IRCTC Scam Case: लालू, राबड़ी और तेजस्वी पर चलेगा ट्रायल | CBI का हाईकोर्ट में बड़ा बयान

Channelindiaone
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IRCTC Scam Case: IRCTC घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव को उस समय बड़ा झटका लगा, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली हाईकोर्ट में साफ कहा कि केवल मंजूरी की कमी के आधार पर वे मुकदमे से बच नहीं सकते।

CBI ने अदालत को बताया कि जब निचली अदालत ने मामले में संज्ञान लिया था, तब अभियोजन की अनुमति नहीं होने के बावजूद भी यह ट्रायल को रोकने का आधार नहीं बनता।

दिल्ली हाईकोर्ट में हुई अहम सुनवाई

यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा की बेंच के सामने सुनवाई के लिए आया। लालू परिवार की ओर से दायर याचिकाओं में आरोप तय किए जाने को चुनौती दी गई थी।

CBI की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल डी. पी. सिंह ने अदालत में कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत अनुमति लेना इस मामले में अनिवार्य नहीं था।

उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2020 में तत्कालीन अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने भी इसी तरह की राय दी थी।

बाद में ली गई मंजूरी पर CBI का तर्क

CBI ने कोर्ट में कहा कि भले ही पहले अनुमति नहीं ली गई थी, लेकिन बाद में कानूनी प्रक्रिया के तहत इसे प्राप्त कर लिया गया।

डी. पी. सिंह ने कहा कि यह मंजूरी उस समय ली गई, जब मामले में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 207 के तहत कार्यवाही चल रही थी। ऐसे में आरोपियों को किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि बाद में अनुमति ली जाती है और उससे किसी पक्ष को नुकसान नहीं होता, तो पूरी प्रक्रिया वैध मानी जाती है।

“मुकदमा रुकने की जरूरत नहीं” – CBI

CBI ने अदालत में कहा कि अभियोजन की अनुमति बाद में भी मिल सकती है और इससे पूरी कार्यवाही प्रभावित नहीं होती।

जांच एजेंसी ने तर्क दिया कि जब तक आरोपी यह साबित नहीं करते कि उन्हें इससे कोई नुकसान हुआ है, तब तक मुकदमा रोकने का कोई आधार नहीं बनता।

CBI के मुताबिक, लालू परिवार की ओर से अब तक यह नहीं बताया गया है कि अनुमति में देरी से उन्हें क्या नुकसान हुआ।

अक्टूबर 2025 में तय हुए थे आरोप

इस मामले में 13 अक्टूबर 2025 को निचली अदालत ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत 11 अन्य लोगों पर आरोप तय किए थे।

इन पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार से जुड़े अपराधों के आरोप लगाए गए हैं।

CBI का कहना है कि यह मामला रेलवे की संपत्तियों को निजी कंपनियों को अनुचित तरीके से सौंपने से जुड़ा हुआ है।

लालू परिवार की दलील

लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव ने कोर्ट में दलील दी कि जब अदालत ने संज्ञान लिया था, तब भ्रष्टाचार निवारण कानून और CrPC की धारा 197 के तहत कोई अनुमति नहीं थी।

उनका कहना था कि बिना वैध अनुमति के मुकदमा चलाना कानून के खिलाफ है।

हालांकि, CBI ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि यह मुद्दा ट्रायल के दौरान तय होगा।

किन धाराओं में लगे हैं आरोप

निचली अदालत ने इस मामले में कई लोगों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) और 13(1)(d) के तहत आरोप तय किए हैं।

ये धाराएं सरकारी पद का दुरुपयोग कर निजी लाभ लेने से जुड़ी होती हैं।

इसके अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 420 यानी धोखाधड़ी के तहत भी आरोप लगाए गए हैं।

अन्य आरोपियों के नाम भी शामिल

इस केस में लालू परिवार के अलावा प्रवीण कुमार गोयल, राकेश सक्सेना, भूपेंद्र अग्रवाल, राकेश गोगिया और विनोद कुमार अस्थाना जैसे लोगों पर भी आरोप तय किए गए हैं।

कुछ निजी कंपनियों और कारोबारियों को भी इस घोटाले में शामिल बताया गया है।

CBI का दावा है कि इन सभी ने मिलकर सरकारी संपत्तियों का गलत तरीके से फायदा उठाया।

सजा का प्रावधान क्या है?

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम 10 साल तक की सजा हो सकती है।

वहीं धोखाधड़ी के मामले में अधिकतम 7 साल की जेल का प्रावधान है।

अगर अदालत में आरोप साबित होते हैं, तो लालू परिवार के लिए यह मामला गंभीर कानूनी संकट बन सकता है।

बिहार की राजनीति पर असर

IRCTC घोटाला केस का सीधा असर बिहार की राजनीति पर भी पड़ सकता है। लालू यादव और तेजस्वी यादव राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं।

इस केस की वजह से विपक्ष लगातार RJD पर हमला कर रहा है, जबकि पार्टी इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है।

आने वाले समय में कोर्ट का फैसला चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।

निष्कर्ष

IRCTC घोटाला मामले में CBI के ताजा बयान से साफ है कि लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के लिए कानूनी मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है और आने वाले दिनों में यह मामला और अहम मोड़ ले सकता है।

अब सबकी नजर कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी है, जो देश की राजनीति और कानून व्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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