपनी ‘टू-फ्रंट’ युद्ध की तैयारियों को और भी पुख्ता करे।

