India EU trade deal 2026: भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने अपने हाल ही में संपन्न हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का पहला विस्तृत विवरण जारी किया है। आंकड़े दर्शाते हैं कि मुख्य यूरोपीय निर्यात क्षेत्रों में टैरिफ में व्यापक कटौती होगी। इस बदलाव का प्रभाव आने वाले दशक में भारत के आयात बाजार पर महत्वपूर्ण रूप से पड़ेगा।
ऑटो सेक्टर में सबसे बड़ा बदलाव
सबसे बड़ी खबर ऑटो सेक्टर से है। भारत धीरे-धीरे यूरोपीय कारों पर लागू टैरिफ को 10% तक घटाएगा। वर्तमान में ये टैरिफ अक्सर लगभग 70% तक पहुँचते हैं। इस संक्रमण अवधि के दौरान सालाना 2,50,000 वाहन की कोटा लागू रहेगा। EU के अनुसार, इस कदम से भारत के प्रीमियम कार बाजार में नई दिशा और प्रतिस्पर्धा की संभावनाएं बन सकती हैं।
व्यापक टैरिफ कटौती
यह समझौता सिर्फ ऑटो तक सीमित नहीं है। भारत में प्रवेश करने वाले 90% से अधिक EU उत्पादों के टैरिफ को या तो समाप्त कर दिया जाएगा या घटा दिया जाएगा। ब्रसेल्स को उम्मीद है कि यह समझौता 2032 तक EU के भारत निर्यात को दोगुना कर सकता है और सालाना लगभग 4 अरब यूरो की बचत करेगा। मशीनरी पर वर्तमान में 44% तक, रसायनों पर 22% तक और फार्मास्यूटिकल्स पर लगभग 11% तक टैरिफ हैं, जो अब समाप्त या कम कर दिए जाएंगे।
एयरोस्पेस और उच्च तकनीकी उपकरणों में लाभ
हवाई और अंतरिक्ष यान उत्पादों पर लगभग पूरी तरह से टैरिफ हटाए जाएंगे। रसायनों के लगभग सभी उत्पाद लाइनों पर शुल्क समाप्त होगा। ऑप्टिकल, मेडिकल और सर्जिकल उपकरणों के 90% उत्पादों पर टैरिफ हटाने से भारत में अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सुविधाओं की लागत कम हो सकती है।
खाद्य और पेय पदार्थों पर बड़ा प्रभाव
भारत यूरोपीय वाइन पर टैरिफ को 20-30%, शराब पर 40% और बीयर पर 50% तक घटाएगा। EU से आयातित ऑलिव ऑयल, मार्जरीन और वनस्पति तेलों पर भी टैरिफ कम या समाप्त होंगे। मेडिकल उपकरणों पर भी लगभग सभी आइटम्स का टैरिफ शून्य की ओर जाएगा।
सेवाओं में यूरोपीय संघ को विशेष अधिकार
सेवा क्षेत्र में EU को वित्तीय और समुद्री सेवाओं में विशेष पहुंच मिली है। ब्रसेल्स इसे इस क्षेत्र में एक बड़ा ब्रेकथ्रू मान रहा है, जहां भारत ने परंपरागत रूप से खुलापन धीमी गति से अपनाया है।
जलवायु परिवर्तन और निवेश में सहयोग
EU ने अगले दो वर्षों में भारत को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने और पर्यावरण-फ्रेंडली निवेश बढ़ाने के लिए 500 मिलियन यूरो देने का भी वादा किया है।
भारत की निर्यात नीतियों पर असर
ईयू 99.5% व्यापार किए जाने वाले वस्त्रों पर सात वर्षों की अवधि में आयात शुल्क घटाएगा। इसमें भारतीय समुद्री उत्पाद, चमड़ा, वस्त्र, रसायन, रबर, बेस मेटल्स और गहनों सहित अन्य उत्पाद शामिल हैं। भारत के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, यह कदम यूरोपीय निर्यातकों के लिए भारत के बाजार को और अधिक खोल देगा और दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते उपभोक्ता बाजार में यूरोप की पैठ मजबूत करेगा।
घरेलू उद्योग पर चुनौती
भारत के लिए अब चुनौती यह होगी कि ऑटो, मशीनरी, रसायन और मेडिकल उपकरणों में घरेलू कंपनियां यूरोपीय प्रतिस्पर्धा का सामना कैसे करेंगी। इस समझौते से घरेलू उत्पादकों को अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने और नई तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता होगी।

