जयपुर में ‘वोट चोरी’ के खिलाफ कांग्रेस का मार्च, गहलोत-डोटासरा-जूली समेत 100 से ज्यादा नेता हिरासत में

गहलोत, डोटासरा, जूली समेत कई नेता हिरासत में, वाटर कैनन से रोका गया मार्च

Channelindiaone
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कथित 'वोट चोरी' और चुनाव आयोग

जयपुर में कांग्रेस का ‘वोट चोरी’ के खिलाफ हल्लाबोल

जयपुर, 28 सितंबर 2026। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), कथित ‘वोट चोरी’ और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के विरोध में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सोमवार को जयपुर में शक्ति प्रदर्शन किया। शहीद स्मारक से निकले मार्च को राज्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय तक पहुंचने से पहले पुलिस ने रोक दिया। बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश में पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली समेत कई बड़े नेताओं को हिरासत में लेकर विद्याधर नगर थाने ले जाया गया।

शहीद स्मारक पर सभा, फिर आयोग की ओर कूच

प्रदर्शन की शुरुआत शहीद स्मारक पर हुई सभा से हुई। प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा की अध्यक्षता में हुई इस सभा में प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, गहलोत, जूली और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। रिपोर्टों के अनुसार सभा में एआईसीसी के सह-सचिव, विधायक, सांसद, पूर्व और वर्तमान प्रत्याशी, जिलाध्यक्ष और पीसीसी पदाधिकारी भी शामिल हुए। कांग्रेस का दावा है कि हजारों कार्यकर्ता इस आयोजन में पहुंचे।

सभा के बाद नेता और कार्यकर्ता पैदल मार्च करते हुए निर्वाचन आयोग कार्यालय के घेराव के लिए निकले। सतीश चंद्र अग्रवाल सर्किल पर पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रास्ता रोक दिया। कार्यकर्ताओं ने आगे बढ़ने का प्रयास किया तो दोनों पक्षों में झड़प हुई। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछार की। कुछ रिपोर्टों में इसे हल्की झड़प और हल्का बल प्रयोग बताया गया है। बाद में नेताओं और कार्यकर्ताओं को वाहनों में बैठाकर थाने ले जाया गया। एक रिपोर्ट के अनुसार हिरासत में लिए गए नेताओं की संख्या करीब 100 रही, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

डोटासरा के आरोप: मतदाता सूची में गड़बड़ी

सभा को संबोधित करते हुए डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस लोकतंत्र और नागरिकों के मताधिकार की रक्षा के लिए आंदोलन कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर और मतदाता सूचियों के प्रबंधन में भारी गड़बड़ी करके लोकतंत्र को लूटा गया है। उनका कहना था कि सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और बड़ी संख्या में मतदाता प्रभावित हुए हैं।

डोटासरा ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने वोट चोरी की शिकायतों की जांच कराने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस कार्यकर्ता गांव-गांव और ढाणी-ढाणी जाकर लोगों को एसआईआर से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जानकारी देंगे।

निकाय चुनावों पर भी भाजपा को घेरा

डोटासरा ने राजस्थान के हालिया नगर निकाय चुनावों को लेकर भी भाजपा पर आरोप लगाए। उनके अनुसार कांग्रेस समर्थित पार्षदों पर दबाव बनाकर उन्हें भाजपा के समर्थन में लाने की कोशिश हुई और पार्टी नेताओं-कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने की घटनाएं भी हुईं। उन्होंने भरतपुर सहित कुछ स्थानों पर सरकारी एजेंसियों की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। साथ ही कहा कि कांग्रेस आगामी पंचायत चुनाव पूरी ताकत से लड़ेगी।

गौरतलब है कि राज्य के 309 शहरी निकायों के नतीजे 14 सितंबर को आए थे। जयपुर, उदयपुर, कोटा और भीलवाड़ा नगर निगमों में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला, जबकि बीकानेर में कांग्रेस जीती। पाली, अजमेर, भरतपुर और जोधपुर में निर्दलीय किंगमेकर की भूमिका में रहे। इन नतीजों के बाद से बोर्ड गठन और पार्षदों की खींचतान को लेकर सियासत गर्म है।

रंधावा, जूली और गहलोत ने क्या कहा

प्रदेश प्रभारी रंधावा ने कार्यकर्ताओं से कहा कि पार्टी लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़क से संसद तक लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने निकाय चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन को मजबूत बताया और चुनाव आयोग की भूमिका पर सरकार से जवाब मांगा।

नेता प्रतिपक्ष जूली ने वोट चोरी के आरोपों की जांच की मांग दोहराई और कहा कि चुनाव आयोग को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून और उन्हें कानूनी संरक्षण देने वाले प्रावधानों पर भी सवाल उठाए और सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा।

अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में बहुत खतरनाक खेल चल रहा है और गुंडागर्दी के बल पर लोकतंत्र को खत्म किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि असम में मनमाने परिसीमन से कांग्रेस को नुकसान हुआ और अब विधानसभा व लोकसभा के परिसीमन में भी गड़बड़ी की कोशिश हो रही है। उन्होंने इसे ‘करो या मरो’ की लड़ाई बताया और कार्यकर्ताओं से घर-घर पहुंचने का आह्वान किया। गहलोत ने यह भी कहा कि जनता का हक छीना जा रहा है और कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने आरएसएस पर भी लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। इस आरोप पर संघ की प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।

आंदोलन यहीं थमने वाला नहीं है। प्रदेश कांग्रेस के महासचिव एवं मीडिया चेयरपर्सन स्वर्णिम चतुर्वेदी के अनुसार 29 सितंबर को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन होगा। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पुतले जलाने की भी घोषणा की है। कांग्रेस की मांग है कि ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए, उनकी गिरफ्तारी हो और उनके कार्यकाल में लिए गए फैसलों की समीक्षा की जाए। ये मांगें कांग्रेस की हैं और किसी सक्षम प्राधिकरण ने इन्हें स्वीकार नहीं किया है।

‘वोट चोरी’ का मुद्दा: पृष्ठभूमि

‘वोट चोरी’ कांग्रेस का पुराना राजनीतिक नारा है। ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ नारा 2025 के चुनावी विवाद के दौरान उभरा, जब राहुल गांधी ने इसे रैलियों में इस्तेमाल करना शुरू किया। इसके जरिए विपक्ष चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी और चुनाव आयोग की भाजपा से मिलीभगत का आरोप लगाता रहा है। जयपुर का प्रदर्शन इसी मुहिम की राजस्थान इकाई की कड़ी माना जा रहा है।

एसआईआर के तहत मतदाता सूची का घर-घर सत्यापन कर उसे अद्यतन किया जाता है। आयोग इसे सूची की शुद्धता के लिए जरूरी प्रक्रिया बताता रहा है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि इससे पात्र मतदाताओं के नाम कट सकते हैं। मामले का पूरा चित्र दोनों पक्षों की बात सामने आने पर ही स्पष्ट होगा।

प्रशासन और आयोग का पक्ष

कांग्रेस के आरोपों पर निर्वाचन आयोग, भाजपा और केंद्र सरकार की ओर से प्रतिक्रिया अभी उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं मिली है। पुलिस की ओर से भी हिरासत में लिए गए लोगों की आधिकारिक संख्या और आगे की कार्रवाई का ब्योरा जारी नहीं किया गया है। रिपोर्टों में सामान्यतः नेताओं को हिरासत में लेकर थाने ले जाने की बात है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आगे की कार्रवाई कानून और प्रशासन की प्रक्रिया के अनुसार होगी।

राजनीतिक मायने

निकाय चुनाव के नतीजों के तुरंत बाद हुए इस प्रदर्शन को कांग्रेस के लिए संगठन में जोश भरने और आगामी पंचायत चुनावों की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। गहलोत, डोटासरा, जूली और रंधावा का एक मंच पर आना पार्टी की एकजुटता का संदेश भी है। दूसरी ओर, भाजपा आमतौर पर ऐसे आरोपों को निराधार बताती रही है। आने वाले दिनों में जिला मुख्यालयों के प्रदर्शन और सरकार व आयोग की प्रतिक्रिया से आंदोलन की दिशा तय होगी।

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