ईरान-इजराइल जंग का नौवां दिन: तेल भंडार पर इजराइल का हमला, ईरान का 5 देशों पर पलटवार
मध्य पूर्व में चल रही अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच भीषण जंग अब और अधिक खतरनाक मोड़ ले चुकी है। युद्ध का नौवां दिन कई बड़े सैन्य घटनाक्रमों का गवाह बना, जिसमें इजराइल ने ईरान के तेल भंडार और रिफाइनरी से जुड़े ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू कर दिए। वहीं ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल सहित खाड़ी के कई देशों को निशाना बनाया।
इजराइली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इजराइल की एयरफोर्स ने ईरान के करीब 30 फ्यूल टैंक और 3 प्रमुख तेल डिपो पर हमला किया। इन हमलों से कई जगहों पर बड़े धमाके हुए और तेल भंडारों में आग लग गई।
इस बीच ईरान की ताकतवर सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि वह अमेरिका और इजराइल के खिलाफ कम से कम छह महीने तक युद्ध लड़ने की क्षमता रखता है।
इजराइल का ईरान के तेल ठिकानों पर बड़ा हमला
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इजराइल ने इस बार सीधे ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है। इजराइल डिफेंस फोर्स (IDF) का कहना है कि जिन फ्यूल स्टोरेज कॉम्प्लेक्स को निशाना बनाया गया, उनका इस्तेमाल ईरानी सैन्य बलों को ईंधन आपूर्ति करने के लिए किया जाता था।
बताया जा रहा है कि इन हमलों के दौरान तेहरान और उसके आसपास के इलाकों में जोरदार विस्फोटों की आवाज सुनी गई। कई स्थानों से काले धुएं के गुबार आसमान में उठते दिखाई दिए।
यह पहली बार है जब इस युद्ध में इतने बड़े पैमाने पर ईरान की ऊर्जा संरचना को सीधे निशाना बनाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस रणनीति का उद्देश्य ईरानी सेना की लॉजिस्टिक सप्लाई को कमजोर करना है।
30 फ्यूल टैंक और 3 तेल डिपो बने निशाना
इजराइली मीडिया प्लेटफॉर्म वाइनेट के अनुसार, इजराइली सेना ने ईरान के विभिन्न हिस्सों में स्थित लगभग 30 फ्यूल टैंक और 3 बड़े तेल डिपो को निशाना बनाया।
इनमें से कुछ हमले तेहरान के आसपास के औद्योगिक इलाकों में हुए, जहां ईंधन भंडारण और वितरण के बड़े केंद्र मौजूद हैं। हमलों के बाद कई जगहों पर आग लग गई और दमकल विभाग को घंटों तक आग बुझाने के लिए संघर्ष करना पड़ा।
ईरान का जवाबी हमला: 5 देशों को बनाया निशाना
इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने कुल 5 देशों को निशाना बनाया, जिनमें शामिल हैं:
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इजराइल
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कुवैत
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सऊदी अरब
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बहरीन
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संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
ईरान के हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए और कई जगहों पर हवाई हमलों की चेतावनी जारी की गई।
कुछ स्थानों पर ड्रोन और मिसाइलों को इंटरसेप्ट भी किया गया, लेकिन इस घटनाक्रम ने पूरे मध्य पूर्व में सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं।
IRGC का बड़ा बयान: छह महीने तक युद्ध लड़ने की क्षमता
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी ने कहा है कि ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड दोनों ही लंबे समय तक युद्ध लड़ने की क्षमता रखते हैं।
उन्होंने कहा कि:
“ईरान अमेरिका और इजराइल के खिलाफ कम से कम छह महीने तक युद्ध जारी रखने की क्षमता रखता है।”
नैनी ने दावा किया कि ईरान ने अब तक 200 से अधिक सैन्य ठिकानों और फैसिलिटी को निशाना बनाया है, जो अमेरिका और इजराइल से जुड़े हुए हैं।
युद्ध का दायरा बढ़ने का खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि अब यह संघर्ष सिर्फ ईरान और इजराइल तक सीमित नहीं रहा। खाड़ी देशों पर हमलों के बाद यह संघर्ष क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है।
कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार, यदि खाड़ी के देश इस संघर्ष में सीधे शामिल हो जाते हैं तो यह युद्ध और भी व्यापक हो सकता है।
वैश्विक तेल बाजार पर असर
मध्य पूर्व दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादन क्षेत्रों में से एक है। ऐसे में ईरान-इजराइल युद्ध का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार, इस युद्ध के चलते वैश्विक तेल आपूर्ति में बाधा आने की आशंका है और कई ऊर्जा परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
नागरिकों पर भी पड़ रहा असर
युद्ध का असर आम लोगों पर भी देखने को मिल रहा है। ईरान में कई जगहों पर ईंधन की सप्लाई प्रभावित होने की खबरें हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि तेहरान में ईंधन वितरण पर अस्थायी सीमाएं भी लगाई गई हैं।
इसके अलावा विस्फोटों के बाद जहरीले धुएं और प्रदूषण को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
दुनिया भर से शांति की अपील
इस युद्ध के बढ़ते दायरे को देखते हुए कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही कूटनीतिक प्रयास नहीं किए गए तो यह संघर्ष पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर कर सकता है। ईरान-इजराइल के बीच जारी युद्ध अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। तेल भंडारों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों के बाद यह संघर्ष केवल सैन्य लड़ाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार को भी प्रभावित कर सकता है।
ईरान का छह महीने तक युद्ध जारी रखने का दावा और खाड़ी देशों पर हमले इस बात का संकेत हैं कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष और भी तेज हो सकता है।

