श्रीनगर | 2 मार्च, 2026
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद कश्मीर घाटी में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। अमेरिका और इजरायल के कथित संयुक्त हमले में खामेनेई की मौत की खबर फैलते ही घाटी के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सोमवार को कश्मीर के कई संवेदनशील इलाकों में आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं।
प्रमुख बिंदु: एक नज़र में
| क्षेत्र | मुख्य घटना |
| इंटरनेट | सुरक्षा कारणों से सेवाओं पर रोक |
| शिक्षा | स्कूल और कॉलेज 2 दिन के लिए बंद |
| सुरक्षा | पुलिस और CRPF की भारी तैनाती |
| प्रभावित इलाके | श्रीनगर, बडगाम, अनंतनाग, पुलवामा |
लाल चौक और मुख्य रास्ते सील
श्रीनगर का ऐतिहासिक लाल चौक और घंटा घर इलाके को पूरी तरह से बैरिकेड्स लगाकर सील कर दिया गया है। पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की भारी तैनाती की गई है ताकि किसी भी तरह की अनहोनी को टाला जा सके। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है और घाटी के सभी स्कूल-कॉलेजों को दो दिनों के लिए बंद रखने का आदेश दिया है।
शांतिपूर्ण लेकिन भावुक प्रदर्शन
घाटी में शिया समुदाय की अच्छी खासी आबादी (लगभग 15 लाख) है। लाल चौक, बेमिना, बडगाम, बांदीपोरा, अनंतनाग और पुलवामा जैसे क्षेत्रों में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए।
-
महिलाओं और बच्चों की भागीदारी: प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हुए, जिन्होंने खामेनेई की तस्वीरें और काले झंडे ले रखे थे।
-
नारेबाजी: प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। “अल्लाह-ओ-अकबर” और “खामेनेई रहबर” जैसे नारों से पूरी घाटी गूंज उठी।
-
UN दफ्तर पर धरना: श्रीनगर के सोनवार स्थित संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह (UNMOGIP) के बाहर भी भारी भीड़ जमा हुई। प्रदर्शनकारियों ने वहां एक ज्ञापन सौंपने की कोशिश की और मुख्य सड़क पर घंटों तक धरना दिया।
नेताओं की अपील और बंद का असर
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार विदेश मंत्रालय के संपर्क में है ताकि ईरान में रह रहे कश्मीरी छात्रों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
वहीं, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भी इस बंद का समर्थन किया है। कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों द्वारा बुलाए गए इस बंद के कारण सोमवार को बाजार पूरी तरह बंद रहे और सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा।
भावनाओं का सैलाब
प्रदर्शन में शामिल एक महिला ने भावुक होते हुए कहा, “खामेनेई हमारे लिए एक धार्मिक स्तंभ थे। उनकी कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकता।” गनीमत यह रही कि इतने बड़े विरोध प्रदर्शन के बावजूद घाटी से कहीं भी हिंसा की कोई खबर नहीं आई है। पुलिस महानिदेशक (DGP) नलिन प्रभात खुद स्थिति की निगरानी के लिए मैदान में उतरे।

