The Wire Modi Cartoon Controversy: Instagram और X से हटाया गया वीडियो | जानिए पूरा मामला

Channelindiaone
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The Wire Modi Cartoon Controversy: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आधारित एक व्यंग्यात्मक एनिमेशन वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram और X से हटाए जाने के बाद देश में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इस वीडियो को डिजिटल न्यूज़ पोर्टल The Wire ने प्रकाशित किया था।

The Wire का दावा है कि Meta के स्वामित्व वाले Instagram और एलन मस्क की कंपनी X ने सरकारी दबाव के चलते इस वीडियो को हटाया है। इस घटना को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देखा जा रहा है।

नए IT नियमों के बीच सामने आया मामला

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब हाल ही में एक रिपोर्ट में बताया गया कि केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को अवैध सामग्री हटाने के लिए केवल तीन घंटे का समय दिया है।

पहले यह समयसीमा 36 घंटे की थी, जिसे अब काफी कम कर दिया गया है। यह बदलाव भारत के 2021 के आईटी नियमों में संशोधन के तहत किया गया है।

इन नियमों को लेकर पहले भी सरकार और बड़ी टेक कंपनियों के बीच टकराव हो चुका है।

संसद की घटनाओं से प्रेरित था वीडियो

The Wire द्वारा जारी किया गया यह एनिमेशन वीडियो हाल ही में संसद में हुई घटनाओं से प्रेरित था। यह वीडियो बजट सत्र के दौरान हुए राजनीतिक तनाव को व्यंग्य के माध्यम से दिखाता है।

इस वीडियो में 1980 के दशक के एक बच्चों के गीत को बैकग्राउंड में इस्तेमाल किया गया था, जिससे इसका प्रभाव और गहरा हो गया।

वीडियो में उस दिन की घटनाओं को दर्शाया गया, जब प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा को संबोधित नहीं किया था।

संसद में बढ़ा था राजनीतिक तनाव

बीते कुछ दिनों में संसद में कई बार तीखी बहस और हंगामे देखने को मिले हैं। एक सप्ताह पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया था कि उन्होंने प्रधानमंत्री को संसद आने से मना किया था, क्योंकि कुछ सांसदों से संभावित खतरे की आशंका थी।

खासतौर पर महिला सांसदों को लेकर भी चर्चा हुई थी।

इसी दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे की एक अप्रकाशित किताब से अंश पढ़ने से भी रोका गया था, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया था।

The Wire के अकाउंट पर अस्थायी रोक

The Wire का कहना है कि उसका Instagram अकाउंट सोमवार को करीब दो घंटे के लिए ब्लॉक कर दिया गया था।

हालांकि बाद में अकाउंट को बहाल कर दिया गया, लेकिन वीडियो अब भी भारत में दिखाई नहीं दे रहा है।

वीडियो के लिंक पर यह संदेश दिखाया जा रहा है कि इसे कानूनी आदेश के चलते भारत में रोका गया है।

संपादक सिद्धार्थ वरदराजन का बयान

The Wire के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन ने इस मामले पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का वर्ष 2018 में लंदन में दिया गया एक बयान साझा किया, जिसमें मोदी ने कहा था कि आलोचना से लोकतंत्र मजबूत होता है।

वरदराजन ने कहा कि सरकार आलोचना को सहन करने के बजाय उसे दबाने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस वीडियो को अधिक से अधिक साझा करें।

“व्यंग्य भी अब आपातकाल बन गया” – The Wire

वरदराजन ने आरोप लगाया कि सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी कानून का दुरुपयोग किया है।

उनका कहना है कि कानून के अनुसार किसी भी सामग्री को हटाने से पहले प्रकाशक को सूचना देना जरूरी होता है, सिवाय आपात स्थिति के।

लेकिन The Wire को कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकार ने व्यंग्य और हास्य को भी “आपातकालीन मामला” बना दिया है।

उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरनाक बताया।

सोशल मीडिया और सेंसरशिप की बहस

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर सेंसरशिप और प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज हो गई है।

कई पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और विपक्षी नेता इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बता रहे हैं।

वहीं सरकार समर्थक इसे कानून का पालन और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार बता रहे हैं।

सरकार और प्लेटफॉर्म की चुप्पी

अब तक इस मामले पर न तो केंद्र सरकार और न ही Instagram या X की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने आया है।

हालांकि, प्लेटफॉर्म आमतौर पर कानूनी आदेश मिलने पर कंटेंट हटाने की बात कहते रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस तरह के मामलों की संख्या बढ़ सकती है।

डिजिटल मीडिया के लिए बढ़ती चुनौती

यह मामला भारतीय डिजिटल मीडिया के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है।

जहां एक ओर सोशल मीडिया पत्रकारिता का बड़ा माध्यम बन चुका है, वहीं दूसरी ओर कानूनी दबाव और सेंसरशिप इसकी स्वतंत्रता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

छोटे और स्वतंत्र मीडिया संस्थानों के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण होती जा रही है।

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री मोदी पर बने व्यंग्य वीडियो को हटाए जाने की घटना ने एक बार फिर भारत में मीडिया की स्वतंत्रता, सरकार की भूमिका और सोशल मीडिया की जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है।

यह मामला केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की आज़ादी और डिजिटल अधिकारों से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है।

आने वाले समय में अदालतों और सरकार के फैसले यह तय करेंगे कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्वतंत्र पत्रकारिता की सीमाएं क्या होंगी।

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