दावोस | आंध्र प्रदेश न्यूज़
आंध्र प्रदेश सरकार बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। राज्य के आईटी और शिक्षा मंत्री नारा लोकेश ने कहा है कि सरकार 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाने पर विचार कर रही है, ठीक उसी तरह जैसे ऑस्ट्रेलिया में किया गया है।
दावोस में ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में नारा लोकेश ने कहा कि कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया पर दिखने वाले कंटेंट को पूरी तरह समझ नहीं पाते, जिससे उनके मानसिक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि इस पर सख्त कानूनी ढांचा बनाया जाए।
👶 बच्चों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता
मंत्री लोकेश ने कहा:
“एक निश्चित उम्र से कम बच्चों को सोशल मीडिया पर नहीं होना चाहिए। वे नहीं समझ पाते कि उन्हें क्या दिखाया जा रहा है। हमें उन्हें इससे दूर रखने के लिए मजबूत कानून बनाने होंगे।”
भारत में अभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के लिए पैरेंटल कंट्रोल जैसी व्यवस्थाएं हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक व्यापक स्तर पर प्रतिबंध को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई है।
कानूनी और तकनीकी चुनौतियां
हालांकि कई अदालतों में सोशल मीडिया पर कड़े नियंत्रण की मांग को लेकर याचिकाएं दायर हो चुकी हैं, लेकिन किसी भी राज्य द्वारा इस तरह की रोक लागू करना कानूनी और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
फिर भी भारत ने हाल के वर्षों में डेटा प्राइवेसी, साइबर सुरक्षा और सोशल मीडिया से जुड़े कानूनों में कई बदलाव किए हैं ताकि तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया के साथ कदम मिलाया जा सके।
दुनिया भर में बिग टेक पर लगाम की तैयारी
यह मुद्दा सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। इंडोनेशिया, डेनमार्क, ब्राज़ील जैसे देशों में भी सरकारें बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाले ऑनलाइन कंटेंट और बिग टेक कंपनियों की भूमिका पर सख्ती दिखा रही हैं।
आंध्र प्रदेश को बना रहे टेक हब
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू राज्य को आईटी और इंडस्ट्रियल हब के रूप में विकसित कर रहे हैं। हाल ही में राज्य ने गूगल के साथ 15 अरब डॉलर का डेटा सेंटर समझौता भी किया है।
नारा लोकेश ने कहा:
“हम 2047 तक 2.4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना चाहते हैं। हम सिर्फ घोषणाएं नहीं करते, हम उन्हें लागू भी करते हैं।”

