Rajasthan News | Fifth-grade student dies at school: राजस्थान के नागौर में बड़ा हादसा, स्कूल में प्रार्थना के दौरान पांचवीं की छात्रा की मौत, 4 महीने पहले भाई को भी खोया था परिवार ने

Channelindiaone
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नागौर (राजस्थान): राजस्थान के नागौर जिले के गोटन थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ के तालनपुर गांव में स्थित एक निजी स्कूल में सोमवार (23 फरवरी) को सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान 9 साल की एक मासूम बच्ची अचानक गश खाकर गिर गई और उसकी मौत हो गई।

प्रार्थना के दौरान अचानक बिगड़ी तबीयत

जानकारी के अनुसार, कक्षा 5 की छात्रा दिव्या स्कूल में अन्य बच्चों के साथ सुबह की असेंबली (प्रार्थना) में शामिल थी। सीसीटीवी (CCTV) फुटेज में देखा गया कि बच्ची खेल के मैदान में सामान्य रूप से मौजूद थी, तभी वह अचानक बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ी।

स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों ने आनन-फानन में उसे नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों की प्रारंभिक राय के अनुसार, मासूम की मौत का संभावित कारण कार्डियक अरेस्ट (हृदय गति रुकना) हो सकता है।


परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

दिव्या की मौत ने उसके परिवार को कभी न भूलने वाला जख्म दिया है। दुखद बात यह है कि महज चार महीने पहले ही इस परिवार ने अपने 16 साल के बेटे (दिव्या के भाई) को भी इसी तरह की अचानक हुई मौत में खो दिया था।

  • पोस्टमार्टम से इनकार: परिजनों ने मासूम का पोस्टमार्टम करवाने से मना कर दिया, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में सहमति से शव उन्हें सौंप दिया गया।

  • अंतिम संस्कार: गमगीन माहौल में बच्ची का अंतिम संस्कार किया गया। गांव के लोग इस दोहरी त्रासदी से गहरे शोक में हैं।


विशेषज्ञों की राय: बच्चों में अचानक कार्डियक अरेस्ट के लक्षण

मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि हालांकि बच्चों में हार्ट अटैक के मामले दुर्लभ होते हैं, लेकिन हाल के समय में ऐसी घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है।

मुख्य लक्षण जिन पर माता-पिता को ध्यान देना चाहिए:

  • अचानक चक्कर आना या बेहोश होना।

  • सीने में दर्द या भारीपन की शिकायत।

  • सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ होना।

निष्कर्ष

स्कूल प्रशासन और स्थानीय शिक्षा विभाग ने इस घटना पर शोक व्यक्त किया है। नागौर की इस घटना ने एक बार फिर बच्चों के स्वास्थ्य और स्कूलों में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था (First Aid) की उपलब्धता पर बहस छेड़ दी है।

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