नई दिल्ली: बजट सत्र 2026 के दूसरे चरण की शुरुआत होते ही संसद के गलियारों में सियासी हलचल तेज हो गई है। लगातार हो रहे हंगामे के बीच अब खबर आ रही है कि कांग्रेस सहित विपक्षी दल लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला के खिलाफ ‘अविश्वास प्रस्ताव’ (No-Confidence Motion) लाने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
विपक्ष का आरोप है कि सदन में उनकी आवाज दबाई जा रही है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि वे कार्यवाही में बाधा डाल रहे हैं।
विपक्षी खेमे में क्या चल रहा है?
सोमवार, 9 फरवरी को विपक्षी दलों के ‘फ्लोर लीडर्स’ की एक अहम बैठक हुई। सूत्रों के मुताबिक, इसी बैठक में स्पीकर के खिलाफ मोर्चा खोलने की रणनीति बनाई गई।
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मुख्य शिकायतें: समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि सदन में विपक्ष के नेताओं के माइक बंद कर दिए जाते हैं और सत्ता पक्ष की विवादित टिप्पणियों को रिकॉर्ड से नहीं हटाया जाता।
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निलंबन का मुद्दा: विपक्ष की एक बड़ी मांग यह भी है कि पिछले हफ्ते निलंबित किए गए 8 सांसदों का निलंबन तुरंत वापस लिया जाए।
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राहुल गांधी का संबोधन: विपक्ष चाहता है कि सदन में राहुल गांधी को बोलने का पर्याप्त समय और मौका मिले।
नेताओं की मुलाकात और बंद कमरे की चर्चा
सदन स्थगित होने के तुरंत बाद राहुल गांधी, अखिलेश यादव, अभिषेक बनर्जी और टीआर बालू जैसे दिग्गज नेताओं ने स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की। इस मुलाकात का मकसद बीच का रास्ता निकालना था। दिलचस्प बात यह है कि इस बैठक के कुछ ही देर बाद स्पीकर ने गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की।
लोकसभा के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, स्पीकर बिरला ने स्पष्ट किया है कि विपक्ष को संवैधानिक रूप से उनके खिलाफ प्रस्ताव लाने का पूरा अधिकार है, लेकिन प्राथमिकता सदन की गरिमा बनाए रखना है।
पीएम मोदी की सुरक्षा और महिला सांसदों का खत
इस पूरे ड्रामे के बीच एक नया विवाद भी जुड़ गया है। कांग्रेस की महिला सांसदों ने स्पीकर को पत्र लिखकर उन आरोपों को ‘निराधार’ बताया है जिनमें कहा गया था कि वे प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ किसी तरह के शारीरिक विरोध की योजना बना रही थीं।
वहीं, सचिवालय की ओर से संकेत दिए गए हैं कि सुरक्षा चिंताओं और सदन की गरिमा को देखते हुए ही कुछ कड़े फैसले लिए जा रहे हैं।
बजट पर लटकी तलवार: क्या होगा आगे?
बजट सत्र के पहले हिस्से में अब केवल चार दिन बचे हैं। संवैधानिक नियमों के अनुसार, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बजट पर बहस पूरी कर इसे पारित कराना है।
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समय की कमी: अगर गतिरोध नहीं टूटा, तो बजट पास कराने के लिए सरकार को कड़ा संघर्ष करना पड़ सकता है।
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राज्यसभा की प्रक्रिया: लोकसभा से पास होने के बाद बजट को उच्च सदन (राज्यसभा) भेजा जाना है, जहाँ से वापस आने के बाद ही प्रक्रिया पूरी होगी।
शशि थरूर का रुख: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस मामले पर संतुलित बयान देते हुए कहा कि अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा जरूर है, लेकिन जब तक इसे औपचारिक रूप से पेश नहीं किया जाता, तब तक यह केवल चर्चा ही है।

