Mukul Roy Passes Away: बंगाल की राजनीति के ‘चाणक्य’ मुकुल रॉय का निधन, 71 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस

Channelindiaone
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कोलकाता: भारतीय राजनीति और खासकर पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के संस्थापक सदस्यों में से एक और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री मुकुल रॉय (Mukul Roy) का सोमवार (23 फरवरी, 2026) तड़के निधन हो गया। वह 71 वर्ष के थे।

मुकुल रॉय लंबे समय से बीमार चल रहे थे और कोलकाता के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज जारी था। उनके बेटे शुभ्रांशु रॉय ने जानकारी दी कि उनके पिता पिछले कई दिनों से कोमा में थे। सोमवार रात करीब 1:30 बजे उन्हें दिल का दौरा (Cardiac Arrest) पड़ा, जो जानलेवा साबित हुआ।


बंगाल की राजनीति के असली ‘चाणक्य’

मुकुल रॉय को पश्चिम बंगाल की राजनीति का ‘चाणक्य’ माना जाता था। ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद साथियों में शुमार मुकुल रॉय ने तृणमूल कांग्रेस को जमीन से खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई थी। अभिषेक बनर्जी के उभार से पहले, पार्टी में उन्हें ‘नंबर दो’ की हैसियत हासिल थी। उनकी संगठनात्मक क्षमता और रणनीति का लोहा उनके विरोधी भी मानते थे।

राजनीतिक सफर: कांग्रेस से TMC और फिर BJP तक

मुकुल रॉय का राजनीतिक जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। उनके करियर के कुछ प्रमुख पड़ाव इस प्रकार हैं:

  • शुरुआत: उन्होंने अपने करियर की शुरुआत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से की थी, लेकिन बाद में ममता बनर्जी के साथ मिलकर TMC की नींव रखी।

  • केंद्रीय मंत्री: यूपीए-2 सरकार के दौरान उन्होंने जहाजरानी मंत्रालय में राज्य मंत्री और बाद में केंद्रीय रेल मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दीं।

  • दलों का फेरबदल: साल 2017 में उन्होंने TMC छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया था। 2021 के विधानसभा चुनाव में वह कृष्णनगर उत्तर सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए।

  • घर वापसी: चुनाव के कुछ समय बाद वह वापस अपनी पुरानी पार्टी TMC में लौट आए, हालांकि उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया था।


लंबे समय से खराब था स्वास्थ्य

पिछले कुछ वर्षों से मुकुल रॉय सक्रिय राजनीति से दूर थे। वह किडनी की बीमारी सहित कई अन्य शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे थे। गिरते स्वास्थ्य के कारण उन्हें बार-बार अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता था। उनकी मृत्यु से बंगाल की राजनीति में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है, जिसे भरना मुश्किल होगा।

श्रद्धांजलि का तांता

मुकुल रॉय के निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। विभिन्न दलों के नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है और उन्हें एक कुशल रणनीतिकार के रूप में याद किया है।

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