बंगाल में बड़ा सियासी मोड़: मतदान से पहले TMC उम्मीदवार ने छोड़ा मैदान

Channelindiaone
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Falta Seat News: पश्चिम बंगाल की चर्चित Falta Assembly Constituency सीट पर एक नया राजनीतिक मोड़ सामने आया है। दोबारा मतदान से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार Jahangir Khan ने खुद को चुनावी प्रक्रिया से अलग करने की घोषणा कर दी है। इस फैसले ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है और चुनावी माहौल को और गरमा दिया है।

फाल्टा सीट पहले से ही विवादों और आरोप-प्रत्यारोपों के कारण सुर्खियों में थी, लेकिन जहांगीर खान के अचानक पीछे हटने के फैसले ने इस सीट को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है।


क्यों दोबारा हो रहा है मतदान?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव इस बार दो चरणों में संपन्न हुए थे। मतदान 23 और 29 अप्रैल को हुआ था, जबकि नतीजे 4 मई को घोषित किए गए थे।

फाल्टा सीट पर दूसरे चरण में मतदान हुआ था, लेकिन बाद में चुनाव आयोग ने यहां गंभीर अनियमितताओं की शिकायतों को देखते हुए सभी 285 मतदान केंद्रों पर मतदान रद्द कर दिया।

इसके बाद आयोग ने 21 मई को दोबारा मतदान कराने का फैसला किया। इस पुनर्मतदान के नतीजे 24 मई को घोषित किए जाएंगे।

यह फैसला अपने आप में बेहद असामान्य माना जा रहा है क्योंकि पूरे विधानसभा क्षेत्र में मतदान रद्द होना दुर्लभ स्थिति है।


जहांगीर खान ने क्या कहा?

टीएमसी उम्मीदवार Jahangir Khan ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह फाल्टा के बेटे हैं और चाहते हैं कि यहां शांति और विकास बना रहे।

उन्होंने कहा कि नए मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari द्वारा फाल्टा के विकास के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की गई है। इसी वजह से उन्होंने दोबारा मतदान से खुद को अलग करने का फैसला लिया है।

जहांगीर खान का यह बयान राजनीतिक हलकों में हैरानी पैदा करने वाला रहा क्योंकि चुनावी मुकाबले के बीच इस तरह का फैसला आम तौर पर नहीं देखा जाता।


मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का तीखा हमला

जहांगीर खान की घोषणा पर मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा कि जहांगीर खान इसलिए पीछे हटे हैं क्योंकि उन्हें कोई पोलिंग एजेंट नहीं मिल रहा था।

मुख्यमंत्री ने इसे राजनीतिक हार का संकेत बताते हुए कहा कि जनता ने पहले ही उनका समर्थन छोड़ दिया था।

उनके इस बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।


TMC ने किया किनारा

इस पूरे घटनाक्रम के बीच All India Trinamool Congress ने साफ किया है कि जहांगीर खान का फैसला पूरी तरह निजी है।

पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि यह तृणमूल कांग्रेस का आधिकारिक निर्णय नहीं है।

पार्टी ने आरोप लगाया कि 4 मई को नतीजे आने के बाद से फाल्टा क्षेत्र में उसके 100 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है।

टीएमसी ने दावा किया कि उसके कई दफ्तरों में तोड़फोड़ की गई और कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने की कोशिश हुई।

पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला बताया है।


फाल्टा सीट पहले से क्यों थी चर्चा में?

फाल्टा सीट पिछले कई महीनों से विवादों के केंद्र में रही है।

बीजेपी लगातार आरोप लगाती रही है कि स्थानीय टीएमसी नेता लोगों को डराते और दबाव बनाते हैं।

हालांकि, Abhishek Banerjee ने इन आरोपों को खारिज करते हुए बीजेपी को जमीन पर मुकाबला करने की चुनौती दी थी।

यह सीट राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल चुनावी लड़ाइयों में शामिल हो गई थी।


IPS अजयपाल शर्मा का वायरल वीडियो

फाल्टा सीट पर चुनावी तनाव तब और बढ़ गया जब यहां तैनात पर्यवेक्षक Ajaypal Sharma का एक वीडियो वायरल हुआ।

वीडियो में वह कथित तौर पर चेतावनी देते नजर आए कि अगर किसी ने गड़बड़ी की तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

वीडियो वायरल होने के बाद कई विपक्षी नेताओं ने इसकी आलोचना की और निष्पक्षता पर सवाल उठाए।

इस घटना ने चुनावी माहौल को और संवेदनशील बना दिया।


फाल्टा सीट पर अब मुकाबला किसके बीच?

जहांगीर खान के हटने के बाद मुख्य मुकाबला बीजेपी उम्मीदवार Debangshu Panda, कांग्रेस के Abdur Razzaq Molla और CPI(M) उम्मीदवार Shambhu Nath Kurmi के बीच माना जा रहा है।

इससे चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।


राज्य की सत्ता का नया समीकरण

4 मई को घोषित नतीजों में बीजेपी ने 207 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी।

इसके बाद Suvendu Adhikari ने पश्चिम बंगाल के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।

टीएमसी को इस चुनाव में 80 सीटें मिलीं।

फाल्टा सीट पर दोबारा मतदान का परिणाम प्रतीकात्मक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।


क्या कहती है राजनीतिक तस्वीर?

विश्लेषकों का मानना है कि जहांगीर खान का पीछे हटना सिर्फ एक उम्मीदवार का फैसला नहीं, बल्कि बदलते राजनीतिक माहौल का संकेत हो सकता है।

यह घटना राज्य की नई सत्ता संरचना और विपक्ष की रणनीति पर बड़ा असर डाल सकती है।


निष्कर्ष

फाल्टा सीट पर जहांगीर खान का पीछे हटना पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है।

यह फैसला सिर्फ एक सीट का मामला नहीं, बल्कि राज्य की बदलती राजनीतिक हवा को भी दर्शाता है।

अब सबकी नजर 21 मई के मतदान और 24 मई के नतीजों पर टिकी है, जो बंगाल की राजनीति में नया संदेश दे सकते हैं।

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