नई दिल्ली/संयुक्त राष्ट्र।
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान के उन आरोपों का कड़ा जवाब दिया है, जिनमें उसने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की कोशिश की। भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरिश परवथानेनी ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा दिया गया बयान न केवल झूठा है बल्कि पूरी तरह स्वार्थ से प्रेरित है।
UN सुरक्षा परिषद की बहस में पाकिस्तान के बयान पर भारत की तीखी प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस के दौरान, जिसका विषय था — “अंतरराष्ट्रीय कानून का पुनः सशक्तिकरण: शांति, न्याय और बहुपक्षीय व्यवस्था के रास्ते”, पाकिस्तान के राजदूत असीम इफ्तिखार अहमद ने ऑपरेशन सिंदूर, जम्मू-कश्मीर और सिंधु जल संधि का ज़िक्र किया।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए हरिश परवथानेनी ने कहा कि पाकिस्तान का एजेंडा एक ही बिंदु पर केंद्रित है — भारत और उसके नागरिकों को नुकसान पहुँचाना।
“ऑपरेशन सिंदूर पर पाकिस्तान का बयान झूठा और स्वार्थी” – भारत
हरिश परवथानेनी ने कहा:
“मैं पाकिस्तान के प्रतिनिधि की बातों का जवाब दे रहा हूँ, जो सुरक्षा परिषद का सदस्य होते हुए भी भारत और हमारे लोगों को नुकसान पहुँचाने के एकतरफा एजेंडे पर काम कर रहा है। उन्होंने पिछले साल मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर पर एक झूठा और स्वार्थपूर्ण विवरण दिया है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान आतंकवाद को क्षेत्र में “नया सामान्य” बताने की कोशिश कर रहा है, जिसे भारत सिरे से खारिज करता है।
आतंकवाद को “नॉर्मल” बताने की कोशिश पर भारत की आपत्ति
भारत के प्रतिनिधि ने कहा:
“हमने पाकिस्तान के प्रतिनिधि से ‘न्यू नॉर्मल’ की बातें सुनी हैं। मैं दोहराना चाहता हूँ कि आतंकवाद को कभी भी सामान्य नहीं बनाया जा सकता। जैसा पाकिस्तान चाहता है, वैसा सोच पूरी तरह अस्वीकार्य है।”
उन्होंने याद दिलाया कि पिछले साढ़े छह दशकों में पाकिस्तान ने तीन युद्ध और हजारों आतंकी हमलों के ज़रिए भारत को नुकसान पहुँचाया है, जिसमें हजारों निर्दोष भारतीय नागरिकों की जान गई है।
सिंधु जल संधि पर भारत का रुख क्यों बदला
भारत ने स्पष्ट किया कि:
“भारत को मजबूर होकर यह फैसला लेना पड़ा कि सिंधु जल संधि को तब तक स्थगित रखा जाएगा, जब तक पाकिस्तान — जो वैश्विक आतंकवाद का केंद्र बन चुका है — सीमा पार और अन्य सभी तरह के आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह और स्थायी रूप से बंद नहीं करता।”
पाकिस्तान को ‘रूल ऑफ लॉ’ पर आत्ममंथन की सलाह
हरिश परवथानेनी ने पाकिस्तान को कानून के शासन पर सोचने की सलाह देते हुए कहा:
“पाकिस्तान यह विचार करे कि उसने अपनी सेना को 27वें संशोधन के ज़रिये कैसे एक संवैधानिक तख्तापलट करने दिया और अपने सैन्य प्रमुख को आजीवन छूट कैसे दे दी।”
निष्कर्ष
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने साफ कर दिया है कि:
• आतंकवाद को किसी भी रूप में वैध या सामान्य नहीं ठहराया जा सकता
• पाकिस्तान के दावे तथ्यहीन और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित हैं
• भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने हितों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी मजबूती से खड़ा रहेगा

