Gujarat Local Body Elections: PM मोदी बोले- जनता ने सुशासन पर लगाई मुहर

Channelindiaone
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Gujarat Local Body Elections:  गुजरात की राजनीति में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी ने अपना दबदबा साबित कर दिया है। स्थानीय निकाय चुनाव 2026 के नतीजों में भाजपा ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए नगर निगमों, नगरपालिकाओं, जिला पंचायतों और तालुका पंचायतों में शानदार जीत दर्ज की है। इस बड़ी जीत के बाद प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कहा कि जनता ने भाजपा की “सुशासन की राजनीति” और राज्य सरकार के कामकाज पर भरोसा जताया है।

भाजपा की इस जीत ने साफ कर दिया है कि गुजरात में पार्टी की पकड़ अभी भी बेहद मजबूत है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी जैसी विपक्षी पार्टियां कई क्षेत्रों में संघर्ष करती नजर आईं।


PM मोदी ने कहा- गुजरात और BJP का रिश्ता और मजबूत हुआ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि गुजरात और भाजपा के बीच का रिश्ता अब और मजबूत हो गया है। उन्होंने कहा कि लोगों ने राज्य सरकार के उत्कृष्ट कार्यों को देखकर सुशासन की राजनीति के पक्ष में मतदान किया है।

उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में भाजपा और अधिक मेहनत करेगी और गुजरात को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी। पीएम मोदी का यह बयान साफ संकेत देता है कि भाजपा इस जीत को केवल चुनावी सफलता नहीं, बल्कि जनता के विश्वास की जीत मान रही है।


BJP ने 9,900 से ज्यादा सीटों में बनाई बड़ी बढ़त

शुरुआती रुझानों में भाजपा का दबदबा

शुरुआती आंकड़ों के अनुसार भाजपा ने 9,900 से अधिक सीटों में से 6,472 सीटों पर बढ़त या जीत दर्ज की। यह आंकड़ा विपक्षी दलों से बहुत आगे है और भाजपा की मजबूत संगठनात्मक ताकत को दर्शाता है।

कांग्रेस को 1,412 सीटें मिलीं, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों और अन्य दलों, जिनमें आम आदमी पार्टी (AAP) और AIMIM भी शामिल हैं, को कुल 597 सीटें मिलीं।

यह परिणाम दिखाते हैं कि शहरी ही नहीं, ग्रामीण गुजरात में भी भाजपा का प्रभाव लगातार बना हुआ है।


नगर निगम चुनाव में BJP की सुनामी

अहमदाबाद में भाजपा का शानदार प्रदर्शन

अहमदाबाद नगर निगम की 192 सीटों में भाजपा ने 158 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस को केवल 22 सीटें मिलीं। यह नतीजा बताता है कि राज्य के सबसे बड़े शहर में भी भाजपा का प्रभाव मजबूत बना हुआ है।

सूरत बना BJP का मजबूत किला

सूरत नगर निगम में भाजपा ने 120 में से 115 सीटें जीतकर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली। आम आदमी पार्टी को सिर्फ 4 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस ने पांच साल बाद सिर्फ 1 सीट जीतकर अपना खाता खोला।

राजकोट और वडोदरा में भी भाजपा का दबदबा

राजकोट की 72 सीटों में भाजपा ने 65 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को 7 सीटें मिलीं। AAP यहां अपना खाता भी नहीं खोल सकी।

वडोदरा में 76 सीटों में भाजपा ने 69 सीटें हासिल कीं। कांग्रेस को 6 सीटें मिलीं और AAP यहां भी शून्य पर रही।

भावनगर में भी BJP आगे

भावनगर की 52 सीटों में भाजपा ने 44 सीटें जीतीं जबकि कांग्रेस को 8 सीटों से संतोष करना पड़ा।


मध्यम शहरों में भी भाजपा की मजबूत पकड़

कर्मसद-आणंद में भाजपा ने 52 में से 43 सीटें जीतीं। कांग्रेस को 8 सीटें मिलीं और 1 सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई।

गांधीधाम में भाजपा ने 41 सीटें जीतीं जबकि कांग्रेस को 11 सीटें मिलीं।

नडियाद में भाजपा ने लगभग क्लीन स्वीप करते हुए 52 में से 51 सीटें जीत लीं। कांग्रेस को केवल 1 सीट मिली।

नवसारी में भी भाजपा ने 50 सीटें जीतकर शानदार प्रदर्शन किया जबकि कांग्रेस को सिर्फ 2 सीटें मिलीं।


पोरबंदर और मोरबी में BJP का क्लीन स्वीप

सभी सीटों पर भाजपा का कब्जा

पोरबंदर और मोरबी में भाजपा ने सभी 52-52 सीटों पर जीत दर्ज की। यह परिणाम विपक्ष के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

सुरेंद्रनगर में भी भाजपा ने 52 में से 51 सीटें जीत लीं और कांग्रेस को सिर्फ 1 सीट मिली।

यह साफ दिखाता है कि भाजपा का संगठन सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे और मध्यम क्षेत्रों में भी उतना ही मजबूत है।


नगरपालिकाओं और पंचायतों में भी भाजपा का जलवा

84 नगरपालिकाओं की 2,030 सीटों में भाजपा ने 1,791 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस को 414 सीटें मिलीं और अन्य दलों को 144 सीटें मिलीं।

34 जिला पंचायतों की 1,090 सीटों में भाजपा ने 568 सीटें हासिल कीं। कांग्रेस को 77 सीटें और अन्य दलों को 30 सीटें मिलीं।

260 तालुका पंचायतों की 5,234 सीटों में भाजपा ने 2,397 सीटें जीतीं। कांग्रेस को 591 सीटें मिलीं जबकि अन्य दलों के खाते में 329 सीटें गईं।

यह नतीजे दिखाते हैं कि भाजपा की पकड़ गांवों और स्थानीय प्रशासन तक गहराई से बनी हुई है।


कांग्रेस और AAP के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश

इन नतीजों ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों के लिए गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस कुछ क्षेत्रों में सीमित सफलता जरूर हासिल कर पाई, लेकिन राज्यव्यापी चुनौती पेश करने में असफल रही।

AAP की मौजूदगी कुछ चुनिंदा सीटों तक ही सीमित रही। खासकर सूरत जैसे क्षेत्रों में जहां पार्टी ने पहले उम्मीदें जगाई थीं, वहां भी उसे बड़ा झटका लगा।

यह परिणाम बताते हैं कि गुजरात में भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक दूरी लगातार बढ़ रही है।


Conclusion

गुजरात निकाय चुनाव 2026 के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि राज्य में भाजपा की राजनीतिक जड़ें बेहद मजबूत हैं। नगर निगमों से लेकर पंचायतों तक पार्टी की यह जीत केवल चुनावी सफलता नहीं, बल्कि संगठन, रणनीति और जनविश्वास का परिणाम है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया ने भी यह स्पष्ट कर दिया कि भाजपा इस जनादेश को विकास और सुशासन की स्वीकृति मान रही है। आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए भी ये नतीजे विपक्ष के लिए चेतावनी और भाजपा के लिए आत्मविश्वास का बड़ा आधार बन सकते हैं।

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