लखनऊ: उत्तर प्रदेश के न्यायिक परिसरों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब सोमवार सुबह प्रदेश के 18 जिलों की निचली अदालतों को बम से उड़ाने वाले धमकी भरे ईमेल मिले। इन ईमेल के बाद पुलिस और प्रशासन तुरंत एक्शन मोड में आ गया और सभी कोर्ट परिसरों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
जिन जिलों में यह धमकी मिली है उनमें लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी, मेरठ, मुरादाबाद, आजमगढ़ और अमरोहा जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं।
सुबह-सुबह आए ईमेल से मची खलबली
पुलिस सूत्रों के अनुसार, ये धमकी भरे ईमेल सोमवार तड़के भेजे गए थे। संदेश में दावा किया गया था कि जिला अदालत परिसरों के भीतर विस्फोट किए जाएंगे। जानकारी मिलते ही कोर्ट प्रशासन ने पुलिस को सूचित किया। अदालत की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही बम निरोधक दस्ते (BDS) और डॉग स्क्वॉड ने चप्पे-चप्पे की तलाशी ली।
लखनऊ कोर्ट को मिली दूसरी धमकी, ISI का नाम आया सामने
राजधानी लखनऊ के जिला कोर्ट परिसर को पिछले 3 दिनों में यह दूसरी बार धमकी मिली है। ताजा ईमेल में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का जिक्र किया गया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है।
डीसीपी (वेस्ट जोन) विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमों ने मोर्चा संभाल लिया। एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर सघन तलाशी ली गई। हालांकि, घंटों चली जांच के बाद अब तक कोई भी संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और जांच के बिंदु
राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। सुरक्षा के लिहाज से निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:
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ATS की एंट्री: उत्तर प्रदेश की एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) इन धमकी भरे ईमेल की जांच कर रही है।
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साइबर सेल का एक्शन: साइबर एक्सपर्ट्स उन IP एड्रेस को ट्रेस करने में जुटे हैं जहां से ये ईमेल भेजे गए थे।
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सघन चेकिंग: वकीलों और वादकारियों को कड़ी सुरक्षा जांच के बाद ही परिसर में प्रवेश दिया जा रहा है।
पुरानी कड़ियां: गौर करने वाली बात यह है कि पिछले शुक्रवार को भी राज्य की चार जिला अदालतों को इसी तरह के ईमेल मिले थे। अधिकारियों का मानना है कि यह न्यायपालिका के कामकाज में बाधा डालने और दहशत फैलाने की एक सोची-समझी साजिश हो सकती है।
तफ्तीश जारी: क्या यह महज एक अफवाह है?
अब तक की जांच में किसी भी जिले से कोई विस्फोटक बरामद नहीं हुआ है। पुलिस इसे ‘होक्स’ (अफवाह) मानकर भी जांच कर रही है, लेकिन ISI के नाम के इस्तेमाल को देखते हुए किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा रही है। डीजीपी मुख्यालय से सभी जिलों की मॉनिटरिंग की जा रही है।

