नई दिल्ली: खगोल प्रेमियों और आध्यात्मिक श्रद्धा रखने वालों के लिए 3 मार्च 2026 की तारीख बेहद खास होने वाली है। इस दिन साल का पहला और सबसे लंबा चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2026) लगने जा रहा है। इस अद्भुत खगोलीय घटना को ‘ब्लड मून’ (Blood Moon) भी कहा जा रहा है, क्योंकि ग्रहण के दौरान चांद गहरा लाल या तांबे जैसा नजर आएगा।
भारत में दिखेगा चंद्र ग्रहण?
जी हाँ, 3 मार्च को होने वाला यह ग्रहण भारत के कई हिस्सों में दिखाई देगा। चूंकि यह भारत में दृश्यमान है, इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका सूतक काल भी प्रभावी होगा। भारत में ग्रहण की कुल अवधि लगभग 25 मिनट की होगी, जो शाम को चंद्रोदय के ठीक बाद दिखाई देगी।
चंद्र ग्रहण 2026: महत्वपूर्ण समय (पंचांग के अनुसार)
ज्योतिषीय गणना और पंचांग के अनुसार, इस ग्रहण का समय तालिका नीचे दी गई है:
| घटना | समय (3 मार्च 2026) |
| सूतक काल का प्रारंभ | सुबह 06:19 बजे |
| ग्रहण का स्पर्श (शुरुआत) | दोपहर 03:19 बजे |
| खग्रास (पूर्ण चंद्र ग्रहण) प्रारंभ | शाम 04:34 बजे |
| भारत में चंद्रोदय | शाम 06:22 बजे |
| मोक्ष (ग्रहण की समाप्ति) | शाम 06:47 बजे |
नोट: भारत में शाम 6:22 बजे चांद निकलने के बाद 6:47 बजे तक (लगभग 25 मिनट) लोग इस खगोलीय घटना को देख पाएंगे।
दुनिया में कहाँ-कहाँ दिखेगा सबसे साफ?
यूं तो यह ग्रहण पृथ्वी के उस हर हिस्से से दिखेगा जहाँ रात होगी, लेकिन सबसे शानदार और स्पष्ट नजारा उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी हिस्से, ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत महासागरीय क्षेत्रों में देखने को मिलेगा। वहां पूर्णता (Totality) की अवधि लगभग 58 मिनट की होगी।
होली और भद्रा का संयोग
यह चंद्र ग्रहण होली के समय पड़ रहा है, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है।
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होलिका दहन 2026: भद्रा काल और पूर्णिमा तिथि को ध्यान में रखते हुए, इस साल होलिका दहन का शुभ समय 2 मार्च की रात (3 मार्च की सुबह) 01:26 AM से 02:38 AM के बीच रहेगा।
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धुलेंडी (रंगों की होली): 4 मार्च 2026 को मनाई जाएगी।
सूतक काल के नियम: क्या करें और क्या न करें?
भारत में दृश्यमान होने के कारण सूतक काल के दौरान कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं:
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मंदिरों के कपाट: सूतक काल लगते ही मंदिरों के द्वार बंद कर दिए जाते हैं।
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पूजा-पाठ: इस दौरान मूर्ति स्पर्श वर्जित है, लेकिन मानसिक जप (भगवान राम, कृष्ण या नारायण के मंत्र) अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
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शुभ कार्य: किसी भी प्रकार का मांगलिक या शुभ कार्य ग्रहण काल में टाल देना चाहिए।
क्यों खास है यह ‘ब्लड मून’?
वैज्ञानिक दृष्टि से, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आती है, तो सूर्य की किरणें पृथ्वी के वायुमंडल से छनकर चंद्रमा पर पड़ती हैं। वायुमंडल के कारण नीला प्रकाश बिखर जाता है और केवल लाल प्रकाश ही चंद्रमा तक पहुँच पाता है, जिससे वह लाल दिखने लगता है। इसे ही ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।
कैसे देखें?
चंद्र ग्रहण देखना पूरी तरह सुरक्षित है। इसके लिए किसी विशेष चश्मे की जरूरत नहीं होती। आप खुली आंखों से इसे देख सकते हैं, हालांकि दूरबीन (Binoculars) का इस्तेमाल अनुभव को और बेहतर बना सकता है।

