वॉशिंगटन/दुबई | 29 अप्रैल, 2026 | US-Iran War Live: 28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका और ईरान के बीच भीषण युद्ध को आज ठीक दो महीने पूरे हो गए हैं। इस अवसर पर ईरान ने तनाव कम करने की दिशा में एक बड़ा कूटनीतिक दांव चला है। समाचार एजेंसी ‘एसोसिएटेड प्रेस’ (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने प्रस्ताव दिया है कि यदि अमेरिका अपनी नाकेबंदी हटा ले और युद्ध समाप्त कर दे, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपनी पकड़ ढीली कर देगा।
हालांकि, व्हाइट हाउस से आ रहे संकेत दुनिया को डराने वाले हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के इस प्रस्ताव से असंतुष्ट नजर आ रहे हैं, जिससे युद्ध विराम की उम्मीदों पर फिलहाल पानी फिरता दिख रहा है।
ट्रंप और रूबियो का कड़ा रुख: “परमाणु कार्यक्रम पर समझौता नहीं”
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने स्पष्ट कर दिया है कि वाशिंगटन ऐसे किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं करेगा जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को शामिल न किया गया हो। अमेरिका की ‘रेड लाइन’ बहुत साफ है—जब तक तेहरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को पूरी तरह त्यागने पर लिखित गारंटी नहीं देता, तब तक युद्ध विराम की संभावना कम है।
बड़ी खबर: ओपेक (OPEC) से अलग होगा यूएई (UAE)
इस युद्ध के बीच खाड़ी क्षेत्र से सबसे चौंकाने वाली खबर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की ओर से आई है। यूएई ने आधिकारिक घोषणा की है कि वह 1 मई, 2026 से तेल निर्यातक देशों के संगठन ‘ओपेक’ से अलग हो जाएगा।
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बड़ा प्रभाव: यूएई ओपेक के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है। इसके बाहर निकलने से इस तेल कार्टेल की वैश्विक धाक काफी कम हो जाएगी।
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बाजार का गणित: विशेषज्ञों का मानना है कि यूएई का यह कदम भविष्य में तेल की कीमतों को कम करने में मदद कर सकता है क्योंकि वह ओपेक के उत्पादन प्रतिबंधों से मुक्त होकर स्वतंत्र रूप से सप्लाई बढ़ा सकेगा।
तेल की कीमतें: 50% से अधिक का उछाल
युद्ध का सबसे घातक असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ा है। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें $111 प्रति बैरल के पार बनी रहीं। यह युद्ध शुरू होने से पहले की कीमतों की तुलना में 50% से भी अधिक की बढ़ोतरी है, जिससे पूरी दुनिया में महंगाई का खतरा मंडरा रहा है।
सऊदी अरब में खाड़ी देशों की बैठक: ईरान की निंदा
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अध्यक्षता में खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। कतर, बहरीन, कुवैत और यूएई के नेताओं ने ईरान की हरकतों की कड़े शब्दों में निंदा की। परिषद ने मांग की है कि होर्मुज में “नेविगेशन की सुरक्षा और स्वतंत्रता” को तुरंत बहाल किया जाए। इन देशों ने सुरक्षा के मद्देनजर सैन्य एकीकरण को और मजबूत करने पर भी सहमति जताई है।
पेंटागन पर बढ़ता दबाव: रक्षा सचिव की पहली गवाही
अमेरिका में इस युद्ध के औचित्य को लेकर राजनीतिक घमासान तेज है। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ बुधवार को पहली बार कांग्रेस (संसद) के सामने गवाही देंगे।
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भारी भरकम बजट: हेगसेथ राष्ट्रपति ट्रंप के $1.5 ट्रिलियन के विशाल रक्षा बजट अनुरोध का बचाव करेंगे।
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सांसदों का गुस्सा: दोनों पार्टियों के सांसद इस बात से नाराज हैं कि युद्ध की सटीक जानकारी उनसे छिपाई जा रही है। इस सुनवाई में शीर्ष अमेरिकी सैन्य अधिकारी जनरल डैन केन की मौजूदगी से माहौल और भी गरमाने की उम्मीद है।
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी: “परमाणु विनाश का खतरा”
संयुक्त राष्ट्र में परमाणु अप्रसार संधि (NPT) की समीक्षा के लिए चल रहे सम्मेलन में महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मानवता को आगाह किया है। उन्होंने कहा कि दशकों में पहली बार दुनिया में परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ रही है। गुटेरेस ने चेतावनी दी कि यदि देश एकजुट नहीं हुए, तो दुनिया “परमाणु विनाश” के मुहाने पर खड़ी है।
युद्ध के 60 दिन: प्रमुख घटनाक्रम
| क्षेत्र | ताज़ा स्थिति |
| कूटनीति | ईरान का ‘होर्मुज’ प्रस्ताव ट्रंप ने लगभग ठुकराया। |
| अर्थव्यवस्था | कच्चा तेल $111 के पार, यूएई ओपेक छोड़ने को तैयार। |
| सैन्य | अमेरिका का $1.5 ट्रिलियन का नया रक्षा बजट पेश। |
| वैश्विक | UN ने परमाणु हथियारों के बढ़ते भंडार पर जताई गहरी चिंता। |
दो महीने की इस जंग ने दुनिया को एक ऐसी अनिश्चितता में डाल दिया है जहाँ कूटनीति विफल होती दिख रही है। जहाँ ईरान बातचीत का रास्ता खोलना चाह रहा है, वहीं अमेरिका का कड़ा रुख संकेत दे रहा है कि यह संघर्ष अभी और लंबा खिंच सकता है। यूएई का ओपेक से बाहर जाना वैश्विक तेल राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो सकता है, जिसके परिणाम आने वाले हफ्तों में साफ होंगे।

