Breaking Rajasthan News | Rajasthan Refinery Fire: ₹80,000 करोड़ की पचपदरा रिफाइनरी में आग के बाद जांच तेज; NIA और फोरेंसिक टीमें मौके पर, टला उद्घाटन

Channelindiaone
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बालोतरा/बाड़मेर | 22 अप्रैल, 2026 | Rajasthan Refinery Fire: राजस्थान के बाड़मेर (पचपदरा) में स्थित देश की सबसे आधुनिक और जटिल HPCL राजस्थान रिफाइनरी (HRRL) से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। जिस रिफाइनरी का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मंगलवार को किया जाना था, वहां सोमवार को भीषण आग लग गई। इस हादसे के बाद केंद्र और राज्य सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं।

आज (बुधवार) मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, राजस्थान एटीएस (ATS), एनआईए (NIA) के प्रतिनिधि और फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया। आग की गंभीरता को देखते हुए रिफाइनरी के उद्घाटन को अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है।

रिफाइनरी के ‘दिल’ (CDU) में भड़की लपटें

हादसा रिफाइनरी के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से—क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU) में हुआ। इसे रिफाइनरी का ‘दिल’ कहा जाता है क्योंकि कच्चे तेल की प्रोसेसिंग यहीं से शुरू होती है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि हीट एक्सचेंजर सर्किट में लगे वाल्व या फ्लैंज से हाइड्रोकार्बन के रिसाव (Leakage) के कारण यह आग भड़की।

राहत की बात यह रही कि रिफाइनरी की आपातकालीन टीम और स्थानीय प्रशासन ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया। इस घटना में किसी भी तरह की जनहानि या चोट की खबर नहीं है।

जांच के घेरे में ‘फायर फाइटिंग सिस्टम’

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल रिफाइनरी की सुरक्षा प्रणाली पर खड़ा हुआ है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, आग लगने के तुरंत बाद रिफाइनरी का ऑटोमैटिक फायर एक्सटिंग्विशिंग सिस्टम समय पर सक्रिय नहीं हो पाया।

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि पूर्व एमडी (MRPL) एम. वेंकटेश के नेतृत्व में 4 सदस्यीय विशेष जांच टीम बाड़मेर पहुंच चुकी है। यह टीम जांच करेगी कि आखिर सुरक्षा की पहली दीवार यानी फायर सिस्टम फेल क्यों हुआ?

मुख्यमंत्री का दौरा और सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बालोतरा पहुंचकर रिफाइनरी प्रबंधन के साथ हाई-लेवल मीटिंग की। चूंकि यह प्रोजेक्ट ₹80,000 करोड़ का है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए जांच में NIA और ATS को भी शामिल किया गया है ताकि किसी भी तरह की ‘साजिश’ या ‘सबोटाइज’ की संभावना को खारिज किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा मानकों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद ही मरम्मत और व्यावसायिक परिचालन (Commercial Operations) शुरू करने की नई तारीख तय की जाएगी।

HPCL का पक्ष: क्या होगा प्रोजेक्ट पर असर?

रिफाइनरी में 74% हिस्सेदारी रखने वाली कंपनी HPCL ने एक बयान जारी कर कहा है कि आग को केवल हीट एक्सचेंजर स्टैक तक ही सीमित रखा गया था। वैक्यूम डिस्टिलेशन यूनिट (VDU) और अन्य सेक्शन पूरी तरह सुरक्षित हैं। कंपनी का मानना है कि इस हादसे का वित्तीय या परिचालन संबंधी कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा, हालांकि नुकसान का विस्तृत आकलन अभी जारी है।

इतिहास खुद को दोहरा रहा है?

रिफाइनरी के प्री-कमीशनिंग और कमीशनिंग चरण (शुरुआत से ठीक पहले) सबसे संवेदनशील होते हैं। दिलचस्प बात यह है कि साल 2016 में जब इंडियन ऑयल (IOC) की पारादीप रिफाइनरी का उद्घाटन होना था, तब भी उद्घाटन से कुछ दिन पहले वहां आग लग गई थी। पचपदरा रिफाइनरी भारत की पहली ऐसी रिफाइनरी है जहां पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स भी साथ में है, जो इसे तकनीकी रूप से बेहद जटिल बनाता है।


पचपदरा रिफाइनरी अग्निकांड: मुख्य तथ्य

विवरण जानकारी
प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग ₹80,000 करोड़
हादसे का समय सोमवार (21 अप्रैल, 2026)
हादसे वाली जगह क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU)
जांच टीम के प्रमुख एम. वेंकटेश (पूर्व एमडी, MRPL)
हिस्सेदारी HPCL (74%) और राजस्थान सरकार (26%)

राजस्थान रिफाइनरी का सपना मारवाड़ की आर्थिक तस्वीर बदलने वाला है। ऐसे में उद्घाटन से ठीक पहले हुआ यह हादसा एक चेतावनी है। अब पूरी नजर एम. वेंकटेश कमेटी की रिपोर्ट पर है, जो यह तय करेगी कि क्या यह केवल एक तकनीकी खराबी थी या सुरक्षा प्रबंधन में कोई बड़ी चूक। रिफाइनरी के जल्द शुरू होने की उम्मीद लगाए बैठे राजस्थान के लोगों के लिए अब इंतजार थोड़ा और लंबा हो गया है।

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