Gold Silver Price India 2026: Customs Duty and Budget Impact

Channelindiaone
7 Min Read

भारत में सोने और चांदी के दाम क्यों बढ़ते हैं?

Gold Silver Price India 2026: हाल ही में सोने और चांदी की बढ़ती कीमतों को लेकर चर्चा तेज है। लेकिन ज्यादातर बातचीत में एक अहम पहलू को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है: कस्टम ड्यूटी। कस्टम ड्यूटी वह कर है जो सरकार विदेश से आयात और निर्यात की जाने वाली वस्तुओं पर लगाती है। इसका उद्देश्य सिर्फ राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि देश के स्थानीय व्यापारियों और उद्योगों की सुरक्षा भी है।

भारत में सोना और चांदी की कीमतों पर आयात कर का असर बहुत बड़ा होता है। जब सोना या चांदी आयात की जाती है, तो उस पर लगाया गया कर ज्वैलरी की कीमतों में जुड़ जाता है। ज्वैलरी की कीमत सीधे मांग को प्रभावित करती है क्योंकि सोना केवल निवेश या धातु नहीं है, बल्कि धार्मिक अनुष्ठानों और शादियों में भी इसकी अत्यधिक मांग होती है

इसलिए, कस्टम ड्यूटी में कोई भी बदलाव सीधे सोने और चांदी के दामों पर असर डालता है।

इसे पढ़ना न भूलें: भारत में सोने-चांदी के दाम ने बनाया नया रिकॉर्ड, बाजार में मचा हड़कंप — 29 जनवरी 2026 के ताज़ा रेट

भारत की सोने की भारी निर्भरता और आयात

भारत अपने सोने की जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात पर बहुत निर्भर है। अक्टूबर 2025 में, दिवाली के करीब, भारत के सोने के आयात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई और यह $14.72 बिलियन तक पहुँच गया, जैसा कि वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों में दर्ज है।

सोना भारत में सिर्फ निवेश का साधन नहीं है, बल्कि इसका सांस्कृतिक और पारंपरिक महत्व भी है। देश में उत्पादन क्षमता बहुत कम होने के कारण, कस्टम ड्यूटी में बदलाव सोने और चांदी की कीमतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

याद रखें: ज्यादा कस्टम ड्यूटी = महंगा सोना और चांदी, और कम कस्टम ड्यूटी = कीमतों में गिरावट

केंद्रीय बजट और कस्टम ड्यूटी का कनेक्शन

कस्टम ड्यूटी का निर्धारण केंद्रीय सरकार करती है, जो हर साल संसदीय बजट में आयात/निर्यात करों का प्रस्ताव और संशोधन करती है। वित्त मंत्री बजट भाषण के दौरान किसी भी बदलाव की घोषणा करते हैं।

आगामी संयुक्त बजट 2026, जो 1 फरवरी 2026 को पेश किया जाएगा, के मद्देनजर निवेशक इस बात को लेकर उत्सुक हैं कि क्या इस बार सोने और चांदी पर कोई बड़ा ऐलान होगा, जो देश में धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर सके।

पिछले पांच वर्षों में बजट में कस्टम ड्यूटी की घोषणाएँ

2021

संयुक्त बजट 2021 में सरकार ने सोने और चांदी की बेसिक कस्टम ड्यूटी 12.5% से घटाकर 7.5% कर दी। इसका उद्देश्य स्मगलिंग रोकना और आयात लागत कम करना था। साथ ही, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर और डेवलपमेंट सेस (AIDC) 2.5% भी सोने और चांदी पर लगाया गया। कुल मिलाकर, कर भार कम हुआ और धातुओं को आम लोगों के लिए सस्ता बनाया गया।

2022

बजट 2022 में सोने और चांदी पर कस्टम ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया।

2023

बजट 2023 में चांदी की बेसिक कस्टम ड्यूटी 10% कर दी गई, जबकि पहले यह 7.5% थी। सोने और प्लेटिनम पर ड्यूटी बढ़ाई गई, साथ ही AIDC 5% कर दिया गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, “चांदी और सोने की डोर, बार और उससे बने आर्टिकल पर ड्यूटी बढ़ाई गई ताकि आयात में संतुलन बनाए रखा जा सके।”

2024

बजट 2024 में सोने और चांदी की कस्टम ड्यूटी घटाकर सिर्फ 6% कर दी गई। इसमें 5% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 1% AIDC शामिल थी। इसका उद्देश्य स्मगलिंग को रोकना और धातुओं को देशभर में सुलभ बनाना था।

2025

बजट 2025 में सोने और चांदी की कस्टम ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया। अक्टूबर 2025 में मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि स्मगलिंग में वृद्धि देखी गई है।

बजट 2026 की संभावित दिशा

यदि सरकार इस बार बजट 2026 में सोने और चांदी पर कस्टम ड्यूटी में कटौती करती है, तो भारत में कीमतें थोड़ी कम हो सकती हैं। हालांकि, इसका असर लंबे समय तक नहीं रहेगा क्योंकि सोना और चांदी की कीमतें वैश्विक मार्केट के रुझानों से भी बहुत प्रभावित होती हैं

इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड और रेगुलेशन

बजट 2021 में सरकार ने सोने के लिए SEBI को नियामक घोषित किया और देश में ई-गोल्ड रसीद (EGR) का परिचय दिया। इसका उद्देश्य सोने के व्यापार को पारदर्शी और कुशल बनाना था।

बजट 2023 में वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि ई-गोल्ड रसीद और भौतिक सोने के बीच कन्वर्ज़न को ट्रांसफर नहीं माना जाएगा, जिससे इसे कैपिटल गेन टैक्स से छूट मिलेगी। यह कदम निवेशकों को इलेक्ट्रॉनिक सोने में निवेश को बढ़ावा देगा।

सोने और चांदी की लगातार बढ़ती कीमतें

पिछले छह महीनों से सोना और चांदी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मार्केट में तेजी से बढ़ रहे हैं। अनिश्चितता के समय निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं, इसलिए इनकी मांग बढ़ती है।

2025 में, भूराजनीतिक तनाव, व्यापार युद्ध, टैरिफ और मुद्रा गिरावट की वजह से कीमतें लगातार ऊपर गईं। 2026 की शुरुआत से ही यह वृद्धि जारी है, जिसमें यूएस-वेनेज़ुएला तनाव, ग्रीनलैंड और ईयू टैरिफ, और ईरान के साथ तनाव शामिल हैं।

29 जनवरी, 2026 को MCX पर सोने के वायदा अनुबंध ने ₹1,80,779 प्रति 10 ग्राम का रिकॉर्ड स्तर छू लिया, जनवरी की शुरुआत के मुकाबले 31% वृद्धि दर्ज हुई।

इसी दिन चांदी का वायदा ₹4,08,487 प्रति किलो तक पहुंच गया, जनवरी 2026 में लगभग 71% की वृद्धि हुई।

वैश्विक बाजार में भी सोने ने $5,626.8 प्रति औंस और चांदी ने $119.51 प्रति औंस का नया उच्च स्तर छुआ।

निष्कर्ष

कस्टम ड्यूटी और बजट के ऐलान का सोने और चांदी की कीमतों पर सीधा और महत्वपूर्ण असर होता है। निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि आयात कर, बजट घोषणाएं और वैश्विक मार्केट रुझान मिलकर कीमतों को तय करते हैं।

बजट 2026 में संभावित कस्टम ड्यूटी में बदलाव, ई-गोल्ड नीतियों के विस्तार और स्मगलिंग पर कदम सोने और चांदी की घरेलू कीमतों के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!